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मध्य प्रदेश में स्वाइन फ्लू के 13 मरीज मिले, जारी हुआ अलर्ट

मप्र में स्वाइन फ्लू से पीड़ित 58 मरीजों के सैंपल लिए गए थे, उनमें से 13 पॉजिटिव पाए गए हैं।

मध्य प्रदेश में स्वाइन फ्लू के 13 मरीज मिले, जारी हुआ अलर्ट
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भोपाल.प्रदेश में स्वाइन फ्लू के 13 मरीज पाए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है। सभी निजी अस्पतालों से कहा गया है कि वे केंद्र से जारी प्रोटोकाल का पालन करने के लिए बाध्य हैं। किसी भी स्थिति में अफवाह नहीं फैलाएं। निजी अस्पताल स्वाइन फ्लू से हुई मौत की जानकारी देने के लिए अधीकृत नहीं हैं। यदि वे ऐसा करते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उनके लाइसेंस निरस्त किए जाएंगे।

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वे सभी मरीज आंध्र प्रदेश, दिल्ली एवं नागपुर से आए हुए थे। इसे देखते हुए उक्त जगहों से आने वाले सभी ऐसे लोगों को सावधानी के साथ रहने की हिदायत दी गई है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने बुधवार को इस मुद्दे को लेकर अचानक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुला ली। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में अलर्ट जारी किया गया है। उनके पास स्वाइन फ्लू से निबटने के सभी इंतजाम हैं।

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प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, सिविल अस्पतालों में इसके उपचार की व्यवस्था की गई है। एन-95 मास्क व पीपीए किट वहां उपलब्ध कराए गए हैं। सभी अस्पतालों में वेंटिलेटर उपलब्ध है। संभाग स्तर पर एक समिति बनाई गई है। प्रत्येक मेडिकल कॉलेज के डीन को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने सभी से कहा कि वे इस मामले में किसी भी तरह का भ्रम नहीं फैलाएं। बेवजह के अफवाह से भ्रम की स्थिति पैदा होती है। लोग घबराए नहीं। सरकारी अस्पतालों में सभी तरह के इंतजाम हैं।

अस्पतालों के खिलाफ होगी कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग के प्रवीर कृष्ण ने कहा कि स्वाइन फ्लू से किसी भी मरीज की मौत नहीं हुई है। निजी अस्पताल दहशत फैलाकर भ्रम फैला रहे हैं। उन्होंने निजी अस्पतालों को जमकर आड़े हाथों लिया। उन्हें चेतावनी देते हुए कहा कि प्रोटोकाल का उल्लंघन किसी भी सूरत में नहीं हो। यदि ऐसा होता है तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इंदौर व भोपाल के निजी अस्पतालों से उन्हें ऐसे मरीज होने की जानकारी मिली है। भ्रम फैलाने वाले अस्पतालों के लाइसेंस निरस्त किए जाएंगे। ऐसे मरीज पाए जाने पर मेडिकल कॉलेज के डीन की अध्यक्षता में गठित समिति को रिपोर्ट की जाएगी। समिति में संभागीय संयुक्त संचालक, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा मेडिसिन विभागाध्यक्ष एवं नोडल अधिकारी सदस्य होंगे जो 24 घंटे में अपनी रिपोर्ट संचालनालय को प्रस्तुत करेंगे।
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