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MP में 5 बाबाओं को राज्यमंत्री का दर्जा देने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर, CM शिवराज की मुश्किलें बढ़ी

संतो को राज्य मंत्री का दर्जा दिए जाने को लेकर चौतरफा आलोचना झेल रही शिवराज सिंह चौहान की सरकार की मुश्किलें बड़ गई मध्य प्रदेश सरकार के इस निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में पांच संतों को राज्यमंत्री का दर्जा देकर सरकार जनता पर कर का बोझ और बढ़ाने का हवाला दिया गया है।

MP में 5 बाबाओं को राज्यमंत्री का दर्जा देने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर, CM शिवराज की मुश्किलें बढ़ी
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मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने कल राज्य के 5 बड़े संतो को राज्यमंत्री का दर्जा दिया था। संतो को राज्य मंत्री का दर्जा दिए जाने को लेकर चौतरफा आलोचना झेल रही शिवराज सिंह चौहान की सरकार की मुश्किलें बड़ गई है। दरअसल मध्य प्रदेश सरकार के इस निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है।
आपको बता दे कि मध्य प्रदेश सरकार ने नर्मदा क्षेत्र और विशेष चिह्नित क्षेत्रों में वृक्षारोपण, जल संरक्षण और स्वच्छता के विषयों पर जनजागरूकता का अभियान लगातार चलाने के लिए विशेष समिति बनाई है।
इस समिति में शामिल 5 संत नर्मदानंद, हरिहरानंद, कम्प्यूटर बाबा, भय्यू महाराज और पं. योगेंद्र महंत को शामिल किया है। कल इन सभी को राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया था। राज्य सरकार के इस फैसले के खिलाफ अब मध्‍यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में इस मामले को लेकर अब एक याचिका दायर की गई है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संतो को राज्यमंत्री का दर्जा दिए जाने पर दलील दी कि समाज का हर वर्ग विकास और जन कल्याण के काम से जुड़े इसलिए सभी को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

याचिका में आर्थिक बोझ बढ़ाने का दिया गया हवाला

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा पांच संतों को राज्यमंत्री का दर्जा देने का मामला हाई कोर्ट पहुंच गया। मामले को लेकर याचिका दायर हुई है। इसमें सरकार के कदम की असंवैधानिक बताया गया हैं। याचिका में दावा किया गया है कि प्रदेश की जनता पर पहले से 90 हजार करोड़ का कर्जा है। पांच संतों को राज्यमंत्री का दर्जा देकर सरकार जनता पर कर का बोझ और बढ़ा रही है।
आपको बता दें कि यह याचिका रामबहादुर वर्मा ने एडवोकेट गौतम गुप्ता के माध्यम से दायर की है। इसमें कहा है कि पहले से मंत्री परिषद गठित होने के बावजूद पांच संतों को राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया गया है। इससे प्रदेश की जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।

याचिकाकर्ता ने एक सर्वे के हवाले से बताया कि राज्य के हर नागरिक पर औसतन 14 हजार रुपए का कर्जा है। संतों को राज्यमंत्री का दर्जा देने के साथ ही उन्हें भत्ते व अन्य सुविधाएं भी मिलने लगेंगी। इसका आर्थिक बोझ प्रदेश की जनता पर ही आएगा।

याचिकाकर्ता ने यह पूछा है कि सरकार ने यह भी स्पष्ट नहीं किया है कि इन संतो को राज्यमंत्री का दर्जा देने के लिए किस आधार पर चयन किया गया है। याचिकाकर्ता ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि सरकार द्वारा जिन संतों को राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया है वो संत कुछ दिन पहले तक सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। एडवोकेट गुप्ता ने बताया कि याचिका पर इस सप्ताह के अंत तक सुनवाई होने की संभावना है।

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