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सुबह से ही बैंकों के बाहर लगी कतारें, 3 हफ्ते बाद मिलेगी राहत

जनता की यह परेशानी अभी दो से तीन हफ्तों तक और बरकरार रह सकती है।

सुबह से ही बैंकों के बाहर लगी कतारें, 3 हफ्ते बाद मिलेगी राहत
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नई दिल्ली. 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा नोट बंदी की घोषणा के बाद से 5वें दिन भी जनता को राहत मिलती दिखाई नहीं दे रही है। हालांकी सरकार की तरफ से बैंकों को आदेश है कि वो रविवार के दिन भी बैंक खुले रखें। सरकार के इतने प्रयासों के बाद भी लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
रविवार सुबह से ही बैंकों के बाहर पैसा बदलने वालों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। सरकार व रिजर्व बैंक की मुस्तैदी के बावजूद बैंकों व एटीएम के पास पर्याप्त नकदी नहीं पहुंच पाई और लोगों की भीड़ नए नोट लेने के लिए बैंक व एटीएम के चक्कर लगा रही है। इससे भी ज्यादा चिंता की बात यह है कि जनता की यह परेशानी अभी दो से तीन हफ्तों तक और बरकरार रह सकती है। सरकार का कहना है कि जनता को परेशान होने की जरुरत नहीं क्योंकि आरबीआइ के पास पर्याप्त नए नोट हैं।
जनता धैर्य से काम ले
आम जनता की परेशानियों और सामान्य बैंकिंग सेवा हासिल करने में आ रही दिक्कतों को देखते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कल आरबीआइ व देश के प्रमुख बैंकों के साथ अहम बैठक भी की है। बैठक के बाद उन्होंने जनता को हो रही दिक्कतों का खेद जताया लेकिन जनता से यह भी आग्रह किया कि वह धैर्य से काम ले। जेटली ने माना कि यह बहुत बड़ा काम है और इसे रातों रात संपन्न नहीं किया जा सकता। पुराने 500 व 1000 के नोट बदलने का काम 30 दिसंबर तक जारी रहेगा।
500 के नोटों की छपाई जारी है
जेटली ने कहा कि जहां तक बैंकों के एटीएम के सामान्य तौर पर करने की बात है तो इसमें दो से तीन हफ्ते का समय लगेगा।वित्त मंत्री ने कहा है कि 500 के नोटों छपाई जारी है और इसे जल्द ही बैंकों तक पहुंचा दिया जाएगा। जिन लोगों को बैंक या एटीएम से दो हजार के नोट मिल रहे हैं उन्हें बाजार में इसका खुदरा करवाने में दिक्कत हो रही है।
हालात सुधरने में अभी तीन सप्ताह का अतिरिक्त समय
वहीं विपक्ष लगातार इस फैसले को लेकर सरकार पर अंगुली उठा रहा है। केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्ष के सवालों पर कहा है कि उन्हें जो कहना है वह कहें, हमें जो कहना और करना है हम कहेंगे। सरकार ने साफ कर दिया है कि हालात सुधरने में अभी तीन सप्ताह का अतिरिक्त समय लग सकता है।
नई करेंसी के लिए तैयार नहीं एटीएम
देश में दो लाख से ज्यादा एटीएम हैं और उन्हें नए नोट के मुताबिक संचालित करने के लिए बहुत बड़े पैमाने पर काम चल रहा है। इन मशीनों के स्विचिंग गीयर से लेकर हर एक मशीन में बदलाव करने होंगे जिसमें वक्त लग रहा है। असलियत में देश के एटीएम को नए नोटों को तैयार करने के लायक अभी बनाया भी नहीं जा सका है और न ही नए 500 के नोट को प्रचलन के लिए उतारा जा सका है। फिलहाल 1.20 लाख एटीएम चालू हैं। इन एटीएम से 100 रुपये के नोट निकल रहे हैं।
कुछ एटीएम 100 के नोट लायक भी नहीं
देश में कई ऐसे एटीएम भी हैं, जिनकी सेटिंग 100 के नोटों के हिसाब से भी नहीं है। इंडस्ट्री के सूत्रों के मुताबिक, इन नोटों की सप्लाई में कमी बैंकों की डिमांड की वजह से ही 100 के नोट के हिसाब से मशीनों की सेटिंग नहीं रखी गई। दस्तूर ने बताया कि सभी एटीएम से बंद हो चुके नोट्स को हटा दिया गया है। करीब 80 फीसदी मशीनों को 100 के नोटों के हिसाब से रिकैलिब्रेट कर दिया गया है। मशीनों को 2000 के नोटों के हिसाब से रिकैलिब्रेट करने का काम सोमवार से शुरू होगा। बचे हुए काम और सीमित संसाधनों के मद्देनजर इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना है कि हालात सामान्य होने में अभी कुछ हफ्ते जरूर लेंगे।

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