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उत्पादन की खपत और किसानों की लागत को दोगुना करने के लिए जल्द योजना बनाएगी कमलनाथ सरकार 

किसानों को बढ़ते उत्पादन की खपत और उसका पूरा मूल्य दिलाने के लिए मप्र सरकार शीघ्र ही योजना बनाने जा रही है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस योजना में नाबार्ड से सहयोग करने को कहा है।

उत्पादन की खपत और किसानों की लागत को दोगुना करने के लिए जल्द योजना बनाएगी कमलनाथ सरकार 
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भोपाल। किसानों को बढ़ते उत्पादन की खपत और उसका पूरा मूल्य दिलाने के लिए मप्र सरकार शीघ्र ही योजना बनाने जा रही है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस योजना में नाबार्ड से सहयोग करने को कहा है। उन्होंने सहकािरता के क्षेत्र में किए जाने वाले नाबार्ड के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इससे सहकारिता को मजबूत करने में मदद मिल सकेगी। मुख्यमंत्री ने यह बात मंगलवार को मंत्रालय में नाबार्ड के प्रतिनिधि-मंडल से मुलाकात के दौरान कही।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने मप्र में उद्यानिकी, विशेषकर फूलों की खेती के क्षेत्र में बड़ी संभावनाएं हैं। नाबार्ड इन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने के साथ ही खाद्य प्र-संस्करण इकाइयों को बढ़ावा दे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बन रहे फूड पार्क में उत्पादित वस्तुओं की बेहतर मार्केटिंग की व्यवस्था में भी सहयोग देने को कहा जिससे किसानों को उनके उत्पादन का सही मूल्य मिल सके।

नाबार्ड ने की मप्र की सराहना-

नाबार्ड के सीजीएम सुनील कुमार बंसल ने सरकार की ओर से प्रदेश के सहकारी बैंकों और संबंधित संस्थाओं को 3000 करोड़ रूपए की अंशपूंजी देने की घोषणा की सराहना करते हुए कहा कि देश में सहकारिता को मजबूत करने के संबंध में किसी भी प्रदेश का यह पहला प्रयास है। बंसल ने बताया कि राज्य सरकार ने सहकारिता के क्षेत्र में जो कदम उठाए हैं, नाबार्ड उसमें पूरा सहयोग प्रदान करेगा।

25 हजार करोड़ रुपए की दी गई स्वीकृति-

वर्ष 2019-20 में नाबार्ड ने मप्र के लिए 25 हजार 560 करोड़ रूपए की योजना स्वीकृत की है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 5 हजार करोड़ रूपए ज्यादा है और पिछले सात वर्ष के दौरान दस गुना अधिक है। इस वित्तीय सहायता में 10 हजार 800 करोड़ रूपए नाबार्ड सहायतित विभिन्न निधियां हैं, जो ग्रामीण अधोसंरचना के विकास पर खर्च की जाएगी। राज्य सरकार के फेडरेशन को 4 हजार करोड़, दीर्घकालीन सिंचाई निधि में 2 हजार 100 करोड़ और डेयरी विकास के लिए 200 करोड़ रूपए दिए जाएंगे।

किसानों को फसली ऋण के लिए सहकारी क्षेत्र की संस्थाओं को 10 हजार 700 करोड़ रूपए पुनर्वित्त के रूप में उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदेश में किसान उत्पादक संघ, आदिवासी क्षेत्रों में बगीचा, वॉटर शेड, बुनकरों के लिए क्लस्टर निर्माण और इंडियन पोस्टल पेमेंट बैंक तथा एसबीआई के बीच नाबार्ड ने करार किया है। सहकारी बैंकों को तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि वे भुगतान की नई तकनीक से जुड़ सकें।

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