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मध्यप्रदेश समाचार : मनोर गांव में विधवा महिलाओं की भरमार, 50 साल से ज्यादा नहीं जीते यहां पुरुष

बुंदेलखंड का पन्ना जिला मध्यप्रदेश के सबसे पिछड़े जिलों में से एक है। यहां बेरोजगारी भुखमरी चरम सीमा पर है। आज हम आपको पन्ना जिले के ग्राम मनोर के ​गुड़ियाने मोहल्ले की ऐसी तस्वीर दिखाते हैं जहां विधवा महिलाओं की संख्या सबसे अधिक है।

मध्यप्रदेश समाचार : मनोर गांव में विधवा महिलाओं की भरमार, 50 साल से ज्यादा नहीं जीते यहां पुरुष
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कादिर खान, भोपाल। बुंदेलखंड का पन्ना जिला मध्यप्रदेश के सबसे पिछड़े जिलों में से एक है। यहां बेरोजगारी भुखमरी चरम सीमा पर है। आज हम आपको पन्ना जिले के ग्राम मनोर के ​गुड़ियाने मोहल्ले की ऐसी तस्वीर दिखाते हैं जहां विधवा महिलाओं की संख्या सबसे अधिक है।
यहां विधवा महिलाओं की संख्या होने की सबसे बड़ी वजह यह है कि इनके परिवार के मुखिया पत्थर खदानों में काम करते हैं और पत्थर खदानों से निकलने वाली सिलका डस्ट से यह असमय काल के गाल में समा जाते हैं और इलाज ना मिलने के कारण दम तोड़ देते हैं। इस गांव में 60 से 65 फ़ीसदी महिलाएं विधवा हैं जिनकी उम्र 32 से लेकर 60 तक है इनके बच्चे बाल मजदूरी करते हैं और ना ही उन्हें शासन की योजनाओं का लाभ मिला है। न ही वह स्कूल जाते है।
गांव के तकरीबन 40 फीसदी पुरुष इस खतरनाक बीमारी की चपेट में हैं। पुरुषों के असमय काल कवलित होने के कारण इस अभागे गांव में विधवा महिलाओं की भरमार है। गांव में कई महिलायें तो ऐसी भी हैं, जिनका 30-35 वर्ष की उम्र में ही सुहाग उजड़ गया, ऐसी स्थिति में बच्चों व परिवार के भरण पोषण का भार उन्हीं के ऊपर है।
खेती-किसानी न होने तथा रोजी-रोजगार के अभाव में गांव के आदिवासियों का एकमात्र सहारा जंगल है। आदिवासी महिलायें जंगल से जलाऊ लकड़ी लाती हैं। जिसे 7 किमी. दूर पन्ना ले जाकर बेचतीं हैं। लकड़ी बेंचने से जो भी पैसा मिलता है उसी से पूरे परिवार का भरण पोषण होता है।
गांव के कुछ युवक जो पत्थर खदानों में काम नहीं करते वे काम की तलाश में महानगरों की तरफ पलायन कर जाते हैं। ऐसी स्थिति में शारीरिक रूप से अक्षम व मेहनत मजदूरी करने में असमर्थ पुरुष ही गांव में रहते हैं, जबकि महिलायें पूरे दिन मेहनत करती हैं। वजह है कि पुरुषों के मुकाबले वे अधिक वर्षों तक जीवित रहती हैं।
गुडियाना गांव के पुरुष
पत्थर की खदानों में काम करते रहे हैं, उनकी आजीविका का यह साधन ही उनके लिए अभिशाप साबित हुआ है। पत्थर की खदानों में 5-10 साल तक लगातार काम करने वाले पुरुष जानलेवा बीमारी सिलीकोसिस के शिकार हो गये हैं। जिसके चलते उनकी कार्यक्षमता जहां पूरी तरह से खत्म हो गई है। वहीं वे धीरे-धीरे मौत की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
यही वजह है कि मनौर गुडियाना गांव में विधवा महिलाओं की संख्या तुलनात्मक रूप से बहुत अधिक है। ग्रामीणों के मुताबिक मौजूदा समय इस छोटे से गांव में सबसे अधिक महिलायें विधवा हैं।
गांव में स्कूल लेकिन बच्चे नहीं जाते पढऩे
जानलेवा सिलीकोसिस की बीमारी का प्रकोप अकेले मनौर गुडयाना में नहीं अपितु पन्ना जिले के उन सभी इलाकों में है जहां पत्थर की खदानें चलती हैं। इस पूरे मामले में जिले के आला अधिकारी अपना पल्ला झाड़ने में लगे हैं।

जल्द कराएंगे सर्वे
इस मामले में अधिकारियों का कहना है कि हमें आपके द्वारा पता चला है हम उस क्षेत्र का सर्वे करवा रहे हैं और जल्द ही अगर ऐसा है तो उस गांव में माकूल प्रबंध शासन की योजनाओं का प्रचार प्रसार कर उनको लाभ दिया जाएगा। -भरत सिंह राजपूत, महिला बाल विकास अधिकारी पन्ना

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