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एक लाख करोड़ का घोटाला: माल्या से भी बड़ा है ये घोटलेबाज, 10 साल से फरार

इस घोटालेबाज को खोजने सीबीआई सहित भारत की अन्य जांच एजेंसियों के अलावा कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां जुटी हैं लेकिन वह सबसे एक कदम आगे है।

एक लाख करोड़ का घोटाला: माल्या से भी बड़ा है ये घोटलेबाज, 10 साल से फरार
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बेंगलुरु के एक 45 वर्षीय व्यापारी सुधीर श्रीराम, उसके सहयोगी और सरकारी दफ्तरों के कुछ लोगों ने मिलकर सन् 2008 में ऐसा घोटाला किया जिसे सुनकर लोगों की आंखें फट जाएंगी। इस घोटाले से सरकारी खजाने को करीब 1,208.48 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था।

साल 2008 में साउथ कोरिया में बूसन पोर्ट और वियतनाम में हाई फोंग पोर्ट पर 885 कंटेनर पहुंचे, जिनमें हाई-वैल्यू कॉपर और निकल स्क्रैप मेटल होना चाहिए था। बाद में पता चला कि इन कंटेनर्स में ऑटोमोबाइल जंकयार्ड से उठाया गया सस्ता लोहे का स्क्रैप भरा हुआ है।

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राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियां खोज रहीं

इस घोटालेबाज सुधीर श्रीराम को खोजने सीबीआई सहित भारत की अन्य जांच एजेंसियों के अलावा कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां जुटी हैं लेकिन वह सबसे एक कदम आगे है।

इस उलझे हुए मामले जिसमें कई देश, शेल कंपनियां और राष्ट्रीयकृत बैंक जुड़े हैं, सीबीआई सुधीर को भारत लाने में असफल रही। यह काफी हद तक विजय माल्या के जैसा मामला ही रहा।

दुबई में था अब तक

श्रीराम ने दावा किया है कि वह एक दशक से भी ज्यादा समय से दुबई में रह रहा था और फ्यूचर मेटल्स प्राइवेट लिमिटेड और फ्यूचर एक्जिम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का निदेशक था और इन फर्मों से ग्लोबल सहयोगी जुड़े हुए थे।

उसने दोनों कंपनियों ने एमजी रोड पर बार्टन सेंटर पर पंजीकृत करवाया था लेकिन अब वे बाहर चली गई हैं और एक फर्म उस पते से चल रहा है।

स्पेन में हुआ गिरफ्तार

इंटरपोल ने मई 2015 में एक रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया, जिससे स्पेन में उनकी गिरफ्तारी हुई। एक सूत्र की मानें तो उसने दावा किया कि वह अपने रिश्तेदारों में से एक की शिक्षा के संबंध में स्पेन में था।

स्पेन में झूठ बोलकर भागा यूएई

श्रीराम ने अपने पुनरीक्षण याचिका पर इस आदेश का इस्तेमाल यह कहकर कि वह भारत के अधिकारियों के पास जा रहा है, स्पेन से खुद को रिहा कराने के लिए किया लेकिन वह यूएई भाग गया। भारत और यूएई के बीच प्रत्यर्पण संधि नहीं है इसलिए वहां छुपना उसके लिए आसान रहा।

गिरफ्तारी को लेकर उम्मीद जगी

करीब एक दशक बीत जाने के बाद एक बार फिर उसके पकड़े जाने को लेकर उम्मीद जगी है। भारतीय नागरिकता साबित करते उसके पुराने पासपोर्ट की अवधि पूरी हो चुकी है।

शुरू में उसने केंद्र सरकार, विदेश मंत्रालय और सीबीआई से यात्रा और नवीकरण के लिए पासपोर्ट लेने की अनुमति मांगी, लेकिन दिसंबर में इसे खारिज कर दिया गया था।

अग्रिम जमानत के लिए संपर्क

श्रीराम ने अग्रिम जमानत के लिए सत्र न्यायालय से संपर्क किया, लेकिन 31 जनवरी को इस मांग को भी खारिज कर दिया गया, जिसने उसे 7 फरवरी को नई जमानत याचिका के साथ उच्च न्यायालय में जाने को मजबूर किया।

2015 में पेश होना था

अपराध संशोधन याचिका और उपक्रम के आधार पर, रेड कॉर्नर नोटिस पर रोक लगाने के आदेश जारी किए गए थे और उसे 28 अक्टूबर, 2015 को सीबीआई अधिकारियों के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा गया था लेकिन वह पेश नहीं हुआ।

क्या श्रीराम की होगी भारत वापसी?

श्रीराम ने 31 दिसंबर को समाप्त होने से पहले औपचारिकताओं को पूरा करने और अपना मूल पासपोर्ट प्राप्त करने के लिए सीबीआई अदालत में एक याचिका दायर की थी। हालांकि, अदालत ने इसे खारिज करते हुए कहा कि वह यूएई में भारतीय दूतावास से संपर्क करे और 36 घंटे के लिए वैध आपातकालीन यात्रा प्रमाण पत्र मांगे।

क्या कहा वकील ने

श्रीराम के वकील आर रवि ने कहा, हमने उच्च न्यायालय से नई अग्रिम जमानत मांगी है और इस सप्ताह सुनवाई की उम्मीद है। मेरा मुवक्किल कानून का पालन करने वाला नागरिक है

लंबे समय से पकड़ से बाहर

जुलाई 2009 में हाई ग्राउंड पुलिस थाने में सुधीर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, जिसे सितंबर में सीबीआई को स्थानांतरित कर दिया गया। हालांकि, सीबीआई के अनुसार श्रीराम, यूएई भाग गया और उनके साथ सहयोग नहीं किया। अप्रैल 2013 में, एचसी ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया।

अपराध संशोधन याचिका दायर

सुधीर श्रीराम के वकीलों ने भारत में एक अपराध संशोधन याचिका दायर की, जांचकर्ता अधिकारियों के सामने पेश होने के अपने आश्वासन के आधार पर रेड कॉर्नर नोटिस के निलंबन की मांग करने के लिए उनके वकील ने सबूत के रूप में हवाई टिकट भी पेश किए।

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