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25 जून 1975 की वो काली रात जब जयप्रकाश नारायण समेत एक लाख 66 हजार बेगुनाहों को ठूंस दिया गया जेलों में

26 जून 1975 को सुबह देश पर इमरजेंसी थोप दी गई। इस दौरान लगभग एक लाख 66 हजार लोगों को अनिश्चितकाल के लिए बिना उन पर मुकदमा चलाए जेलों में ठूंसा गया था। इसमें जयप्रकाश नारायण सहित सभी विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं को रातों रात गिरफ्तार करवा लिया।

25 जून 1975 की वो काली रात जब जयप्रकाश नारायण समेत एक लाख 66 हजार बेगुनाहों को ठूंस दिया गया जेलों में

यह बात 1975 की है। जनता भ्रष्टाचार और मंहगाई के खिलाफ जय प्रकाश नारायण के नेतृत्व में शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रही थी। सरकार इस तरह के आंदोलन के दमन के लिए हर तरह के हथकण्डे अपना रही थी। लेकिन आंदोलन का धीरे-धीरे पूरे भारत में विस्तार होता गया। इसी दौरान हाईकोर्ट ने राजनारायण बनाम इंदिरा गांधी के मुकदमे में इंदिरा गांधी की लोकसभा की सदस्यता को चुनाव में भ्रष्ट आचरण के अपनाने के कारण रद कर दी थी।

इस पर इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बजाय 25/26 जून 1975 की रात में जयप्रकाश नारायण सहित सभी विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं को रातों रात गिरफ्तार करवा लिया। इसके साथ ही 26 जून 1975 को सुबह देश पर इमरजेंसी थोप दी गई। इस दौरान लगभग एक लाख 66 हजार लोगों को अनिश्चितकाल के लिए बिना उन पर मुकदमा चलाए जेलों में ठूंसा गया था।

इनमें समाजसेवी, राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता और पत्रकार भी शामिल थे। इमरजेंसी वह पराकाष्ठा थी जिस में इंदिरा गांधी ने उन प्रयासों के पश्चात जिसके द्वारा उन्होंने देश की स्वतंत्रता छीनने के प्रयास किये थे, देश को पहुंचाया गया था। 21 महीने की इस अवधि के दौरान सरकार ने संविधान को अपनी निजी सम्पत्ति मान लिया था।

किसी भी व्यक्ति को बिना पूरा कारण बताए और उसके खिलाफ बिना मुकदमा चलाए जेल भेज दिया जाता था। इमरजेंसी में बने कानून के मुताबिक किसी भी सरकारी कर्मचारी को यह इजाजत नहीं थी या उसे इस बात के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता था कि वह किसी अदालत तक को यह बताने को बाध्य नहीं कि अमुक व्यक्ति को किन कारणों से बिना उस पर मुकदमा चलाये जेल क्यों भेजा जा रहा है।

अदालतों के फैसलों और वहां की कार्यवाहियों और विधानसभाओं की कार्यवाहियों को प्रकाशित करने का भी किसी को कोई अधिकार नहीं था। भले ही वह कितनी सच्ची और सही क्यों न हों, सिवाय उस रूप के जो सेंसर को मान्य हो। इमरजेंसी की नृशंसता के लिए इंदिरा गांधी और उनकी कांग्रेस पार्टी के उन सभी चुनकर आये सांसदों को जिम्मेदार माना जाता है जिन्होंने मतदाताओं के प्रति विश्वासघात किया।

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