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हनी ट्रैप के जाल में फंसे अफसरों ने करोड़ों के दिलाए ठेके, भोपाल के रसूखदार से लेकर होटल संचालक भी शामिल

हनी ट्रैप केस की जांच व्यापक स्तर पर जारी है। जिसमें घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं। हनी ट्रैप गैंग के तार उज्जैन से भी बड़े स्तर पर जुड़े रहे हैं। सोमवार को तीन-तीन जिलों में इस केस की आरोपी महिला अनीता दयाल व युवती मोनिका यादव का इंतजार रहा।

हनी ट्रैप के जाल में फंसे अफसरों ने करोड़ों के दिलाए ठेके, भोपाल के रसूखदार से लेकर होटल संचालक भी शामिल
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Officers gave contracts worth crores of rupees to get rid of Honey Trap gang

भोपाल। हनी ट्रैप केस की जांच व्यापक स्तर पर जारी है। जिसमें घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं। हनी ट्रैप गैंग के तार उज्जैन से भी बड़े स्तर पर जुड़े रहे हैं। सोमवार को तीन-तीन जिलों में इस केस की आरोपी महिला अनीता दयाल व युवती मोनिका यादव का इंतजार रहा। क्योंकि इसकी जानकारी दोपहर होने तक लीक हो गई थी। देर शाम इंदौर पुलिस टीम मोनिका को लेकर भोपाल आ गई है। पुलिस टीम छतरपुर नहीं, लेकिन आरती के घर की निगरानी लगातार की जा रही है। इधर, इंदौर वाली टीम भोपाल से राजगढ़ चली गई। जांच में सामने आया कि हनी ट्रैप गैंग की युवतियां उज्जैन के इंदौर रोड स्थित एक अलीशान होटल में अपने शिकार को लेकर जाती थीं। सूत्रों का कहना है कि इंदौर में पकड़ी गईं युवतियों के ताल्लुकात उज्जैन में रह एक पूर्व अफसर से रहे हैं। जिसने बाद इन युवतियों ने वल्लभ भवन तक अपनी पहुंच बनाई। उज्जैन लोकायुक्त में पदस्थ रहे एक बड़े अधिकारी को भी हनी ट्रैप में फांसे जाने की बात सामने आ रही है। यहीं नहीं इन लोगों के लिए उज्जैन का यह आलीशान होटल बेहद सुरक्षित माना जाता रहा है। हनी ट्रैप की इस गैंग ने एक बार नहीं बल्कि कई बार इस होटल के शानदार कमरों का उपयोग किया है। गैंग के इस जाल में फंसे बड़े अधिकिारयों और नेताओं के माध्यम से सिंहस्थ में दिए जाने वाले करोड़ों के ठेके में भी अपने चहेतों को दिलाए गए। कहा जा रहा है कि भोपाल के रसूखदार अधिकारियों ने फंसने के बाद हनी ट्रेप गैंग से अपना पीछा छुड़ाने की कोशिश में ठेकेदारों को करोड़ों रुपए के ठेके दिलवाए।



भोपाल के रसूखदार भी शामिल :

बताया तो यह भी जा रहा है कि भोपाल के कुछ रसूखदार भी इस गैंग के जाल में फंसकर होटल के बगीचे तक और फिर कमरों तक पहुंचे हैं। इस पूरे मामले की जांच में जुटी भोपाल व इंदौर पुलिस इस महत्वपूर्ण तथ्य को जानबूझकर दरकिनार कर रही है। सूत्र बताते हैं कि एक सुंदरी तो तत्कालीन मंत्री से मिलने के लिए उज्जैन के सर्किट हाऊस तक भी पहुंच गई थी। कहा जाता है कि नेता ने अपने सहूलियत के लिए सर्किट हाऊस पर कभी भी सीसीटीवी कैमरे नहीं लगने दिए। ताकि उनसे मिलने आने वाले लोगों के बारे में कोई भी जानकारी रिकार्ड के रूप में उपलब्ध न हो सके।

होटल संचालक भी शामिल :

उज्जैन इंदौर रोड स्थित होटल संचालक इस गंदे धंधे में पहले भी शामिल रह चुका है। हांलाकि, कई सारे बिंदुओं के सामने आने के बाद भी इंदौर पुलिस होटल संचालक के बारे ज्यादा जानकारी नहीं दे रही है। सत्रों का कहना है कि धार्मिक नगरी के रूप में वख्यिात उज्जैन पर इस पूरे मामले का कोई प्रभाव न पड़े इसलिए पुलिस पक्के सबूत के बाद ही कुछ खुलासा करेगी। बहरहाल गैंग से पूछताछ के बाद होटल में गतिविधियां नहीं हो रही है। होटल पर पुलिस नजर बनाए हुए है।

श्वेता मंत्रियों से काम कराने का लेने लगी ठेका

इंदौर जेल में बंद सागर की श्वेता जैन, जो भोपाल में रह रही थी, की हकीकत मंत्रियों व अधिकारियों को फांसने की रही है। श्वेता ने कम समय में ही अपने रसूख और प्रभाव से सागर में अपनी अलग पहचान बना ली और भाजपा पार्टी के कई कार्यक्रमों में यह तत्कालीन नेत्री सबसे आगे रहती थी। मंच पर मंत्रियों के साथ बैठना उठना पार्टी की बैठकों मेंं जाना, मीडिया की सुर्खियों में रहने वाली श्वेता ने प्रशासनिक अधिकारियों को भी अपने पाले में फांसने के प्रयास करना शुरू कर दिए और इसके लिए श्वेता ने विभागीय अधिकारियों के माध्यम से अपने काम निकालना शुरू किया।

सागर कलेक्टर के बंगले पर जाना आम बात

मंत्री एवं विधायकों से जुड़े होने के कारण प्रशासन में भी श्रवेता की अच्छी पकड़ होने लगी थी। कलेक्टर, कमश्निर, एसपी, आईजी, जैसे अधिकारी भी श्वेता जैन द्वारा बताए गए काम के लिए न नहीं कर पाते थे। सागर में पदस्थ कलेक्टर और श्वेता की मेल मुलाकात इतनी बढ़ गई कि कलेक्टर के बंगले पर श्वेता का आना-जाना आम बात थी। गेट पर न कोई रोक सकता था और न कोई सवाल कर सकता था। कलेक्टर के खाने-पीने के शौक से लेकर घूमने, घर की सजावट, कलेक्टर ऑफिस का डेकोरेशन जैसे मामले भी श्वेता जैन ही तय करती थी।

कलेक्टर की पत्नी ने पकड़ा फिर कराए कई बड़े काम...

सागर में एक दिन कलेक्टर बंगले पर ही साहब और श्वेता जैन की नजदीकियों को कलेक्टर की पत्नी ने पकड़ लिया तो दोनों के बीच विवाद हुआ। यहां तक कि कलेक्टर की पत्नी ने घर छोड़ देने की धमकी दी। श्वेता को यह सब नागवार गुजरा और यहां से श्वेता ने तत्कालीन कलेक्टर के ऊपर दबाव डालकर न केवल अपने एनजीओ के लिए कई काम स्वीकृत करा लिए बल्कि प्रशासनिक स्तर पर कुछ कर्मचारियों के ट्रांसफर भी कराए और अपने एनजीओ के लिए कलेक्टर से मोटा फंड भी हासिल किया।

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