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सीबीआई से क्लीन चिट मिलने पर बोले सीएम शिवराज, जानें क्या है व्यापमं घोटाला

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Nov 1 2017 1:27PM IST
सीबीआई से क्लीन चिट मिलने पर बोले सीएम शिवराज, जानें क्या है व्यापमं घोटाला

मध्य प्रदेश के सबसे चर्चित व्यापमं मामले में सीबीआई ने सीएम शिवराज सिंह चौहान को क्लीन चिट दे दी है। इस मामले में सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की थी। 

क्लीन चिट मिलने के बाद शिवराज ने कहा कि हम क्लीन थे तो चिट तो मिलनी ही थी, सच समने आना ही था। 

जानकारी के लिए बता दें कि इस मामले में सीबीआई ने हार्ड डिस्क वाले मामले में शिवराज का कोई जिक्र नहीं है और उन्हें क्लीन चिट दे दी। 

जिसको लेकर विपक्ष ने सीबीआई की मंशा पर कई सवाल खड़े किए हैं और साथ ही सीएम को आजाद होने पर विपक्ष बौखलाया हुआ है। 

सीबीआई कोर्ट ने कहा कि मध्य प्रदेश व्यवसायिक परीक्षा मंडल के एक अधिकारी नितिन महिंद्रा से बरामद हार्ड डिस्क ड्राइव के मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा कराए गए फारेंसिक विश्लेषण से स्पष्ट हुआ है कि उनमें कोई ऐसी फाइल नहीं स्टोर थी जिसमें 'सीएम' अक्षर थे।

क्या है व्यापमं घोटाला

व्यापमं भर्ती घोटाला मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा भर्ती घोटाला माना जाता है, इस घोटाले कई बड़े नाम सामने आए जिनमें कुछ लोग तो सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं। खुद हाईकोर्ट इस मामले की जांच पुलिस की स्पेशल इनवेस्टीगेशन टीम से करवा रही है। 

दरअसल मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल का काम मेडिकल टेस्ट जैसे पीएमटी प्रवेश परीक्षा, इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा व शैक्षिक स्तर पर बेरोजगार युवकों के लिए भर्ती के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन कराना है।

कैसे आया सामने

इस घोटाले में सरकारी नौकरी में 1000 फर्जी भर्तियां और मेडिकल कॉलेज में 514 फर्जी भर्तियों का शक था। खुद सीएम शिवराज सिंह विधानसभा में स्वीकार कर चुके हैं कि 1000 फर्जी भर्तियां की गईं। व्यापमं घोटाले का खुलासा 2013 में तब हुआ, जब पुलिस ने एमबीबीएस की भर्ती परीक्षा में बैठे कुछ फर्जी छात्रों को गिरफ्तार किया। 

उसके बाद ये मामला बढ़ता चला गया। प्रदेश में सालों से एक बड़ा रैकेट चल रहा है, जो फर्जीवाड़ा कर छात्रों को एमबीबीएस में इसी तरह एडमिशन दिलाता है। छात्रों से पूछताछ के दौरान डॉ. जगदीश सागर का नाम सामने आया था। जिसके बाद जांच शुरू हो गई। 

सागर से पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह इतना बड़ा नेटवर्क है, जिसमें मंत्री से लेकर अधिकारी और दलालों का पूरा गिरोह काम कर रहा है। पूछताछ में यह सामने आया कि व्यावसायिक परीक्षा मंडल यानी व्यापमं का ऑफिस इस काले धंधे का अहम अड्डा था। जिसके बाद ये मामला सीबीआई को दे दिया गया। 

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