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ऑपरेशन ब्लू स्टार और ऑपरेशन ब्लैक थंडर की सफलता के पीछे थे पीएम मोदी का ये खास अधिकारी, जानें कौन हैं ये

ऑपरेशन ब्लू स्टार की आज 34वीं बरसी है। ऑपरेशन ब्लू स्टार भारत की एकता के लिए कितना जरुरी था यह हम सभी को पता है। भारत ने पाकिस्तान से बांग्लादेश को आजाद करवाया था इसी बात का बदला लेने के लिए पाकिस्तान ने भारत से पंजाब को अलग करवाने की योजना बनाई।

ऑपरेशन ब्लू स्टार और ऑपरेशन ब्लैक थंडर की सफलता के पीछे थे पीएम मोदी का ये खास अधिकारी, जानें कौन हैं ये
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ऑपरेशन ब्लू स्टार की आज 34वीं बरसी है। ऑपरेशन ब्लू स्टार भारत की एकता के लिए कितना जरुरी था यह हम सभी को पता है। भारत ने पाकिस्तान से बांग्लादेश को आजाद करवाया था इसी बात का बदला लेने के लिए पाकिस्तान ने भारत से पंजाब को अलग करवाने की योजना बनाई।

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI ने पंजाब में सिख आतंकवाद और कट्टरपंथ को हवा दी। उसने सिखों में भारत के खिलाफ जगर भरा। जिसका परिणाम जनरैल सिंह भिड़रावाले के रुप में सामने आया।

वह पंजाब में ISI की मदद से अपने मकसद के लिए काम करता रहा। उसकी योजना लगातार कामयाब होती गई और पंजाब में सिख आतंकवाद.उग्रवाद फैलता गया। उसने लोगों को अपने प्रभाव में लिया। वह धीरे-धीरे पंजाब के लोगों का दिलों में अपनी जगह बनाता गया।

फिर वो दिन आया जब उसने भारतीय राजनीति और देश को हिला कर रख दिया। जनरैल सिंह भिड़रावले ने अपने साथियों के साथ स्वर्ण मंदिर पर कब्जा कर लिया। वो और उसके आतंकवादी भारी हथियारों से लैस थे। उसने पंजाब को सिख देश बनाने की मांग की। देश का राजनीति और माहौल लगातार खराब होते चले गए।

आज ही के दिन भारतीय सेना ने खलिस्तानी आतंकियों को मारने के लिए ऑपरेशन ब्लू स्टार को अंजाम दिया। सरकार के आदेश पर स्वर्ण मंदिर को सेना ने चारों ओर से घेर लिया। स्वर्ण मंदिर में आतंकी और बाहर सेना आमने-सामने थे।

दोनों तरफ से बंदूके तनी थी। किसी भी पल सेना और आतंकियों के बीच संघर्ष शुरू हो सकता था। पूरे देश की निगाहे उस वक्त पंजाब पर थी। भारतीय सेना ने स्वर्ण मंदिर को आतंकियों के कब्जे से आजाद करा लिया। भारतीय सेना के कई जवानों को देश की एकता के लिए शहीद होना पड़ा। सारे आतंकी मार दिये गए। पर इस हमले से अकाल तख्त और स्वर्ण मंदिर को भारी नुसकान पहुंचा।

ऑपरेशन के 4 साल बाद एक बार फिर सिख आतंकवादी स्वर्ण मंदिर में अकाल तख्त के पास पहुंच गए। इस बार आतंकियों के पास पहले से ज्यादा खतरनाक हथियार थे। तभी भारत के NSA अजित डोभाल ने अपना कारनामा दिखाया। दराअसल अजित डोभाल को एक काम सौपा गया।

उनसे कहा गया कि वो यह पता लगाए कि अंदर कितने आतंकी हैं और उनके पास कितने हथियार हैं? अजित डोभाल ने महत्वपूर्ण काम किया। अजित डोभाल पाकिस्तानी एजेंट बनकर स्वर्ण मंदिर में गए। ऐसा कहा जाता है कि उस वक्त डोभाल ने अंदर जाने के लिए एक रिक्शा वाले का भेष बनाया था।

डोभाल आतंकियों को यह समझाने में कामयाब रहे कि वह एक ISI एजेंट हैं और आतंकियों की मदद के लिए यहां आए हैं। ऑपरेशन ब्लैक थंडर से दो दिन पहले डोभाल रिक्शे वाले की भेष में स्वर्ण मंदिर के अंदर गए और वहां से 2 दिन बाद निकले।

जब वह बाहर आए तो उनके पास आतंकियों की सारी जानकारी थी। उनके हथियार,उनकी योजना डोभाल को सब पता था। कहा तो यह भी जाता है कि जब सेना ब्लैक थंडर को अंजाम दे रही थी तब भी डोभाल हरमिंदर साहब के अंदर ही थे। अजित डोभाल के इस कारनामे से ही ऑपरेशन सफल रहा और पंजाब खिख आतंकवादियों के प्रभाव से मुक्त हो पाया।

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