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फीस जमा नहीं कर पाए अभिभावक, स्कूल ने चौथी कक्षा के बच्चों का चरित्र खराब लिखकर थमा दी TC

मध्यप्रदेश पन्ना जिले के एक स्कूल ने कक्षा चौथी के बच्चों का चरित्र खराब है कहकर अभिभावकों को टीसी थमा दी। वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि बच्चों के माता पिता स्कूल की फीस जमा नहीं कर पा रहे थे और उन्होंने दूसरे सरकारी स्कूल में बच्चों का एडमिशन कराने के लिए उनकी टीसी मांगी थी।

फीस जमा नहीं कर पाए अभिभावक, स्कूल ने चौथी कक्षा के बच्चों का चरित्र खराब लिखकर थमा दी TC

मध्यप्रदेश पन्ना जिले के एक स्कूल ने कक्षा चौथी के बच्चों का चरित्र खराब है कहकर अभिभावकों को टीसी थमा दी। वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि बच्चों के माता पिता स्कूल की फीस जमा नहीं कर पा रहे थे और उन्होंने दूसरे सरकारी स्कूल में बच्चों का एडमिशन कराने के लिए उनकी टीसी मांगी थी। प्रबंधन ने टीसी तो दे दी लेकिन उस पर लिख दिया बच्चों का चरित्र खराब है। अब यह समझ से परे है कि इतने छोटे बच्चों का चरित्र कैसे खराब हो सकता है। मामला पन्ना के प्राइवेट स्कूल ज्ञानंजली का है।

हर माता पिता की तरह इस गरीब परिवार के माता पिता ने भी अपने बच्चों को अंग्रेजी स्कूल में तालिम देनी चाही थी। इसके लिए उन्होंने बीपीएल कार्ड के जरिए अपने जुड़वा बच्चों का दाखिला ज्ञानंजली स्कूल में करा तो दिया।

इसके बावजूद स्कूल प्रबंधन अभिभावक पर दबाव बनाकर 100 रुपये प्रतिमाह फीस ले रहा था। जिससे परेशान होकर माता पिता ने बच्चों का स्कूल से नाम कटवाकर सरकार स्कूल में प्रवेश कराना चाहा। इसके लिए अभिभावक टीसी लेेने स्कूल गए लेकिन स्कूल प्रबंधन टीसी से साफ मना कर दिया।


जब बच्चों के अभिभावक नहीं माने तो प्रबंधन गरीब माता पिता को पहले तो धमकाया और बाद में टीसी काटकर उन्हें थमा दी। लेकिन प्रबंधन टीसी में यह लिख दिया की दोनों बच्चों का चरित्र खराब है।

इतना ही नहीं अभिभावक के व्यवहार को भी टीसी पर लिख दिया खराब है। जो बड़े ही सोचने वाली बात है कि कक्षा 4 में पढ़ने वाले बच्चे आखिर उनका चरित्र कैसे खराब हो सकता। जिन्हें अभी अच्छे बुरे तक का फर्क मालूम नहीं है।

साथ ही स्कूल प्रबंधन को इतना ही मालूम नही है कि टीसी (स्थांतरण प्रमाण पत्र) पर किसी अभिभावक के व्यवहार के विषय में खराब जैसे शब्द इस्तेमाल करना कहा तक जायज हैं.... औऱ क्या शिक्षा विभाग में इस प्रकार का कोई नियम है।

इस बारे में जब पन्ना कलेक्टर से बात की गई तो उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच कराने की बात कही और संबंधित स्कूल पर करवाई करने को कहा। प्रदेश सरकार बीपीएल धारकों को बीपीएल कार्ड के माध्यम से निःशुल्क शिक्षा मुहैया कराने की बात कहती है लेकिन प्राइवेट स्कूलों की मनमानी से शासकीय सुविधाओं का लाभ गरीब लोगों तक कैसे पहुंचता होगा।

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