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राष्ट्रपति मेडल प्राप्त बुजुर्ग सदई लाल झोपड़ी में रहने को मजबूर, 1972 की भारत बांग्लादेश की लड़ाई में मिला था सम्मान

मध्यप्रदेश रायसेन जिले के सिलवानी में राष्ट्रपति मेडल प्राप्त सदई लाल बुजुर्ग एक झोपड़ी में अपनी पत्नी के साथ बदहाली की जिंदगी जीने को मजबूर है। जबकि सन 1972 की भारत बांग्लादेश की लड़ाई के दौरान राष्ट्रपति मेडल मिलने का सम्मान पा चुके हैं।

राष्ट्रपति मेडल प्राप्त बुजुर्ग सदई लाल झोपड़ी में रहने को मजबूर, 1972 की भारत बांग्लादेश की लड़ाई में मिला था सम्मान
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शरद शर्मा। मध्यप्रदेश रायसेन जिले के सिलवानी में राष्ट्रपति मेडल प्राप्त सदई लाल बुजुर्ग एक झोपड़ी में अपनी पत्नी के साथ बदहाली की जिंदगी जीने को मजबूर है। जबकि सन 1972 की भारत बांग्लादेश की लड़ाई के दौरान राष्ट्रपति मेडल मिलने का सम्मान पा चुके हैं। होमगार्ड सैनिक रहे सदई लाल अपनी जिंदगी के आखिरी समय में आर्थिक रूप से संघर्ष कर रहे हैं।रायसेन जिले के सिलबानी में सदई लाल झोपड़ीनुमा काली प्लास्टिक की पन्नी लगे घर में जीवन बसर कर रहे हैं।

स्थिति यह है कि राष्ट्रपति मेडल प्राप्त इस व्यक्ति को शासन की किसी योजनाओं का लाभ भी नही मिल पा रहा है। रिटायरमेंट के वाद जीवन यापन के लिए मेहनत मजदूरी करके अपना परिवार का भरण पोषण किया, अब शरीर उतना भी साथ नही देता। सिलवानी नगर में वार्ड नंबर 3 में रहने वाले सदई लाल कुम्हार ने अपने नगर सैनिक के कार्यकाल के दौरान कई पुरस्कार पा चुके हैं। भारत सरकार द्वारा सन 1972 की भारत बांग्लादेश की लड़ाई में वह शामिल हुए थे। जिसके उपरांत उनको राष्ट्रपति मेडल से सम्मानित किया गया था।

1982 में डिवीजनल कमांडेंट होमगार्ड भोपाल मे पदस्थापना के दौरान उनकी सेवा कार्य पूरी होने पर रिटायरमेंट हो गया और वह अपने घर सिलवानी वार्ड नंबर 3 में आ गए। इसके उपरांत उन्होंने यहां पर स्टेट बैंक में भी गार्ड का काम किया और स्टेट बैंक के बाद वह मेहनत मजदूरी करने लगे।जैसा कि पूर्व की सरकारों द्वारा नगर सैनिकों को किसी प्रकार की पेंशन नहीं दी जाती थी वही वर्तमान सरकार भी इस ओर किसी प्रकार का कोई ध्यान नहीं दिया।

सदई लाल को किसी भी प्रकार की शासन द्वारा मूलभूत योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिसकी वजह से बीमारी के कारण भी अपनी गरीबी से जूझ रहे शासन के द्वारा बनने वाले कार्ड भी उनको उपलब्ध नहीं हो पाए। वही अभी तक प्रधानमंत्री योजना के तहत बनने वाली कुटीर का भी लाभ उनको नहीं मिल पाया और वह एक कच्चे मकान में टपकते हुए मकान पर काली पन्नी चढ़ाकर अपने परिवार के साथ रह रहे है।

जब सदई लाल से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि विगत कई महीनों से सिलवानी नगर पंचायत तहसील कलेक्ट्रेट सभी जगह घूम कर कर आवेदन कर थक हार चुके हैं, मगर कहीं से भी उनको किसी प्रकार की सहायता का रास्ता दिखाई नहीं दे रहा है। वह चाहते हैं कि उनके इस शासकीय सेवा के उपरांत विभिन्न योजनाओं में से प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल सके जिससे कि वह अपने जीवित रहते एक मकान अपने परिवार के लिए छोड़ जाएं।

वही नगर पंचायत अध्यक्ष मुकेश राय से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि नगर पंचायत के द्वारा उनको एवं उनकी पत्नी को नियम अनुसार पेंशन दी जा रही है इस बार की सूची में आवास योजना के तहत उनका नाम भी आ गया है जिसके उपरांत उनको आवास दी जावेगी। मगर अभी तक कुटी भी नसीब नही हुई है, हर बार उनसे कहा जाता है कि इस बार उनको कुटी जरूर मिलेगी। अब देखना यह होगा कि सदई लाल को कुटी कब मिल पाती है।

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