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प्लॉट नामांकन के हस्तांतरण अनुमति के लिए पुलिस ने मांगी रिश्वत, कोर्ट ने सुनाई 4 साल की सजा

ग्वालियर में एक पुलिस कर्मचारी से 5000 की रिश्वत लेने वाले ग्वालियर विकास प्राधिकरण के लिपिक को कोर्ट ने 4 साल के आश्रय कारावास की सजा से दंडित किया है. उस पर ₹10000 का अर्थदंड भी लगाया है. यह रिश्वत लिपिक द्वारा एक प्लॉट के नामांकन के हस्तांतरण अनुमति के एवज में मांगी गई थी.

प्लॉट नामांकन के हस्तांतरण अनुमति के लिए पुलिस ने मांगी रिश्वत, कोर्ट ने सुनाई 4 साल की सजा
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ग्वालियर. ग्वालियर में एक पुलिस कर्मचारी से 5000 की रिश्वत लेने वाले ग्वालियर विकास प्राधिकरण के लिपिक को कोर्ट ने 4 साल के आश्रय कारावास की सजा से दंडित किया है. उस पर ₹10000 का अर्थदंड भी लगाया है. यह रिश्वत लिपिक द्वारा एक प्लॉट के नामांकन के हस्तांतरण अनुमति के एवज में मांगी गई थी.

दरअसल जुलाई 2016 में पुलिस कॉन्स्टेबल संजय द्विवेदी ने विनय नगर सेक्टर 2 में स्थित एक प्लॉट की नामांकन हस्तांतरण की अनुमति देने के लिए जीडीए के भूखंड शाखा में तैनात विजय दुबे से संपर्क किया था. उससे अनुमति दिलाने की गुहार लगाई थी, लेकिन उससे ₹13650 के शुल्क के स्थान पर ₹26000 की मांग की.

इसकी शिकायत कॉन्स्टेबल ने लोकायुक्त एसपी से की योजना के मुताबिक 15 जुलाई 2016 को जीडीए कार्यालय में ही ₹1000 रुपए की रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त पुलिस ने उसे रंगे हाथों गिरफ्तार किया. लिपिक विजय दवे के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया गया था.

जहां उस पर भ्रष्टाचार अधिनियम की विभिन्न धाराओं के मामले में सिद्ध पाए जाने पर कोर्ट ने उसे 4 साल के आश्रय कारावास और ₹10000 के अर्थदंड से भी दंडित किया आरोपी लिपिक को सेंट्रल जेल भेज दिया गया है.

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