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शादी के वक्त छिपाए सीक्रेटस उलझा रहे रिश्ते की डोर, सच्चाई सामने आने पर हो रहे विवाद, परामर्श केन्द्र और कुटुंब न्यायालय में 08 माह में दर्जन भर से अधिक मामले

शादी का बंधन विश्वास की नींव पर टिका हुआ माना जाता हैए आपसी समझदारी एवं सामंजस्य से ही इस रिश्ते की गाडी आगे चलती है। लेकिन शादी के वक्त छिपाए गए डार्क सीक्रेटस इस रिश्ते की डोर को उलझा कर रख देते हैं।

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Punjab Haryana High Court wife says i want marry someone court said cruel

भोपाल। शादी का बंधन विश्वास की नींव पर टिका हुआ माना जाता हैए आपसी समझदारी एवं सामंजस्य से ही इस रिश्ते की गाडी आगे चलती है। लेकिन शादी के वक्त छिपाए गए डार्क सीक्रेटस इस रिश्ते की डोर को उलझा कर रख देते हैं। कई बार नौबत तलाक तक आ जाती है। ऐसे ही कई मामले इन दिनो परिवार परामर्श केन्द्र और कुटुंब न्यायालय की काउंसलर के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। दरअसलए इन दिनों काउंसलर के पास लगातार ऐसे मामले पहुंच रहे हैंए जिनमें पति या पत्नी ने अपना सेक्च्युअल ओरिएंटेशन या सेक्चुअल प्रकृति छिपाए रखी और शादी के बाद जब यह सच्चाई सामने आई तो उसने विवाद का रूप ले लिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार परामर्श केन्द्र और कुटुंब न्यायालय दोनों जगह बीते आठ माह में इस तरह के दर्जन भर से अधिक मामले पहुंचे हैंए जहां पति या पत्नी ने एक.दूसरे पर गे या बायोसेक्सुअल होने का आरोप लगाया है। काउंसलरों के मुताबिक इस तरह के मामले सामने आने पर अधिकांश लोग इसे स्वीकार नहीं करते वह तर्क देते हैं कि आप मेडिकल टेस्ट करा लोए हम पूरी तरह नार्मल हैं। यहां तक की सामने वाले पार्टनर पर आरोप.प्रत्यारोप शुरू कर देते हैं। जानाकारों की माने तो कानूनी मान्यता मिलने के बाद भी इस तरह के रिश्ते हमारे समाज में स्वीकार्य नहीं हैं। ऐसे में माता.पिता और समाज के दबाव में लड़का.लड़की शादी तो कर लेते हैंए लेकिन अपने पार्टनर के साथ रिश्ते में न्याय नहीं कर पाते। इसके बाद विवादित स्थितियां निर्मित होती हैं।

पार्टनर से छिपाना गलत

इस संबंध में काउंसलर मोहिब अहमद बताती हैं कि शादी के वक्त किसी भी तरह की बात अपने होने वाले पार्टनर से छिपाना गलत हैए खासकर सेक्च्युअल स्टेटस। वह कहती हैं। आप गे.लेस्बेयन हैं या फिर बायोसेक्च्युअलए यह शादी करने वाले लड़का.लड़की की जिम्मेदारी है कि वह इसे अपने होने वाले पार्टनर से न छिपाएए वर्ना बाद में सच सामने आने पर इसकी परिणीती तलाक के रूप में होती है और दोनों की जिंदगी प्रभावित होती है। वहीं सामान्य पति.पत्नी के विवाद की बात करें तो नवदंपती को इस बात का भी ख्याल रखना चाहिए कि उसका साथी उसके बीते हुए कल के बारे में सुनने अथवा समझने के लिए तैयार है कि नही। किसी भी बात को बताने का भी एक सही समय और तरीका होता हैं। अधिकतर मामलों में देखने में आता है कि पति या पत्नी किसी भी बात को बोलने में जल्दबाजी या देर कर देते हैं। जो विवाद का कारण बनता हैं और शादी के पहले दिन से दोनो के रिश्तों में दरार आने लगती हैं। एक बेहतर रिश्ते के लिए इन दोनो बातों में सामंजस होना बेहद जरूरी है।

पहला मामला रू बीते माह की शुरूआत में परामर्श केन्द्र पहुंचे मामले में पति ने शिकायत की थी कि उसकी पत्नी बायोसेच्युअल है। उसने पत्नी को अपनी सहेली के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखा था। हालांकिए वह अपने दो बच्चों की खातिर पत्नी को छोड़ने के लिए तैयार नहीं था। उसने गुहार लगाई थी कि शादी के वक्त से ही उसे पत्नी खुश नजर नहीं आती थी। हालांकिए वह विवाद के बाद भी मायके में रह रही पत्नी को वापस लाना चाहता है।

दूसरा मामला रू बीते हफ्ते कुटुंब न्यायालय पहुंचे मामले में एचआर मैनेजर पति के खिलाफ पत्नी ने आरोप लगाया है कि पति समलैंगिक प्रकृति का है। इनकी शादी को एक साल हो चुका है। पत्नी ने काउंसलर को बताया कि शादी के बाद जब पति उससे दूरी बनाए हुए था तो उसे शक था कि शायद पति का कहीं ओर अफेयर हैए लेकिन अब जब उसे पति के समलैंगिक होने की बात पता चल चुकी है तो वह तलाक चाहती है।

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