नई दिल्ली: असम सरकार ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को मिली राहत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। राज्य सरकार ने तेलंगाना हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें खेड़ा को एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत (Transit Anticipatory Bail) दी गई थी। असम सरकार इस फैसले को रद्द करने की मांग कर रही है ताकि मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सके।
क्या है मामला?
यह पूरा विवाद कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा द्वारा असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा के खिलाफ की गई टिप्पणियों से शुरू हुआ। खेड़ा ने आरोप लगाया था कि रिनिकी सरमा के पास कई विदेशी पासपोर्ट हैं और विदेश में अघोषित संपत्ति है। इन आरोपों के बाद असम में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, जिसे लेकर अब कानूनी खींचतान जारी है।
सुप्रीम कोर्ट से जल्द सुनवाई की अपील
रिपोर्ट्स के मुताबिक, असम सरकार ने इस मामले को बेहद गंभीर माना है और सुप्रीम कोर्ट से इस पर तुरंत सुनवाई करने का आग्रह किया है। राज्य सरकार ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्य कांत के समक्ष इस मामले को बुधवार तक सूचीबद्ध करने की विनती की है। सरकार का तर्क है कि ट्रांजिट बेल के आदेश से जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
क्या था पवन खेड़ा का दावा?
पवन खेड़ा ने 5 अप्रैल को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दावा किया था कि रिनिकी भुइयां सरमा के पास एक से अधिक पासपोर्ट हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि असम के मुख्यमंत्री ने 9 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनावों के लिए अपने चुनावी हलफनामे में इन संपत्तियों और विवरणों का खुलासा नहीं किया था। इन बयानों के बाद गुवाहाटी क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दर्ज है केस
कांग्रेस नेता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज है। इसमें चुनाव के संबंध में झूठे बयान देने के लिए धारा 175 और धोखाधड़ी से संबंधित धारा 318 जैसी अन्य धाराएं शामिल हैं। गिरफ्तारी की आशंका के बीच खेड़ा ने 7 अप्रैल को तेलंगाना हाई कोर्ट का रुख किया था, जहां से उन्हें एक सप्ताह की सीमित सुरक्षा मिली थी, जिसे अब असम सरकार ने चुनौती दी है।