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सब्जियों पर पड़ रही‌ मौसम की मार, बाजारों में आवक भी कम, तिगुने दामों पर बिक रही सब्जियां

कृषि विभाग से जुडे लोगों के अनुसार मार्च महीने में ही सब्जियों के दामों में कमी हो पाएगी, जहां एक तरफ महंगाई चरम पर है वहीं दूसरी ओर सब्जियों की महंगाई ने मध्यमवर्गीय परिवार की कमर तोड़कर रख दी है और लोग सस्ती सब्जी की तलाश में दुकान दर दुकान भटक रहे हैं।

सब्जियों पर पड़ रही‌ मौसम की मार, बाजारों में आवक भी कम, तिगुने दामों पर बिक रही सब्जियां

दमोह. लगातार बदलते मौसम ने इस साल सभी को हलाकान कर डाला है, कुदरत से इस बदलते मिजाज से सब्जियां भी अछूती नहीं रही है, अगर पिछले वर्ष के सब्जियों के दामों से इस वर्ष तुलना करें तो इस वर्ष सब्जियों के दाम तिगुने है सब्जियों के बढ़े दामों से सबसे अधिक मध्यमवर्गीय परिवारों पर असर पड़ा है अगर देखा जाए तो इसकी मुख्य वजह एक ही निकल कर सामने आ रही है वह है मौसम की मार।

लगातार हुई बारिश और ठंड का मौसम लंबा खिंचने की वजह से फसलें अभी भी परिपक्व नहीं हो पाई हैं, सबसे अधिक असर सब्जियों पर पड़ा है जो इस बदले हुए मौसम की वजह से सस्ती नहीं हो पा रही हैं, आवक कमजोर होने से सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं चाहे वह प्याज हो या आलू इनके दाम अभी भी अधिक हैं वही हरी सब्जियों की बात करें तो पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष सब्जियों के दाम तीन गुने है।

मटर जो पिछले वर्ष फरवरी माह में 10 रुपये किलो बिक चुकी है वह इस वर्ष 30 रुपये किलो बिक रही है वही भिंडी, गिलकी, शिमला मिर्च, बींस, लौकी आदि के भाव भी आसमान छू रहे हैं। पिछले वर्ष जनवरी माह में लहसुन के दाम 40 से 60 रुपये किलो थे लेकिन इस वर्ष लहसुन 240 रुपये किलो बिक रहा है, सब्जी विक्रेताओं की माने तो मौसम की मार की वजह से सब्जियों के दाम बेतहाशा बढ़े और घटने का नाम नहीं ले रहे हैं।

कृषि विभाग से जुडे लोगों के अनुसार मार्च महीने में ही सब्जियों के दामों में कमी हो पाएगी, जहां एक तरफ महंगाई चरम पर है वहीं दूसरी ओर सब्जियों की महंगाई ने मध्यमवर्गीय परिवार की कमर तोड़कर रख दी है और लोग सस्ती सब्जी की तलाश में दुकान दर दुकान भटक रहे हैं।

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