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चहेती कंपनी को लाभ पहुंचाने तीन गुना रेट पर खरीदी सोलर लाइट्स, सरकारी खजाने को लगाया साढ़े नौ लाख का चूना 

प्रदेश के नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग के अफसरों और जिम्मेदार नेताओं की मिलीभगत से सरकारी खजाने को लगभग साढ़े नौ करोड़ का चूना लग गया। अपनी चहेती कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए नवीन एवं नवकरणीय विभाग ने लगभग 5 करोड़ मूल्य की सोलर लाइटें 14 करोड़ 59 लाख रुपए में खरीदी।

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भोपाल। प्रदेश के नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग के अफसरों और जिम्मेदार नेताओं की मिलीभगत से सरकारी खजाने को लगभग साढ़े नौ करोड़ का चूना लग गया। अपनी चहेती कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए नवीन एवं नवकरणीय विभाग ने लगभग 5 करोड़ मूल्य की सोलर लाइट्स 14 करोड़ 59 लाख रुपए में खरीदी। यह कारनामा पूर्व की भाजपा सरकार के कार्यकाल में अंजाम दिया गया, जिसका खुलासा अब कांग्रेस सरकार में हुआ। मामले की शिकायत वित्त विभाग के पास पहुंचने के बाद वित्त विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

प्रदेश के नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग के अंतर्गत यह नुकसान दायक सौदा प्रदेश में लगभग डेढ़ साल पहले किया गया। लेकिन प्रदेश में भाजपा की सरकार जाने के बाद जब कांग्रेस की सरकार आई तब इस घोटाले की जानकारी सामने आ रही है। सूत्रों के अनुसार इस मामले को स्वयं भाजपा नेताओं द्वारा ही वित्त मंत्री से करके जांच कराने के लिए कहा गया है। भाजपा की तरफ से मिले घोटाले के सूत्रों के बाद वित्त मंत्री ने भी इस मामले की जांच कराने के लिए विभागीय अफसरों से कहा है। वित्त विभाग ने पत्र भेजकर नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग के अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। वित्त विभाग के पास जो शिकायत पहुंची हैं, उसमें सरपंच व सचिव के फर्जी हस्ताक्षर से डिमांड लेटर साइन कराने की बात भी सामने आ रही है।

मानक दरों से अधिक पर की खरीदी -

नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग में सोलर लाइटों की दरें औसतन 12 हजार रुपये से ज्यादा नहीं होना चाहिए। हालांकि मप्र ऊर्जा विकास निगम ने 15 हजार रुपये प्रति लाइट की दर से रेट तय कर दिए थे। इसके बावजूद खरीदी 35 हजार रुपये प्रति लाइट की दर से की गई। जो कि मानक दरों से लगभग तीन गुना है।

कितने का हुआ नुकसान -

भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुए इस घोटाले में प्रदेशभर के लिए कुल 4200 सोलर लाइटों की खरीदी की गई थी। इन लाइटों की खरीदी पर जहां लगभग 5 करोड़ 40 लाख रुपया खर्च किया जाना था, वहां चहेती कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए 9 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च करके 14 करोड़ 59 लाख रुपये का भुगतान किया गया।

प्रदेश के बाहर की कंपनी को दिया नियम विरुद्ध कांट्रेक्ट -

विभाग ने सोलर लाइटों की खरीदी में प्रदेश के बाहर की कंपनी को कांट्रेक्ट दिया। जबकि राज्य में भी सोलर लाइटों की खरीदी के लिए अधिकृत एजेंसियां थीं। विभाग के अफसरों ने पैसों की बंदरबांट के लिए दूसरे राज्यों की कंपनी से काम करवाया। नियमानुसार मप्र से बाहर की एजेंसी को काम देने से पहले मप्र लघु उद्योग निगम को उसका रेट कांट्रेक्ट कराना जरूरी था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। न ही कंपनी से मानक दरें लीं गईं। जिसके चलते सोलर लाइट खरीदी घोटाले को पूरी प्लानिंग के तहत अंजाम दिया गया।

वित्त विभाग ने बुलाई रिपोर्ट -

मामले की शिकायत वित्त विभाग के पास पहुंचने पर विभाग ने इसकी जांच शुरू कर दी है। वित्त विभाग ने नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग को पत्र लिखकर पूरे मामले की रिपोर्ट बुलाई है। आगे चलकर इस मामले में कैग की जांच में आपत्ति आना तय माना जा रहा है। वित्त विभाग द्वारा रिपोर्ट बुलाए जाने के बाद संबंधित विभाग में खलबली मच गई है।

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