Tejas Jet Grounded: भारतीय वायुसेना (IAF) ने इस महीने की शुरुआत में हुए एक हादसे के बाद अपने स्वदेशी फाइटर जेट तेजस (Tejas) के पूरे बेड़े को ग्राउंडेड कर दिया है। तकनीकी जांच और सुरक्षा ऑडिट के चलते करीब 30 सिंगल-सीट वाले तेजस विमानों की उड़ान पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। यह फैसला विमान में आई तकनीकी खराबी और सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा के लिए लिया गया है।
रूटीन उड़ान के दौरान हुआ हादसा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस महीने की शुरुआत में एक महत्वपूर्ण एयरबेस पर नियमित प्रशिक्षण उड़ान के बाद लैंडिंग के दौरान तेजस विमान एक हादसे का शिकार हो गया था। शुरुआती आकलन में ऑनबोर्ड सिस्टम में तकनीकी खराबी की बात सामने आई है। इस दुर्घटना में विमान के एयरफ्रेम को गंभीर नुकसान पहुंचा है और संभावना है कि इसे दोबारा उपयोग में न लाया जा सके। गनीमत रही कि पायलट समय रहते इजेक्ट करने में सफल रहा और उसे कोई गंभीर चोट नहीं आई।
तीसरी बार हादसे का शिकार हुआ तेजस
तेजस विमान के वायुसेना में शामिल होने के बाद से यह तीसरा बड़ा हादसा है। पहला क्रैश मार्च 2024 में जैसलमेर के पास हुआ था, जिसमें पायलट सुरक्षित बच गया था। दूसरा दुखद हादसा नवंबर 2025 में दुबई एयरशो के दौरान हुआ था, जिसमें एक पायलट की जान चली गई थी। उस क्रैश की जांच अभी भी जारी है। इन लगातार होती घटनाओं ने स्वदेशी लड़ाकू विमान की तकनीकी विश्वसनीयता और मेंटेनेंस पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके कारण गहन जांच के आदेश दिए गए हैं।
तेजस Mk1A प्रोग्राम पर पड़ेगा असर
यह ताजा हादसा ऐसे समय में हुआ है जब तेजस Mk1A प्रोग्राम पहले से ही देरी का सामना कर रहा है। भारतीय वायुसेना ने 180 Mk1A विमानों का ऑर्डर दिया है, लेकिन इनकी डिलीवरी अपने तय समय से लगभग दो साल पीछे चल रही है। Mk1A वर्तमान में सेवा में मौजूद तेजस का अपग्रेड वर्जन है, जिसमें आधुनिक राडार और मिसाइल सिस्टम लगे हैं। बार-बार होने वाले इन हादसों से नए विमानों के प्रोडक्शन और डिलीवरी शेड्यूल पर और दबाव बढ़ सकता है।
सुरक्षा जांच के बाद ही भरेंगे उड़ान
न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, वायुसेना ने करीब 30 सिंगल-सीट तेजस जेट्स को तब तक उड़ान भरने से रोक दिया है जब तक कि विस्तृत तकनीकी जांच पूरी नहीं हो जाती। हालांकि, वायुसेना की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि लड़ाकू विमानों के बेड़े में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस तरह की ग्राउंडिंग एक सामान्य प्रक्रिया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही तय होगा कि ये विमान दोबारा कब से आसमान में नजर आएंगे।