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नक्सली मुठभेड़ में शहीद जवान हरीश का पार्थिव देह पहुंचा उनके घर, एक महीने की छुट्टी मनाकर हफ्ते भर पहले ही लौटा था जवान

छत्तीसगढ़ में नक्सली हमले में शहीद हुए हवलदार हरीश चंद्र पाल का पार्थिव देह आज अमरकंटक एक्सप्रेस भोपाल स्थित उनके घर लाया गया। जैसे ही शहीद का पा​र्थिव देह उनके निवास पर पहुंचा उनके अंतिम दर्शन के लिए जन सैलाब उमड़ पड़ा।

नक्सली मुठभेड़ में शहीद जवान हरीश का पार्थिव देह पहुंचा उनके घर, एक महीने की छुट्टी मनाकर हफ्ते भर पहले ही लौटा था जवान
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सोहन सिंह, भोपाल। छत्तीसगढ़ में नक्सली हमले में शहीद हुए हवलदार हरीश चंद्र पाल का पार्थिव देह आज अमरकंटक एक्सप्रेस भोपाल स्थित उनके घर लाया गया। जैसे ही शहीद का पा​र्थिव देह उनके निवास पर पहुंचा उनके अंतिम दर्शन के लिए जन सैलाब उमड़ पड़ा।

शाहिद के घर पहुंची विधायक कृष्णा गौर और संसद आलोक संजर। सीआरपीएफ आईजी मध्यप्रदेश सेक्टर पीके पांडे और डीआईजी विजय कुमार एसपी दीपक सक्सेना मौजूद।
शुक्रवार को अवधपुरी पुलिस ने परिजनों को हवलदार हरीश चंद्र के शहीद होने की सूचना दी गई तब से ही उनकी मां और पत्नी को रो रो कर बुरा हाल है। हरीश चंद्र के शहीद होने की खबर घर पहुंची उस समय पत्नी आफिस और बेटी स्कूल गई हुई थी। हरीश चंद्र एक हफ्ते पहले ही एक महीने की छुट्टी पूरी करके भोपाल से छत्तीसगढ़ पहुंचे थे।

दो दिन पहले ही छोटे भाई से हुई थी बात
शहीद हरीश के भाई चंद्र पाल ने बताया उनकी दो दिन पहले ही आखरी बार हरीश से बात हुई थी। उसने कहा था मां के इलाज में पैसों की कोई कमी नहीं आनी चाहिए। मैं पैसे भेजता रहूंगा। दोनों भाई मां की आर्थिक मदद करते थे, जबकि सबसे बड़े भाई मां के साथ रहकर उनकी देखभाल करते हैं। मां को पिछले साल लकवा मार गया था।
सीआरपीएफ में हवलदार हरीश चंद्र पाल की पत्नी लक्ष्मी पाल और 12 साल की बेटी शलेषा पाल योजना नगर, अवधपुरी में रहती हैं। बेटी जवाहरलाल नेहरू स्कूल में सातवीं की छात्रा है, जबकि पत्नी बीएचईएल महिला कल्याण समिति में सर्विस करती हैं।

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