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सेना के 1 लाख 86 जवान होंगे बुलेटप्रूफ जैकेट से लेस, आर्मी का ये है पूरा मास्टर प्लान

जम्मू-कश्मीर से लेकर देश की पूर्वी सीमा पर दुश्मन से दो-दो हाथ करने के लिए सेना के जवानों को 1 लाख 86 हजार बुलेटप्रूफ जैकेटों की सौगात मिलने वाली है।

सेना के 1 लाख 86 जवान होंगे बुलेटप्रूफ जैकेट से लेस, आर्मी का ये है पूरा मास्टर प्लान
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जम्मू-कश्मीर से लेकर देश की पूर्वी सीमा पर दुश्मन से दो-दो हाथ करने के लिए सेना के जवानों को 1 लाख 86 हजार बुलेटप्रूफ जैकेटों की सौगात मिलने वाली है। इसके लिए रक्षा मंत्रालय में बीते कुछ समय से जारी प्रशासनिक प्रक्रिया यानि कांट्रेक्ट नेगोशिएसन कमेटी (सीएनसी) में जारी कवायद को पूरा कर लिया गया है और अब जल्द इस बाबत खरीद को लेकर किए जाने वाले समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं।

रेस में हैं तीन भारतीय कंपनियां

रक्षा मंत्रालय के उच्चपदस्थ सूत्रों ने हरिभूमि को बताया कि सेना ने जैकेटों के परीक्षण के बाद तीन भारतीय कंपनियों को शार्टलिस्ट किया है। इन सबके उत्पाद सैन्य परीक्षण के मानकों पर पूरी तरह से खरे उतरे हैं। इनमें से किसी एक कंपनी (लोअर बिडर) के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।मंत्रालय द्वारा यह खरीद पूंजीगत रुट से की जा रही है।

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1 लाख 86 हजार जैकेटों की खरीद को लेकर किए जाने वाले इस समझौते की कुल अनुमानित कीमत 930 करोड़ रुपए होगी। इससे पहले मंत्रालय द्वारा सेना की तत्काल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए राजस्व रुट से 50 हजार बुलेटप्रूफ जैकेटों की खरीद की जा चुकी है।

मेक इन इंडिया को प्राथमिकता

बीते वर्ष दिसंबर महीने के अंत में सेना ने बुलेटप्रूफ जैकेटों की खरीद को लेकर परीक्षण का काम पूरा किया है। जबकि इसके लिए आरएफपी नवंबर 2017 में जारी की गई थी। इसमें रक्षा मंत्रालय से लेकर सेना, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया अभियान को प्राथमिकता देते हुए खरीद करना चाहती है। इसलिए अभियान की ‘बॉय इंडियन श्रेणी’ के तहत जैकेटों की खरीद करने का निर्णय लिया गया है।

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समझौता होने के बाद सेना की योजना सबसे पहले जैकेटों को जम्मू-कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर में जारी आतंकवादियों व उग्रवादियों के खिलाफ जारी अभियानों में तैनात जवानों को प्रदान करने की है। इसके बाद अन्य सैन्य ठिकानों पर इन्हें भेजा जाएगा।

इन खूबियों से लैस होगी जैकेट

परीक्षण के बाद जिन बुलेटप्रूफ जैकेटों का चयन किया गया है। उनका डिजाइन इस तरह का है कि वह 7.62एमएम की गोली से जवानों को सुरक्षा कवच प्रदान कर सकती है। साथ ही इसमें प्रयोग किया जाने वाला हार्ड कोर स्टील भी इसे काफी मजबूती प्रदान करता है, जिससे यह 10 मीटर से अधिक की दूरी से भी बुलेट फायर किए जाने पर सेना के रणबांकुरों का बचाव कर सकती है।

नौ साल से जारी है खरीद प्रक्रिया

बुलेटप्रूफ जैकेटों की खरीद को लेकर रक्षा मंत्रालय में प्रक्रिया की शुरुआत करीब 9 साल पहले हुई थी। 2009 में इनकी खरीद के प्रस्ताव को रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) ने मंजूरी दे दी थी। लेकिन इसके बाद अलग-अलग कारणों की वजह से यह कार्य लंबित पड़ा रहा।

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हालिया आयी संसदीय समिति की रिपोर्ट में भी इस देरी को लेकर मंत्रालय के खिलाफ काफी नाराजगी जाहिर की गई थी। लेकिन इसके अलावा बीते जनवरी में सेवादिवस के मौके पर सेनाप्रमुख जनरल बिपिन रावत ने बुलेटप्रूफ जैकेटों की खरीद के काम के जल्द पूरा होने के संकेत दिए थे।

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