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स्कूल शिक्षा विभाग की तबादला नीति में होगा संशोधन, अब ऑनलाइन की बजाए ऑफ लाइन लिए जाएंगे आवेदन

राज्य शासन स्कूल शिक्षा विभाग की तबादला नीति में परिवर्तन करने जा रही है। अभी महज अध्यापक संवर्ग के तबादले ऑनलाइन आवेनद के आधार पर लिए गए थे। जबकि सहायक शिक्षक, शिक्षक व प्रचार्यो के ताबदले ऑफ लाइन आवेदन के आधार पर हुए थे।

स्कूल शिक्षा विभाग की तबादला नीति में होगा संशोधन, अब ऑनलाइन की बजाए ऑफ लाइन लिए जाएंगे आवेदन
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भोपाल। राज्य शासन स्कूल शिक्षा विभाग की तबादला नीति में परिवर्तन करने जा रही है। अभी महज अध्यापक संवर्ग के तबादले ऑनलाइन आवेनद के आधार पर लिए गए थे। जबकि सहायक शिक्षक, शिक्षक व प्रचार्यो के ताबदले ऑफ लाइन आवेदन के आधार पर हुए थे। किंतु, इस बार ऐसा नहीं होगा। सरकार ऑनलाइन की प्रक्रिया को समाप्त कर उसे ऑफ लाइन आवेदन के आधार पर करने का निर्णय करने जा रही है।

ऐसा क्यों? शिक्षकों की नाराजगी करनी है दूर

दरअसल, नई सरकार में अभी भी पुराने नियमों के आधार पर ही तबादले हो रहे हैं। सभी विभागों के लिए तबादले का नियम सामन्य प्रशासन विभाग जारी करता है, किंतु स्कूल शिक्षा विभाग में तबादले विभागीय नियमों के आधार पर होते हैं। ऐसे में तमाम दिक्कतों को देखते हुए तबादला प्रक्रिया में संशोधन करने का निर्णय होने जा रहा है। ऑफ लाइन आवेदन के आधार पर तबादला करने के पीछे का तर्क यह दिया गया है कि तबादले के लिए बड़ी संख्या में शिक्षक जनप्रतिनिधियों के पास आते हैं। ऑनलाइन तबादला नीति होने की वजह से वे ताबदला नहीं करा पाते। इससे शिक्षकों में नाराजगी होती है।

पहले जिसकी पहुंच ज्यादा होती थी वह अपना करा लेता था तबादला

पूर्ववर्ती सरकार में अध्यापक संवर्ग के तबादले को ऑनलाइन आवेदन के आधार पर करने का​ निर्णय लिया था। उस वक्त तर्क यह दिया गया था कि चूंकि तबादले में एक समानांतर नीति काम करने लगती है। यानी जिसकी पहुंच ज्यादा होगी, वह मनमुताबिक तबादला करा लेता था। ऑनलाइन तबादले में आवेदन के आॅप्शन दिए गए थे। उसमें स्थान की रिक्तता व गुझा दोष के आधार पर तबादले की प्रक्रिया पूरी कराई जाती थी कांग्रेस सरकार के ज्यादातर मंत्री इस पक्ष में नहीं है। वे चाहते हैं कि शिक्षकों के तबादले में जनप्रतिनि​धियों, विधायकों को तवज्जो मिलनी चाहिए।

अभी संविलियन की प्रक्रिया भी पूरी नहीं

ऑनलाइन तबादला नीति में सबसे बड़ी बाधा अध्यापक संवर्ग का स्कूल शिक्षा विभाग में होने वाले संविलियन में देरी भी है। अभी भी बड़ी संख्या में अध्यापक संवर्ग का संविलियन स्कूल शिक्षा विभाग में नहीं पाया है। कई तकनीकी कारणों, मसलन जिस निकाय या जिला व जनपद पंचायत में नियुक्ति हुई है, वहां से काफी अध्यापकों का रिकॉर्ड नहीं आ पाया है। रिकॉर्ड दुरूस्त नहीं होने की वजह से काफी संख्या में अध्यपाकों का संविलियन नहीं हो पाया। अब ऑनलाइन तबादले में इसे लेकर खासी समस्या आएगी। इसे देखते हुए तबादला नीति में संशोधन किया जाना प्रस्तावित है।

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