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चार पुत्रियों ने दिया पिता की अर्थी को कंधा, पारंपरिक रीति रिवाजों को तोड़ा

वैश्य परिवार में हुई इस अप्रत्याशित घटना से वहां भाव भीना माहौल बन गया व उपस्थित लोगों की आंखो में नमी आ गई।

चार पुत्रियों ने दिया पिता की अर्थी को कंधा, पारंपरिक रीति रिवाजों को तोड़ा
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जुन्नारदेव. वर्तमान दौर में बेटा व बेटियों में कोई अंतर नहीं रह गया है। इसका उदाहरण नगर के वार्ड 9 में घटित एक घटना में देखने को चला। जहां पर हिंदु धर्म के पारम्परिक रीति रिवाजों की मान्यताओं को तोड़ते हुए अपने घर में किसी पुरूष सदस्य के ना होने के कारण अपने पिता की अर्थी को कांधा देकर अनुकरणी कार्य किया है।
वार्ड क्रमांक 9 में वैश्य परिवार में हुई इस अप्रत्याशित घटना से वहां भाव भीना माहौल बन गया व उपस्थित लोगों की आंखो में नमी आ गई। वार्ड क्रमांक 9 में निवास रत 50 वर्षीय श्रीकांत वैश्य बीते कई दिनों से बीमार चल रहे थे उनके स्वास्थ की देखभाल उनकी पत्नी तथा चार पुत्रिया कु शैल कुमारी, कु सोनम,कु प्रयंका तथा कु शिवानी के द्वारा की जा रही थी।
शुक्रवार शाम को उपचार हेतु नागपुर ले जाने के दौरान ही श्रीकांत वैश्य की मृत्यु हो गई। उनका पार्थिव शरीर को वापस घर लाने के बाद इस विषय पर मंथन शुरू हो गया की बेटे के अभाव में अब उनकी चिता को अग्नि कौन देगा। इन सवालों के जवाब को डूंड रहा वैश्य परिवार व वार्डवासियों को वहां उपस्थित वैश्य परिवार की जैष्ठ पुत्री शैल कुमारी के द्वारा भी जिग्यासा वस इस सवाल का जबाव देने की इच्छा जाहिर की गई उसमें यह तय किया गया की अब मृत्य पिता श्रीकांत वैश्य के शरीर को मुखाग्नि उनकी बडी पुत्री शैल कुमारी के द्वारा ही दी जाएगी।
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