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शहला मसूद हत्याकांड: लालच व धमकी के कारण इरफान ने छिपाई थी हकीकत

विशेष सीबीआई अदालत ने इरफान द्वारा सरकारी गवाह बनने की गुहार 6 सितंबर को स्वीकार की थी।

शहला मसूद हत्याकांड: लालच व धमकी के कारण इरफान ने छिपाई थी हकीकत
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इंदौर. इरफान ने अदालत में कहा कि उसका जमीर जाग जाने के बाद उसने सरकारी गवाह बनकर अदालत के सामने अपना बयान दर्ज कराया और शहला हत्याकांड की सच्चाई बयान करने के बाद वह बेहद हल्का महसूस कर रहा है। इस बीच बचाव पक्ष के वकील अविनाश सिरपुरकर ने शुक्रवार को भोजन अवकाश के दौरान इरफान को न्यायालय परिसर स्थित सीबीआई के लोक अभियोजक के कक्ष में ले जाए जाने पर अदालत के सामने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। सिरपुरकर ने आरोप लगाया कि सरकारी गवाह को भोजन अवकाश के दौरान सीबीआई के अभियोजक के पास इसलिए ले जाया गया, ताकि उसे बचाव पक्ष के वकीलों के संभावित प्रश्नों के उत्तर सिखाए जा सकें।

इरफान ने 30 अक्टूबर को विशेष सीबीआई अदालत को बताया था कि ताबिश ने भोपाल के कोहेफिजा थाना क्षेत्र में 16 अगस्त 2011 की सुबह देसी कट्टे से बेहद नजदीक से गोली मारकर शहला की हत्या की थी, जबकि वह खुद वारदात के वक्त भाड़े के इस शूटर के साथ था। विशेष सीबीआई अदालत ने इरफान द्वारा सरकारी गवाह बनने की गुहार 6 सितंबर को स्वीकार की थी। उसने अदालत के सामने सीआरपीसी की धारा 307 के तहत 21 जून को पेश अर्जी में क्षमादान की गुहार करते हुए कहा था कि वह स्वेच्छा और अंतरात्मा से अदालत को मामले से जुड़ी समस्त जानकारी देना चाहता है, ताकि अदालत उचित निर्णय ले सके।

आरटीआई कार्यकर्ता शहला मसूद हत्याकांड के मुकदमे में सरकारी गवाह बने इरफान ने शुक्रवार को विशेष सीबीआई अदालत में जिरह के दौरान दावा किया कि उसने अपने पिछले कथनों में इसलिए इस वारदात की हकीकत बयान नहीं की, क्योंकि मामले के एक सहआरोपी ने उसे पैसों का लालच और धमकियां दी थीं।

नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, जाहिदा पर साजिश रचना का आरोप -
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