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Budget 2019: राजीव गांधी और अरुण जेटली समेत इन वित्त मंत्रियों ने बजट पेश करते हुए कही ये मजेदार बातें

सरकार का आखिरी बजट सत्र (Budget Session) 31 जनवरी से 13 फरवरी तक चलेगा। उसके बाद लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Elections 2019) की घोषणा हो जाएगी। बजट 2019 (Budget 2019) मोदी सरकार (Modi Government) का पांचवा और आखिरी बजट होगा। बजट के दौरान वित्त मंत्री का भाषण बहुत बड़ा होता है। ऐसे में बोरियत न हो इसके लिए शेर-ओ-शायरी और कविता भी होती रहती है। आज हम आपको ऐसे ही पांच वित्त मंत्रियों के बारे में बता रहे हैं जो बजट पेश करने के दौरान मनोरंजन भी करते रहे।

Budget 2019: राजीव गांधी और अरुण जेटली समेत इन वित्त मंत्रियों ने बजट पेश करते हुए कही ये मजेदार बातें

सरकार का आखिरी बजट सत्र (Budget Session) 31 जनवरी (31 January) से 13 फरवरी (13 February) तक चलेगा। उसके बाद लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Elections 2019) की घोषणा हो जाएगी। बजट 2019 (Budget 2019) मोदी सरकार (Modi Government) का पांचवा और आखिरी बजट होगा। वित्त मंत्री अरुण जेटली (Arun Jaitley) की तबीयत खराब है। वह अमेरिका में अपना इलाज करा रहे हैं। पियूष गोयल (Piyush Goyal) को वित्त मंत्रालय का कार्यवाहक प्रभार दिया गया है। 1 फरवरी 2019 को सुबह 11 बजे पियूष गोयल (Piyush Goyal) बजट पेश करेंगे। बजट के दौरान वित्त मंत्री का भाषण बहुत बड़ा होता है। ऐसे में बोरियत न हो इसके लिए शेर-ओ-शायरी और कविता भी होती रहती है। आज हम आपको ऐसे ही पांच वित्त मंत्रियों के बारे में बता रहे हैं जो बजट पेश करने के दौरान मनोरंजन भी करते रहे।

राजीव गांधी (Rajiv Gandhi)

1987 में राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) देश के प्रधानमंत्री थे साथ ही वह वित्त मंत्री का पद भी संभाल रहे थे। 1987-88 का बजट पेश करते हुए उन्होंने सिगरेट पर ज्यादा टैक्स लगाया था। इस बारे में बताते हुए उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा था कि मुझे ज्यादा राजस्व जुटाना है। इसके लिए मुझे वित्त मंत्री के भरोसेमंद दोस्तों और स्वास्थ्य मंत्री के दुश्मनों का सहारा लेना होगा।

मनमोहन सिंह (Manmohan Singh)

मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) ज्यादातर शांत रहने वाले लोगों में से हैं। यही कारण है कि उनके आलोचक कहते हैं कि वह अपने प्रधानमंत्री काल में शांत ही रहे। बात है 1991 की, मनमोहन सिंह वित्त मंत्री थे। उन्हें आर्थिक उदारीकरण (Economic Liberalization) का जनक कहा जाता है। 1991 में अपने बजट भाषण के दौरान उन्होंने शायर इकबाल का एक शेर सुनाया। उन्होंने कहा- यूनान-ओ-मिस्र-रोम सब मिट गए जहां से, अब तक मगर है बाकी, नाम-ओ-निशा हमारा।

पी चिदम्बरम (P. Chidambaram)

पी चिदंबरम (P. Chidambaram) कई सालों तक वित्त मंत्री के रूप में रहे। वो कई बजट पेश कर चुके हैं। 1997 में बजट पेश करने के दौरान तमिल कवि तिरुवल्लुवर की कविता सुनाई। उन्होंने कहा कि- इदिप्परई इल्लाथा इमारा मन्नान केदुप्पार इलानुअम केदुम। इसका मतलब था उस राजा पर नजर रखें जो ऐसे लोगों पर भरोसा नहीं करते जो उससे खरी बात कहते हैं, उसका कोई दुश्मन न हो तो भी वह बरबाद हो सकता है।

यशवंत सिन्हा (Yashwant Sinha)

2002 में वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा (Yashwant Sinha) ने मनोरंजन इंडस्ट्री की तारीफ करते हुए कहा था कि पिछले तीन सालों में हर साल फिल्मों के निर्यात करीब दोगुना बढ़ा है। अब समय आ गया है कि हम ऐसी वित्तीय व्यवस्था करें जिसमें हम मनोरंजन उद्योग के लिए ज्यादा खुशी दे सकें और उनका गम दूर कर सकें।

अरुण जेटली (Arun Jaitley)

अरुण जेटली (Arun Jaitley) भी सदन में शेरो-शायरी करते रहे हैं। 2017 में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने नोटबंदी से न घबराने का आह्वान किया। उन्होंने शायरी वाले अंदाज में कहा कि इस मोड़ पर घबरा के न थम जाएं आप, जो बात नई है उसे अपनाएं आप, डरते हैं नई राह पे ये क्यूं चलने से, हम आगे-आगे चलते हैं, आ जाएं आप।

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