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एससी-एसटी एक्ट समाप्त करने से आक्रोश, 2 अप्रैल को भारत बंद

सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी-एसटी एक्ट में संशोधन किए जाने के विरोध में कई सामाजिक संगठन सामाने आ गए हैं। संशोधन को समाप्त कर एक्ट को पहले की भांति रखने की मांग की जा रही है।

एससी-एसटी एक्ट समाप्त करने से आक्रोश, 2 अप्रैल को भारत बंद

सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी-एसटी एक्ट में संशोधन किए जाने के विरोध में कई सामाजिक संगठन सामाने आ गए हैं। संशोधन को समाप्त कर एक्ट को पहले की भांति रखने की मांग की जा रही है। अनुसूचित जाति और अनुसचित जनजाति के लोग इस एक्ट को शिथिल करने के विरोध में 2 अप्रैल को भारत बंद का एलान किया है।

भारत बंद को लेकर गुरुवार को एससी/एसटी/ओबीसी/माईनोरेटी संयुक्त मोर्चा छत्तीसगढ़, प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज और सर्व आदिवासी समाज छत्तीसगढ़ की संयुक्त बैठक न्यू राजेंद्र नगर स्थित गुरुघासीदास सांस्कृतिक भवन में हुई।

संयुक्त मोर्चा के संयोजक रामकृष्ण जांगड़े ने बताया कि बैठक में एससी-एसटी एक्ट कानून को समाप्त कर दिए जाने का विरोध किया गया। उन्होंने कहा कि कानून को शिथिल करने से वर्ग में घोर निराशा व भय व्याप्त है।

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इन परिस्थितियों से केन्द्र सरकार को अवगत कराने एवं संसद मे विशेष प्रावधान कराने के लिए विधेयक लाने की मांग को लेकर भारत के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के अनेक संगठन मिलकर 2 अप्रैल को भारत बंद का आह्वान किया है।

प्रदेश के सभी व्यापारिक संगठन चेम्बर ऑफ कामर्स, ट्रांसपोटर्स से निवेदन किया जाएगा कि वे भी इस भारत बंद का समर्थन करें। वहीं पिछड़ा वर्ग के कई समाजों ने भी भारत बंद का समर्थन किया।

साहू समाज के प्रदेश अध्यक्ष विपिन साहू, यादव समाज के रमेश यदु, मनवा कुर्मी समाज और अन्य समाजों ने खुलकर अपना समर्थन दिया। साथ ही कांग्रेस पार्टी के आदिवासी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री शिशुपाल सोरी ने भी बंद को समर्थन देने की घोषणा की।

उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी पूरे प्रदेश में बंद को सफल बनाने में सहयोग करेंगे। इसी तरह बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश बाजपेयी ने बैठक को सम्बोधित करते हुए अपने पार्टी की ओर से सहयोग की बात कही। आम आदमी पार्टी आैर सीपीआईएमएल ने भी समर्थन दिया।

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कोर कमेटी का हुआ गठन

भारत बंद को सफल बनाने के लिए छत्तीसगढ़ स्तरीय कोर कमेटी का गठन किया गया। जिनमें सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष बीपीएस नेताम, केपी खंडे अध्यक्ष गुरु घासीदास साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, एलएल कोशले अध्यक्ष प्रगतिशील सतनामी समाज, सोहन पोटई पूर्व सांसद, एनएस मंडावी महासचिव सर्व आदिवासी समाज, रामकृष्ण जांगड़े मुख्य संयोजक संयुक्त मोर्चा, शगुनलाल वर्मा मनवा कुर्मी समाज, गिरधर मड़रिया, बीएस जागृत प्रदेशाध्यक्ष भारतीय बौद्ध महासभा, आरएन ध्रुव प्रदेशाध्यक्ष आदिवासी शासकीय सेवक संघ, एसके सोनवानी प्रदेशाध्यक्ष अजाक्स, ओमप्रकाश बाजपेयी, अजय चौहान आदि शामिल है।

जाति उन्मूलन आंदोलन व कसम ने भी दिया समर्थन

एससी-एसटी एक्ट के दुरूपयोग पर दिए गए फैसले पर जाति उन्मूलन आंदोलन तथा क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच (कसम) ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। दोनों संगठनों प्रेस विज्ञप्ति जारी कर भारत महाबंद का समर्थन किया है। मंच की सदस्य चंद्रिका ने कहा कि कि यह कदम मनुवादी ताकतों द्वारा प्रभावित है।

यह दलितों तथा आदिवासियों के खिलाफ है। अब यदि किसी सरकारी अधिकारी के खिलाफ इस कानून के तहत कोई शिकायत की गई है तो उस पर कार्रवाही करने के लिए उसके वरिष्ठ अधिकारी से अनुमति मांगनी होगी। इस प्रकार कानून का बदलाव करने से अनुसूचित जाति और अनसुचित जनजातियों पर अन्याय होगा।

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