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शराब पीकर गाड़ी चलाना पड़ेगा महंगा, बदल गए नियम

सड़क हादसों के लिए जिम्मेदार माने जाने वाले शराबी चालकों को अब नशे में गाड़ी चलाना कहीं ज्यादा महंगा पड़ने वाला है।

शराब पीकर गाड़ी चलाना पड़ेगा महंगा, बदल गए नियम
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मोदी सरकार द्वारा देश की परिवहन व्यवस्था को इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली में तब्दील करके सुरक्षित करने की तैयारी अंजाम तक पहुंचने वाली है। सरकार द्वारा देश में नए मोटर वाहन कानून को लागू करने का मकसद देश में दुनियाभर के मुकाबले सबसे ज्यादा सड़क हादसों और उनमें होने वाली लोगों की मौतों पर अंकुश लगाना है।

देश की परिवहन व्यवस्था में आमूल चूल बदलाव और ई-शासन परिवर्तन लाने के मकसद से लंबे समय से संसद की मुहर लगने की बाट जोह रहे नए मोटर यान (संशोधन) विधेयक पर आखिर लोकसभा में चर्चा की शुरूआत हो गई है और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी को उम्मीद है कि मौजूद संसद सत्र में इस विधेयक को संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिल जाएगी।

लोकसभा में चर्चा और इसे पारित करने के प्रस्ताव के साथ इस विधेयक को पेश करते हुए गडकरी ने दावा किया है कि यह नया मोटर यान कानून देश में हजारों लोगों की जाने बचाने का सबब बनेगा। इस विधेयक में लाइसेंस बनाने से लेकर पूरी परिवहन प्रणाली को इलैक्ट्रॉनिक प्रणाली पर लाने का प्रावधान है और हरेक भारतीय नागरिक को एक समान पारदर्शी व्यवहार सुनिश्चित होगा।

मसलन नेता, मंत्री,अफसर और पत्रकार सभी इस कानून के दायरे से अलग नहीं रह पाएंगे। यानि नए कानून के प्रभावी होने पर यदि कोई मंत्री या अन्य प्रभावशाली व्यक्ति भी यातायात नियमों का उल्लंघन करता है तो कैमरों के जरिए जुमार्ना पर्ची डाक से घर पहुंचा दी जाएगी।

शराबी चालकों की भी खैर नहीं

केंद्र सरकार के नए मोटर वाहन कानून में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त प्रावधान किए गए हैं, जिसमें जुर्माना और सजा के कड़े प्रावधान हैं।

सड़क हादसों के लिए जिम्मेदार माने जाने वाले शराबी चालकों को अब नशे में गाड़ी चलाना कहीं ज्यादा महंगा पड़ने वाला है। मसलन यदि नशे की हालत में गाड़ी चलाते पकड़े गए तो अब दस हजार रुपए का जुमार्ना भरना पड़ेगा।

वर्ष 1988 के मोटर यान कानून में 30 साल बाद संशोधन के बाद लागू होने वाले नियमों से देश की परिवहन व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन आने की उम्मीद है।

इसमें आॅनलाइन पंजीकरण, लाइसेंस बनवाने आदि से सरलीकरण आसान होगा और राजमार्गों के पास और अधिक ट्रॉमा सेंटर खोलने जैसे विचार भी शामिल हैं।

सड़क सुरक्षा बोर्ड बनेगा

देश में वर्ष 1988 के मोटर वाहन कानून के लचीले नियमों को सख्त करते हुए इस नए विधेयक में सड़क सुरक्षा को उच्च प्राथमिकता देते हुए यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माने और सजा का प्रावधान किया गया है।

खासतौर से देशभर में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता और नियमों के अनुपालन कराने के लिए सरकार ने जल्द ही एक ‘राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड’ का गठन करने करने का निर्णय लिया है। इस बोर्ड की निगरानी में देशभर में सुरक्षित यातायात के संबंध में देशभर में एक अभियान चलाया जाएगा।

इस विधेयक के प्रावधानों को देश के डेढ़ दर्जन राज्यों के परिवहन मंत्रियों ने तय किये हैं। वहीं संयुक्त संसदीय समिति द्वारा विधेयक का अध्ययन करने के बाद जो सिफारिश या सुझाव दिये हैं उन्हें भी शामिल किया गया है।

फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस पर लगाम

इस नए कानून के लागू होते ही सड़क हादसों में बड़ा कारण बनते आ रहे अप्रशिक्षित चालकों का फर्जीवाड़ा लुप्त हो जाएगा यानि विधेयक में यातायात नियमों और ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने के संबंध में राज्यों के लिए ई-गर्वनेंस को अनिवार्य किया गया है।

नए कानून के तहत अब लोग घर बैठे लर्निंग लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकेंगे, लेकिन स्थायी लाइसेंस बनवाने के लिए कम्प्यूटर के जरिए सभी के लिए परीक्षा देना अनिवार्य किया गया है और परीक्षा में खरा उतरने के बाद ही लाइसेंस जारी किया जाएगा।

विधेयक के प्रावधान के तहत एक नैशनल रजिस्टर बनाया जाएगा, जिसमें ड्राइविंग लाइसेंस के डेटा को नैशनल लेवल पर इंटीग्रेट करेगी यानि देश में फर्जी लाइसेंस बनवाने की गुंजाइश ही नहीं रहेगी।

इससे पहले अभी तक दुनिया में भारत ही ऐसा देश है जहां ड्राइविंग लाइसेंस बहुत आसानी से मिल जाता है और एक व्यक्ति चार-चार राज्यों में जाकर ड्राइविंग लाइसेंस बनवा लेता है।

बीमा प्रक्रिया का सरलीकरण

नए बिल में इंश्योरेंस को लेकर भी कुछ नए प्रावधान किए गए हैं। अब तक अगर अज्ञात वाहन की टक्कर से किसी की मौत होती है तो उसे 25 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाता है लेकिन नए बिल में अब यह राशि बढ़ाकर दो लाख रुपये की जाएगी।

इसी तरह से नए कानून के मुताबिक इंश्योरेंस कंपनी को एक महीने के भीतर क्लेम की राशि का भुगतान करना होगा, अगर क्लेम करने वाला व्यक्ति न्यूनतम पांच लाख रुपये की राशि स्वीकार करने को तैयार है।

अब तक यह राशि 50 हजार रुपये होती है। थर्ड पार्टी इंश्योरेंस में अब वाहन के ड्राइवर को भी शामिल किया गया है। एक्सीडेंट के मामले में एक्सीडेंट क्लेम का चार महीने में ही निर्धारण करना अनिवार्य हो जाएगा।

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