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सिक्योरिटी पर लाखों खर्च, गार्ड सोते रहे, चोर आधा दर्जन चंदन के पेड़ काटकर ले गए

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (बीयू) परिसर में लगे बेशकीमती चंदन के आधा दर्जन से अधिक पेड़ फिर कट गए और हर बार की तरह इस बार भी प्रबंधन बेखबर है। इसी साल तीन बार परिसर में लगे दर्जनों चंदन के पेड़ कट चुके हैं।

सिक्योरिटी पर लाखों खर्च, गार्ड सोते रहे, चोर आधा दर्जन चंदन के पेड़ काटकर ले गए

भोपाल। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (बीयू) परिसर में लगे बेशकीमती चंदन के आधा दर्जन से अधिक पेड़ फिर कट गए और हर बार की तरह इस बार भी प्रबंधन बेखबर है। इसी साल तीन बार परिसर में लगे दर्जनों चंदन के पेड़ कट चुके हैं। परिसर की संपत्ति की सुरक्षा का जिम्मा जिनके ऊपर है वह रात में तो छोड़िए दिन में झपकियां ले रहे हैं। ऐसे में एक-दो साल में यदि बीयू परिसर चंदन पेड़ विहीन हो जाए तो कोई बड़ी बात नहीं होगी। इस वर्ष जनवरी, मार्च और अब अगस्त में चंदन पेड़ काटने के मामले आ चुके हैं। इन आठ माह में 24 से अधिक चंदन के पेड़ कट चुके हैं, लेकिन हर बार प्रबंधन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने पर घटनाएं रूकने का नाम नहीं ले रही हैं। एक ओर तो विवि हरियाली महोत्सव के अंतर्गत पौधरोपण पर जोर दे रहा है, वहीं दूसरी ओर तस्कर लगातार चंदन के पेड़ों को काटकर अभियान को चुनौती दे रहे हैं।

नहीं किया अनुबंध की शर्तों का पालन फिर भी हुआ भुगतान

विवि ने सिक्योरिटी एजेंसी से जो अनुबंध किया उसकी एक शर्त के अनुसार विवि की चल-अचल संपत्ति की सुरक्षा का जिम्मा एजेंसी का है। बिना अनुमति प्रवेश नहीं दिए जाने, आगंतुकों का अस्थायी परिचय पत्र जारी करने जैसे अन्य सुरक्षा से जुड़े ऐसे कई निर्देश जिनका अनुबंध की शर्तों में उल्लेख था, का एजेंसी ने पालन नहीं किया। फिर भी यदि हाल ही के एक दो माह के भुगतान को छोड़ दिया जाए तो एजेंसी को विवि ने भुगतान किया। जबकि लगातार हो रही चोरी की घटनाओं पर विवि को सख्त एक्शन लेना था।

मौके पर कम तैनात रहते हैं सिक्योरिटी गार्ड

बीयू में सुरक्षा के नाम पर हर माह लाखों का वेतन दिया जा रहा है, लेकिन बेकीमती चंदन के पेड़ कट जाने से यहां की सुरक्षा सवालों के घेरे में आ गई है। पहले भी बीयू परिसर के सरकारी क्वाटर, छात्रावास व विभागों में चोरियां हो चुकी है। नाम न छापने की शर्त पर कई कर्मचारी बताते हैं कि यहां सिक्योरिटी के नाम पर जितने कर्मचारियों का वेतन निकाला जा रहा है, वास्तव में मौके पर उतने कभी मिलते ही नहीं है। जो ड्यूटी कर रहे हैं, वह भी झपकियां लेते हैं। परिसर के अंदर आने-जाने वालों से कभी पूछताछ नहीं होती।

दो लाख क्विंटल तक होती है चंदन की कीमत

बाजार में चदन की लकड़ी की कीमत डेढ से दो लाख रुपए प्रति क्विंटल तक होती है। सामान्य चंदन लकड़ी का सरकारी रेट 65 से 70 हजार रुपए प्रति क्विंटल और सार वाली चंदन लकड़ी की कीमत डेढ़ लाख रुपए क्विंटल तक होता है। इन बेशकीमती लकड़ियों की कटाई को लेकर कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है। विशेषज्ञ बताते हैं कि मध्यप्रदेश में अधिकांश जगह की मिट्टी ब्लैक कॉटन है, साथ ही चंदन के पेड़ों के लिए उचित तापमान और वार्षिक वर्षा होती है। इसीलिए यहां ज्यादातर स्थानों पर चंदन स्वतः भी उग जाता है।

गंभीर घटना, वीसी से करेंगे चर्चा

यह एक गंभीर घटना है, इसे लेकर कुलपति से चर्चा की जाएगी। हम वीसी से कहेंगे कि इसमें जिसने भी लापरवाही बरती है उस पर कार्रवाई होना चाहिए। - किशन सूर्यवंशी, ईसी मेंबर

चंदन का पेड़ कटना जांच का विषय

लगातार विवि परिसर से चंदन के पेड़ काटे जा रहे हैं। इसकी जांच होना चाहिए। किसकी मिलीभगत से यह चल रहा है, प्रबंधन को इसका पता लगाना चाहिए। - सुधीर ठाकरे, अध्यक्ष बीयू कर्मचारी संघ।

चंदन के पेड़ काटने और बेचने का यह है नियम

नगर निगम और तहसीलदार के यहां से अनुमति लेने के लिए एक पेड़ की जगह दस पेड़ लगाना होते हैं। साथ ही जहां नए पेड़ लगाए जाते हैं, वहां की जमीन का उपयोग नहीं बदला जा सकता है। नियमानुसार अनुमति लेकर काटे गए चंदन के पेड़ को सरकारी रेट पर सरकारी एजेंसी द्वारा ही बेचा जा सकता है। नगर निगम सीमा में आने वाले चंदन पेड़ काटने के लिए नगर निगम अनुमति देता है। वहां वन विभाग का भी अधिकारी बैठता है। निगम सीमा के बाहर पेड़ होने पर तहसीलदार या एसडीएम को आवेदन देना होता है। वहां से आवेदन विभाग पास आता है और उचित कारण होने पर काटने की परमिशन दी जाती है।

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