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मध्यप्रदेश चुनाव 2018ः कांटे की टक्कर में फंसी ये चार विधानसभा सीटें

बुंदेलखंड के सागर जिले में सर्वाधिक 8 विधानसभा सीटें हैं। इनमें गोपाल भार्गव एवं भूपेंद्र सिंह के कारण चर्चित रहली एवं खुरई को छोड़ दें तो शेष 6 सीटों की स्थिति भी साफ नहीं है। हर सीट किसी ने किसी वजह से उलझी है और कांटे के हालात बने हुए हैं।

मध्यप्रदेश चुनाव 2018ः कांटे की टक्कर में फंसी ये चार विधानसभा सीटें
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बुंदेलखंड के सागर जिले में सर्वाधिक 8 विधानसभा सीटें हैं। इनमें गोपाल भार्गव एवं भूपेंद्र सिंह के कारण चर्चित रहली एवं खुरई को छोड़ दें तो शेष 6 सीटों की स्थिति भी साफ नहीं है। हर सीट किसी ने किसी वजह से उलझी है और कांटे के हालात बने हुए हैं।

आखिरी समय में भाजपा विधायकों सागर में शैलेंद्र जैन एवं नरयावली में प्रदीप लारिया ने अपनी स्थिति सुधारी है फिर भी कोई यह दावा करने की स्थिति में नहीं है कि ये जीत ही जाएंगे।

इसी प्रकार सुरखी में कांग्रेस के पूर्व विधायक गोविंद सिंह राजपूत को भाजपा की मौजूदा विधायक पारुल साहू का टिकट कटने से पैदा नाराजगी का लाभ मिलता तो दिख रहा है पर वहां भी सांसद पुत्र सुधीर यादव उन्हें कड़ी टक्कर देते नजर आ रहे हैं।

तीसरी ताकत ने बिगाड़े समीकरण
सागर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा विधायक शैलेंद्र जैन की हालत खराब बताई जा रही थी पर पार्टी ने उन पर भरोसा किया और कांग्रेस ने बिलकुल नए चेहरे नेमी जैन पर। यहां अंकलेश्वर दुबे निर्दलीय तौर पर मैदान में डटे हैं तो महापौर के चुनाव में अच्छे वोट पाने वाले जगदीश यादव साइकल पर सवार हैं।
बसपा ने संतोष प्रजापति को अपना प्रत्याशी बना रखा है। तीसरी ताकत के तौर पर मौजूद प्रत्याशियों में से कौन किसे नुकसान पहुंचा रहा है, यह किसी की समझ में नहीं आ रहा। कह सकते हैं कि इनकी वजह से भाजपा-कांग्रेस के समीकरण बिगड़ गए हैं और मुकाबला कांटे का बना हुआ है।
प्रदीप, हरवंश कड़े मुकाबले में
सागर जिले की नरयावली में भाजपा विधायक प्रदीप लारिया एवं बंडा में विधायक हरवंश सिंह को कांग्रेस प्रत्याशियों सुरेंद्र चौधरी एवं तरवर सिंह लोधी से कड़ी टक्कर मिल रही है। नरयावली में कांग्रेस के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष सुरेंद्र चौधरी मैदान में हैं।
कांग्रेस के प्रदेश प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया ने तो उन्हें पार्टी की सरकार बनने पर उप मुख्यमंत्री तक बनाने का ऐलान कर दिया था। बंडा में हरवंश सिंह को अपने पिता हरनाम सिंह राठौर के नाम का लाभ मिलता है लेकिन इस बार वहां का लोधी मतदाता कांग्रेस के तरवर सिंह लोधी की ओर लामबंद होता दिख रहा है।
यह समाज कभी राठौर परिवार का परंपरागत वोट हुआ करता था। इसकी वजह से यहां भी कड़े मुकाबले के आसार हैं।
भितरघात नहीं रोक पाए सांसद पुत्र
भाजपा ने सुरखी विधानसभा क्षेत्र में विधायक पारुल साहू का टिकट काटकर क्षेत्र के सांसद लक्ष्मीनारायण के पुत्र सुधीर यादव को मैदान में उतारा है। कांग्रेस के गोविंद सिंह राजपूत यहां के स्थापित नेता पहले से हैं। पिछला चुनाव वे दो सौ से भी कम वोटों से हारे थे।
दूसरी तरफ पारुल साहू का टिकट कटने से उनके समर्थकों में नाराजगी है। इस नाराजगी की वजह से जो भितरघात हुआ भाजपा प्रत्याशी सुधीर यादव उसे रोक नहीं पाए। इसका नुकसान उन्हें उठाना पड़ सकता है। दूसरा, चुनाव भी भाजपा की अपेक्षा कांग्रेस ने बेहतर तरीके से लड़ा है।
देवरी, बीना में मौजूदा विधायक खतरे में
सागर के बीना एवं देवरी ऐसे विधानसभा क्षेत्र हैं जहां भाजपा और कांग्रेस में सीधा मुकाबला है। बीना में भाजपा विधायक महेश राय का मुकाबला कांग्रेस के शशिकुमार कैथोरिया से है। यहां महेश राय एंटी-इंकम्बैंसी के शिकार होते दिख रहे हैं।
खबर है कि उन्हें शशि कैथोरिया से कड़ी टक्कर मिल रही है। दूसरी तरफ देवरी में कांग्रेस विधायक हर्ष यादव की राह इस बार आसान नहीं है। यादव के मुकाबले भाजपा ने यहां नए चेहरे तेजी सिंह लोधी को टिकट दिया है।
क्षेत्र में लोधी समाज के मतदाताओं की बहुतायत है और वे तेजी सिंह के पक्ष में लामबंद होते दिख रहे हैं। लिहाजा, यहां भी मुकाबला कांटे का है।

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