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INS कलवरी से जुड़ी 10 अहम बातें, चीन और पाकिस्तान के उड़ जाएंगे होश

आईएनएस कलवरी फ्रांस की कंपनी ने डिजाइन किया है तो इसे मुंबई के मंझगांव डॉकयॉर्ड में तैयार किया गया है। यह मेक इन इंडिया का पहला बड़ा प्रोजेक्ट है।

INS कलवरी से जुड़ी 10 अहम बातें, चीन और पाकिस्तान के उड़ जाएंगे होश

आईएनएस कलवरी के साथ ही भारतीय नौसेना की ताकत अब और ज्यादा बढ़ गई है। पीएम मोदी ने मुंबई के तेह डाकयार्ड पहुंचकर इसे देश को समर्पित किया है। कलावरी हिंद महासागर में भारतीय नौसेना की रक्षा क्षमताओं को कई गुना तक बढ़ाने वाली है।

जानें आईएनएस कलवरी से जुड़ी 10 अहम बातें

1. आईएनएस कलवरी एक डीजल-इलेक्ट्रिक युद्धक पनडुब्बी है। यह स्कॉर्पिन श्रेणी की उन 6 पनडुब्बियों में से पहली पनडुब्बी है।

2. यह स्कॉर्पिन श्रेणी की उन 6 पनडुब्बियों में से पहली पनडुब्बी है। फ्रांस के सहयोग ये पनडुब्बी तैयारी हुई है।

3. 1,564 टन की इस पनडुब्‍बी को भारतीय नौसेना के प्रोजेक्ट-75 के तहत बनाया गया है।

4. फ्रांस की डीसीएनएस और एमडीएल के बीच अक्टूबर 2005 में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए समझौता हुआ था।

5. सबमरीन कलवरी में स्टेट ऑफ आर्ट टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया है।

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6. कलवरी एडवांस्ड साइलेंसिग टेक्निक से लैस है।

7. ये पनडुब्बी दुश्मनों पर अपने घातक हथियारों से हमला करने में सक्षम है।

8. कलवरी टारपीडो और ट्यूब तरीके से एंटी-शिप मिसाइल का इस्तेमाल कर सकती है।

9. इस वक्त नौसेना में 13 पुराने सबमरीन हैं, जिनमें से आधे किसी काम के नहीं बचे।

10. 1967 को पहली पनडुब्बी आईएनएस कलवरी नौसेना में शामिल हुई थी।

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