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सेना के 100 जवानों के स्मार्टफोन हुए जब्त, ड्यूटी के दौरान कर रहे थे इस्तेमाल

जो भी ऐसा करेगा, उसे सैन्य कानूनों के हिसाब से सजा दी जाएगी।

सेना के 100 जवानों के स्मार्टफोन हुए जब्त, ड्यूटी के दौरान कर रहे थे इस्तेमाल
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नई दिल्ली. सेना में कुछ जवानों द्वारा अपने स्मार्टफोन का गलत इस्तेमाल कर सोशल मीडिया में शिकायत करने के मामलों से चिंतित सेना ने एहतियातन 100 अधिकारियों के स्मार्टफोन जब्त कर लिए हैं। मोबाइल फोन की यह जब्ती सेना के कुछ संवेदनशील ठिकानों से की गई है। इसमें राजधानी स्थित सेना मुख्यालय भी शामिल है।
सेना का कहना है कि यह कार्रवाई औचक जांच के लिए की गई है, जिसमें उन अधिकारियों के पास से स्मार्टफोन लेकर जब्त किए गए हैं, जिन्हें अपने तैनाती स्थल पर इनके इस्तेमाल की इजाजत नहीं है। सेना इसमें कुछ भी नया किए जाने से इंकार करते हुए कह रही है कि यह उसकी सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। फौज में ऐसी चीजें चलती रहती हैं।
जनरल रावत की चेतावनी
सोशल मीडिया पर जवानों के छलकते दर्द को देखते हुए हाल में एक कार्यक्रम के दौरान सेनाप्रमुख जनरल बिपिन रावत ने चेतावनी भरे स्वर में कहा था कि सेना में किसी को भी अपनी समस्या को सोशल मीडिया पर डालने का हक नहीं है। जो भी ऐसा करेगा, उसे सैन्य कानूनों के हिसाब से सजा दी जाएगी। क्योंकि जो भी ऐसा कर रहा है, उससे सीमाआें की निगरानी में चौबीसों घंटे तैनात बाकी जवानों का मनोबल टूटता है।
शिकायत करने के लिए फौज में सभी जगहों पर एक निर्धारित तंत्र है, जिसके जरिए कोई भी अपनी बात रख सकता है। इसे सीधे सेनाप्रमुख द्वारा खोले और पढ़े जाने की बात कही गई थी। जनरल रावत ने अपनी चेतावनी में यह स्पष्ट कर दिया था कि सेना में स्मार्टफोन इस्तेमाल करने पर कोई पाबंदी नहीं है।
जारी हुए दिशानिर्देंश, नीति
कुछ दिन पहले सेना के जवान लांस नायक यज्ञप्रताप सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड कर अपने वरिष्ठ अधिकारी द्वारा प्रताड़ित किए जाने की शिकायत की थी। इसके बाद एक अन्य जवान का कई महीनों से छुट्टी न दिए जाने का मामला भी सोशल मीडिया पर उछला था। हाल ही में सेना द्वारा सभी रैंक के अधिकारियों व जवानों को सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने को लेकर नए सर्कुलर भी जारी किए गए हैं, जिसमें सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर दिशानिर्देंश और नीति के बारे में स्पष्ट जानकारी दी गई है।
सर्कुलर की मुख्य बात
सेना के सर्कुलर में यह बताया गया है कि बीते समय में ऐसी चीजें देखने को मिली हैं, जिसमें कुछ विरोधी तत्वों द्वारा सेना की छवि को खराब करने के लिए आधे सच पर आधारित हानिकारक सामग्री का प्रयोग सोशल मीडिया पर प्रचार के दौरान किया गया है। इससे सेना में तैनात और सेवानिवृत अधिकारियों को भी सोशल मीडिया पर प्रचाारित की जाने वाली किसी भी सामग्री को स्वीकार करने से पहले जांचने की चेतावनी मिलती है। क्योंकि बिना जांच-पड़ताल के किसी भी सामग्री को प्रचारित-प्रसारित करने से सेना की छवि को नुकसान पहुंच सकता है।
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