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जानिए निर्भया केस से जुड़ी 10 बड़ी बातें

13 दिन संघर्ष करने के बाद पीड़िता ने सिंगापुर के एक अस्पताल में दम तोड़ दिया था।

जानिए निर्भया केस से जुड़ी 10 बड़ी बातें
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कड़ाके की ठंड रात का समय और तारीख 16 दिसंबर 2012, 5 साल पहले राजधानी दिल्ली के बसंतविहार इलाके के पास एक चलती हुई प्राइवेट बस में एक पैरामेडिकल छात्रा निर्भया (ज्योति) के साथ 6 दरिंदों ने बर्बरतापूर्वक गैंगरेप किया।

अगले दिन जब यह खबर अखबारों में आई तो हर कोई सिहर उठा। दिल्ली की तमाम जनता ना केवल महिलाएं बल्कि पुरुष भी दोषियों के खिलाफ कारवाई की मांग लिए सड़कों पर उतर आये और ना जाने कितने कैंडल मार्च हुए।

जिसका असर ये हुआ कि दिल्ली के रोहिंदी में फास्टट्रैक कोर्ट ट्रैक का गठन किया गया। फास्टट्रैक कोर्ट इस मामले में मात्र 173 दिन में सजा सुना दी लेकिन बाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी 180 दिन मतलब छह महीने के अंदर फांसी की सज़ा पर मुहर लगा दी थी।

1.लोगों ने विरोध में दिल्ली की प्रमुख जगहों पर पम्फलेट ले कर सरकार से न्याय की गुहार लगाई।

2.ये देश का पहला मामला है जब स्त्री अस्मिता पर लोगों की आवाज ना सिर्फ देश में गूंजी बल्किन विदेशों में भी पहुंची।

3.भारत में अपनी तरह का यह पहला गैंगरेप का मामला है जब पीड़ित लड़की के मां बाप आरोपियों के खिलाफ खुल कर देश के सामने आये और अपनी बेटी के अपराधियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी सजा की मांग की।

4.लोगों की जारुकता का असर ये हुआ कि पोलिस ने जल्द ही उस प्राइवेट बस को खोज लिया जिसका वारदात में प्रयोग हुआ था।

गैंगरेप की इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद लड़कियों को अपने घर से निकलने में डर लगने लगा।

5.निर्भया को इलाज के लिए सिंगापुर के अस्पताल ले जाया गया था, जहां उसका इलाज चल रहा था। लेकिन उसके अंदुरुनी अंग इतने क्षतिग्रस्त हो चुके थे कि 29 दिसम्बर 2012 को उसने सिंगापुर में आखिरी सांस ली।

6.जनवरी, 2013 में पुलिस ने पांच बालिग अभियुक्तों के खिलाफ हत्या, गैंगरेप, हत्या की कोशिश, अपहरण, डकैती आदि आरोपों के तहत चार्जशीट दाखिल की। फ़ास्ट ट्रैक अदालत ने पांचों अभियुक्तों पर आरोप तय किए।

7.इस केस के मुख्य आरोपी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में आत्महत्या की। ऐसा माना गया कि आत्मग्लानि के चलते उसने ऐसा किया।

8. 31 अक्टूबर, 2013 को जुवेनाइल बोर्ड ने नाबालिग को गैंगरेप और हत्या का दोषी माना और उसे बाल सुधार गृह में तीन साल रहने का आदेश दिया।

9. सितंबर, 2013 को फ़ास्ट ट्रैक अदालत ने चार आरोपियों को 13 अपराधों के लिए दोषी करार दिया। सितंबर को दोषी मुकेश, विनय, पवन और अक्षय को फांसी की सजा सुनाई गई।

10. 13 मार्च, 2014 को इस मामले पर दिल्ली हाई कोर्ट ने भी चारों दोषियों की मौत की सजा को बरकरार रखा।

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