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13 साल की पूर्णा और साधनापल्ली ने एवरेस्ट पर लगाई आंबेडकर की मूर्ति, मोदी ने दी बधाई

ये दोनों बच्चियां इससे पहले माउंट रेनॉक पर फतह हासिल कर चुकी हैं।

13 साल की पूर्णा और साधनापल्ली ने एवरेस्ट पर लगाई आंबेडकर की मूर्ति, मोदी ने दी बधाई
नई दिल्ली. भारतीय पर्वतारोहण को रविवार को तब ऐतिहासिक लम्हा देखने को मिला, जब 13 वर्षीय छात्रा मालवथ पूर्णा माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली सबसे युवा महिला पर्वतारोही बनीं। इसके साथ ही पहली बार एक दलित ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर पांव धर दिया। यह लड़की पूर्णा की सहपाठी साधनापल्ली आनंद है।
पूर्णा व साधनापल्ली आनंद (16) ने रविवार सुबह यह उपलब्धि हासिल की। एक अधिकारी ने बताया कि दोनों बच्चियां अब बेस कैम्प की ओर लौट रही हैं। पूर्णा और आनंद दोनों आंध्र प्रदेश समाज कल्याण शैक्षिक संस्था में अध्ययनरत हैं। दोनों ने 52 दिन की लंबी यात्रा के बाद रविवार सुबह छह बजे एवरेस्ट पर चढ़ने में सफलता हासिल की।
इस दौरान पूर्णा एवरेस्ट पर चढ़ने वाली सबसे कम उम्र की महिला पर्वतारोही भी बनीं। पूर्णा और साधनापल्ली को साहसिक खेलों में दिलचस्पी दिखाने वाले 150 बच्चों में से इस अभियान के लिए चुना गया था। इनमें से 20 बच्चों को दार्जीलिंग स्थित पर्वतारोहरण प्रशिक्षण केन्द्र भेजा गया था। इन 20 में से नौ बच्चों ने भारत-चीन सीमा पर एक अन्य पर्वतारोहण अभियान में भी हिस्सा लिया था। आनंद और पूर्णा को इसी साल अप्रैल में एवरेस्ट अभियान के लिए चुना गया था।
ये दोनों बच्चियां इससे पहले माउंट रेनॉक पर फतह हासिल कर चुकी हैं। इन बच्चों को पिछले साल नवंबर में बहुत छोटा कहकर पर्वातारोहण की इजाजत नहीं दी गई थी। फिर छोटी चोटी की इजाजत मिली और इन्होंने रेनॉक पर्वत का शिखर चूम लिया।माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली दोनों लड़कियां बेहद गरीब परिवार से हैं।
नीचे की स्लाइड्स में जानिए, कौन है एवरेस्ट पर फतह करने वाली ये बहादुर बच्चियां-
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