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AIIMS में इस बीमारी का इलाज करने के लिए नहीं है एक भी डॉक्टर, बंद हुआ OPD

पिछले 19 महीनों से एक भी रोगी का इलाज नहीं हो पाया है।

AIIMS में इस बीमारी का इलाज करने के लिए नहीं है एक भी डॉक्टर, बंद हुआ OPD
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भारत के सबसे बड़े और उन्नत अस्पतालों में से एक है। लेकिन इस बीच इस बात की जानकारी मिली है कि एम्स की भोपाल शाखा में डॉक्टरों की कमी की वजह से वहां के मरीजों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेन्टल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज के एक सर्वे के मुताबिक, भारत में लगभग 15 करोड़ लोग मानसिक रूप से पीड़ित हैं। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी देश के सबसे बड़े अस्पतालों में से एक माने जाने वाले एम्स की भोपाल शाखा में पिछले 19 महीनों से एक भी मानसिक रोगी का इलाज नहीं हो पाया है।

इसकी मुख्य वजह है अस्पताल में एक भी बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) मौजूद नहीं है। एम्स भोपाल की शुरुआत 2012 में हुई थी और उसके कुछ दिनों के बाद 26 जनवरी 2013 को ओपीडी की शुरुआत हुई थी। पांच साल बीत जाने के बाबजूद अब भी अस्पताल में क्षमता के मुताबिक 80 प्रतिशत डॉक्टरों की कमी है।

एम्स भोपाल में 437 पदों में से मात्र 73 पदों पर डॉक्टरों की बहाली हुई है। नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेन्टल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज के एक सर्वे के मुताबिक, मध्य प्रदेश में 20 लाख मानसिक रोगी पर सिर्फ एक डॉक्टर है। मार्च 2014 में एम्स भोपाल में 27 विभाग और 61 डॉक्टर कार्यरत थे। अस्पताल की तरफ से जारी किए गए एक बयान में बताया गया है कि अस्पताल में अभी 41 विभाग कार्यरत हैं।

लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। सूत्रों के मुताबिक अस्पताल में अभी सिर्फ 25 विभाग और 59 डॉक्टर कार्यरत हैं। एम्स में पढ़ रहे एक छात्र के अनुसार, आधारिक संरचना और अच्छी शिक्षा की कमी के कारण उसे प्रैक्टिल ट्रैंनिंग के लिए दूसरे कॉलेज का रुख करना पड़ता है। विकसित राष्ट्र की बनने के लिए स्वस्थ नागरिक की अहम भूमिका होती है अगर अस्पताल का हाल कुछ इस तरह का होगा तो विकसित राष्ट्र की कामना सपना बन कर रह जाएगा।

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