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सेनारी नरसंहार मामला: कोर्ट ने 23 को किया बाहर, 15 दोषी

बिहार में एक जाति विशेष के 34 लोगों की एक साथ हत्या कर दी थी।

सेनारी नरसंहार मामला: कोर्ट ने 23 को किया बाहर, 15 दोषी
पटना. साल 1999 में हुए बिहार के सबसे चर्चित सेनारी नरसंहार मामले में आखिरकार 17 साल के लंबे इंतजार के बाद कोर्ट का फैसला आ ही गया। बता दें कि पटना हाईकोर्ट ने सेनारी नरसंहार मामले में 15 को दोषी ठहराया है और वही 23 को इस केस से बरी भी कर दिया है। 18 मार्च 1999 को सेनारी का नाम तब चर्चा में आया था जब यहां सवर्ण समाज से जुड़े 34 लोगों को निर्ममता से मौत के घाट उतार दिया था
बता दें कि जहानाबाद से अलग हुए वर्तमान अरवल जिला के करपी थाना अंतर्गत सेनारी गांव के ठाकुरबाडी के निकट लोगों को इकट्ठा कर एक जाति विशेष के 34 लोगों की 18 मार्च 1999 को गला रेतकर हत्या कर हत्या कर दी थी। इस हमले में 7 अन्य व्यक्ति घायल भी हुए थे। इस मामले की सूचक चिंतामणि देवी थीं जिनके पति और पुत्र की हत्या कर दी गयी थी। पुलिस द्वारा व्यास यादव उर्फ नरेश यादव और 500 अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।
तो वही 70 आरोपियों में से चार की मौत सुनवाई के दौरान हो चुकी थी। 34 का ट्रायल पूरा हो चुका है जिनकी मामले में गिरफ्तारी हो चुकी थी। ये सभी लोग जेल के अंदर हैं। मामले में चिंता देवी के बयान पर गांव के 14 लोगों सहित 50 से अधिक लोगों को अभियुक्त बनाया गया था। चिंता देवी के पति व उनके बेटे की भी वारदात में हत्या कर दी गई थी। इस दौरान चिंता देवी की 5 साल पहले मौत हो चुकी है।
इस हत्याकांड के 66 गवाहों में से 32 ने सुनवाई के दौरान गवाही दी थी। साल 1999 में बिहार में जातीय हिंसा की कई घटनाएं घटीं। सबसे बड़ी घटना जहानाबाद ज़िले के सेनारी की थी जहां पर अगड़ी जाति के 34 लोगों की हत्या कर दी गई। इससे पहले इसी साल इसी ज़िले के शंकरबिघा गांव में 23 और नारायणपुर में 11 दलितों की हत्या की गई।

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