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जयललिता के निधन के बाद सदमे से 280 लोगों की मौत

पार्टी ने मरने वालों के परिवार को 3 लाख मुआवजा देने का ऐलान किया है।

जयललिता के निधन के बाद सदमे से 280 लोगों की मौत
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चेन्नई. तमिलनाडु की सीएम जयललिता के निधन के सदमे से उनके करीब 280 प्रशंसकों की मौत हो चुकी है। एआइएडीएमके पार्टी ने दावा किया है कि जयललिता की बीमारी और फिर निधन की खबर सुनकर दु:ख और सदमे से अब तक 280 लोगों की मौत हो चुकी। पार्टी ने मरने वालों के परिवार को 3 लाख रुपए मुआवजा देने का ऐलान किया है। शनिवार को पार्टी ने इन लोगों की लिस्ट जारी की है।
बता दें 5 दिसबंर को रात करीब 11:30 बजे जयललिता का निधन हो गया था। जयललिता तमिलनाडु की जनता के लिए भगवान के समान थीं। वह गरीबों की नेता थीं। जयललिता के निधन के बाद दु:ख और सदमे से अब तक 280 लोगों की मौत हो चुकी है। इसलिए पार्टी ने मरने वालों के परिवार को 3 लाख रुपए मुआवजा देने का एलान किया है। इस लिस्ट में राज्य के 8 जिलों के 203 लोग शामिल हैं।
एआइएडीएमके ने बताया कि इन 280 लोगों में से 203 लोग चेन्नई, वेल्लोर, तुरुवालोर, तिरुवअनंतपुरम, कुड्डलोर, कृषिनगर, एरोड और तिरुपुर जिलों के हैं। इससे कुछ दिन पहले पार्टी ने 77 लोगों की लिस्ट जारी की थी। बता दें कि जयललिता 75 दिन तक चेन्नई के अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती रहीं। इस दौरान उनके समर्थक 24 घंटे हॉस्पिटल के बाहर खड़े रहे।
जब जयललिता को आय से अधिक संपत्ति के मामले में सजा होने पर जेल जाना पड़ा था। तब भी कथित तौर पर दुखी हो कर उनके कई समर्थकों ने अपनी जान देने की कोशिश की थी। उस वक्त भी कई लोगों के मरने की खबरें आई थीं। हालांकि, पार्टी ने यह नहीं बताया है कि, मरने वालों की यह तादाद 22 सितंबर को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराए जाने के वक्त से है। या चार दिसंबर को दिल का दौरा पड़ने से।
उधर, कुछ दिन पहले सेंटल इंटेलिजेंस एजेंसीज ने 30 लोगों के मरने और चार लोगों के सुसाइड करने की पुष्टि की थी। मीडिया में यह खबरें आईं कि कथित रूप से सुसाइड की कोशिश करने वाले पार्टी वर्कर्स और अपनी उंगलियां काट लेने वाले लोगों को भी एआइएडीएमके ने 50-50 हजार रुपये देने का एलान किया था।
जयललिता के मेंटर MGR के निधन के बाद हिंसा में 29 लोग मारे गए थे। मुरुथुर गोपालन रामचंद्रन (MGR) ने डीएमके से अलग होकर 1972 में एआईएडीएमके पार्टी बनाई और 5 साल बाद ही सीएम भी बन गए। बता दें एमजीआर जयललिता के मेंटर थे। वे ही अम्मा को राजनीति में लाए थे। एआइएडीएमके के फॉलोअर्स MGR को भगवान से कम नहीं मानते थे। MGR के निधन के वक्त पूरे तमिलनाडु में दंगे शुरू हो गए थे।
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