West Asia Crisis Impact: भारत में एक तरफ सूरज की तपिश और हीटवेव के कारण पानी की मांग चरम पर है, वहीं दूसरी ओर पश्चिमी एशिया में जारी युद्ध ने बोतलबंद पानी उद्योग की कमर तोड़ दी है।
उद्योग जगत के विशेषज्ञों का कहना है कि मांग में अचानक हुई 30 से 40 प्रतिशत की वृद्धि और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला के टूटने से बाजार में असंतुलन पैदा हो गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही रुकने से पेट्रोलियम उत्पादों के साथ-साथ प्लास्टिक निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की आवक भी प्रभावित हुई है।
इसके परिणामस्वरूप, आने वाले हफ्तों में बोतलबंद पानी की खुदरा कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
प्लास्टिक पैकेजिंग और कच्चे माल की लागत में भारी बढ़ोतरी
बोतलबंद पानी की कीमत में पैकेजिंग का हिस्सा काफी बड़ा होता है। पानी की बोतलें बनाने के लिए 'पॉलीइथिलीन टेरेफ्थेलेट' (PET) रेजिन का उपयोग किया जाता है, जो सीधे तौर पर कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल उद्योग से जुड़ा है।
खाड़ी देशों में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार पहुँच गई हैं, जिससे प्लास्टिक दाना की कीमतों में 20 से 25 प्रतिशत का उछाल आया है।
कंपनियों का कहना है कि पैकेजिंग सामग्री महंगी होने से उनका उत्पादन खर्च बढ़ गया है, जिसे अब ग्राहकों पर पास-ऑन करना उनकी मजबूरी बन गई है।
परिवहन खर्च और लॉजिस्टिक्स संकट ने बढ़ाई मुश्किलें
केवल कच्चा माल ही नहीं, बल्कि तैयार माल को एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाना भी अब महंगा हो गया है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वैश्विक अस्थिरता के कारण लॉजिस्टिक्स कंपनियों ने अपने फ्रेट चार्ज बढ़ा दिए हैं।
बोतलबंद पानी जैसे उत्पादों के लिए परिवहन लागत का प्रबंधन करना चुनौतीपूर्ण होता है क्योंकि इनकी मात्रा अधिक और मार्जिन कम होता है। इसके अलावा, कई प्रमुख शिपिंग रूट बंद होने या असुरक्षित होने के कारण आयातित फिल्टरिंग घटकों की कमी भी उद्योग को प्रभावित कर रही है, जिससे मांग और आपूर्ति के बीच की खाई और चौड़ी हो गई है।
कंपनियों का रुख और ग्राहकों के लिए क्या हैं विकल्प?
बिसलेरी, किनले और एक्वाफिना जैसे बड़े ब्रांड्स स्थिति पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं। कुछ छोटी कंपनियों ने पहले ही स्थानीय स्तर पर कीमतों में 2 से 5 रुपये की वृद्धि कर दी है।
उद्योग संगठन 'इंडियन बेवरेज एसोसिएशन' (IBA) का कहना है कि यदि खाड़ी में तनाव अगले दो हफ्तों तक और जारी रहता है, तो राष्ट्रीय स्तर पर नई कीमतों की घोषणा की जा सकती है।
रेलवे स्टेशनों, हवाई अड्डों और पर्यटन स्थलों पर पानी की बोतलों की कालाबाजारी या एमआरपी से अधिक दाम वसूले जाने की शिकायतें भी बढ़ रही हैं। आम जनता के लिए अब सार्वजनिक वाटर एटीएम या रिफिलिंग स्टेशन ही एकमात्र सस्ता विकल्प बच रहे हैं।