LPG Crisis India: ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बाधित होने से भारत में एलपीजी के आयात पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। इस संभावित किल्लत को देखते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक उच्चस्तरीय बैठक की है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में अगर गैस की सप्लाई रुकती है, तो देश के पास खाना पकाने का ठोस विकल्प होना चाहिए। इसी रणनीति के तहत सरकार ने 'बिजली से चलने वाले चूल्हों' यानी इंडक्शन हीटर को राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने का निर्णय लिया है।
इंडक्शन हीटर उत्पादन बढ़ाने पर कंपनियों को मिलेगा प्रोत्साहन
सरकार ने घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण कंपनियों को इंडक्शन हीटर का उत्पादन दोगुना करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, जो कंपनियां बड़े पैमाने पर किफायती और उच्च गुणवत्ता वाले इंडक्शन कुकर बनाएंगी, उन्हें उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना के तहत वित्तीय सहायता या टैक्स में छूट दी जा सकती है।
सरकार का लक्ष्य है कि बाजार में कम कीमत पर इंडक्शन हीटर उपलब्ध हों ताकि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोग इसे आसानी से खरीद सकें। इससे न केवल एलपीजी पर निर्भरता कम होगी, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी।
आम जनता के लिए सब्सिडी और जागरूकता अभियान के निर्देश
मंत्रालय ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे जिला स्तर पर जागरूकता अभियान चलाएं और लोगों को इंडक्शन कुकिंग के फायदों के बारे में बताएं। सरकार उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को रियायती दरों पर इंडक्शन हीटर उपलब्ध कराने की योजना पर भी विचार कर रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिजली से खाना पकाना एलपीजी के मुकाबले सस्ता और सुरक्षित हो सकता है, बशर्ते बिजली की आपूर्ति निर्बाध रहे। इसके लिए ऊर्जा मंत्रालय के साथ समन्वय बिठाकर उन क्षेत्रों की पहचान की जा रही है जहां बिजली की उपलब्धता सरप्लस में है।
गैस आयात के बोझ को कम करने की दीर्घकालिक रणनीति
भारत सरकार का यह कदम केवल तात्कालिक संकट से निपटने के लिए नहीं है, बल्कि यह एक दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति का हिस्सा भी है। भारी मात्रा में एलपीजी आयात करने से देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है। इंडक्शन हीटर को बढ़ावा देकर सरकार 'नेट जीरो' कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य की ओर भी बढ़ना चाहती है।
यदि देश का बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा या बिजली आधारित खाना पकाने के तरीकों को अपनाता है, तो भविष्य में अंतरराष्ट्रीय युद्धों या तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का आम आदमी की रसोई पर असर कम होगा।