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मध्य प्रदेश चुनाव / गैरों से ज्यादा अपनों का डर, इन 15 सीटों पर कांग्रेस वर्सेज बागियों में होगी जंग

14 साल से वनवास काट रही कांग्रेस को इस बार सत्ता मे वापस आना प्रतिष्ठा का प्रशन बन गया है, लेकिन कांग्रेस को अभी भी गैरों से ज्यादा अपनों का खतरा सता रहा है।

मध्य प्रदेश चुनाव / गैरों से ज्यादा अपनों का डर, इन 15 सीटों पर कांग्रेस वर्सेज बागियों में होगी जंग
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मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 के लिए 28 नवंबर 2018 को मतदान होगा लेकिन 14 साल से वनवास काट रही कांग्रेस को इस बार सत्ता मे वापस आना प्रतिष्ठा का प्रशन बन गया है, लेकिन कांग्रेस को अभी भी गैरों से ज्यादा अपनों का खतरा सता रहा है।

क्योंकि प्रदेश की 27 सीटें ऐसी है, जहां कांग्रेस वर्सेस बागी कांग्रेस की लड़ाई जारी है। यानि कि 15 सीटों पर कांग्रेस के प्रत्याशियों के सामने कांग्रेस पार्टी से बागी हुए नेता खड़े है। जो प्रत्याशियों को गणित बिगाड़ रहे है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस को सबसे ज्यादा परेशानी मालवा-निमाड़ और ग्वालियर-चंबल संभाग क्षेत्र में झेलने पड़ रही है। यहां भाजपा तो हावी है ही, लेकिन इसके साथ-साथ तीसरा मोर्चा और एससी-एसटी एक्ट का विरोध भी हावी है। वहीं दो दर्जन तो ऐसे प्रत्याशी है जो सीधे तौर पर पार्टी प्रत्याशियों को चुनौती दे रहे है।

बागियों को क्यों मिल रही ताकत

कांग्रेस पार्टी से बागी हुए नेताओं को ताकत मिलने के कई कारण है। पहला तो जातिवाद और दूसरा क्षेत्र में फैली एंटी इनकंबेंसी है। यहीं कारण है कि इन क्षेत्रों में दोनों ही भाजपा-कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने दौरे और रैलियां और सभाएं की है।

ये सीटें बनी कांग्रेस के लिए सिरदर्द

खरगोन: भगवानपुरा सीट से विजय सिंह सोलंकी के सामने केदार डाबर बागी बनकर चुनौती दे रहे हैं। डाबर के पिता चिड़ाभाई चार बार विधायक रहे हैं। इसलिए उनकी क्षेत्र में अच्छी खासी पैठ है।

बड़वानी: रमेश पटेल के सामने बागी राजेंद्र मंडलोई निर्दलीय खड़े हैं। भाजपा ने प्रेम सिंह पटेल को उतारा है, जो रमेश के चाचा हैं।

पंधाना: यहां छाया मोरे के सामने बागी रूपाली बारे निर्दलीय लड़ रही हैं। मोरे पंधाना की नहीं हैं, इसलिए यहां उनका विरोध है। वहीं बारे के पिता यहां से दो बार चुनाव लड़े, इसलिए उनका जनसंपर्क अच्छा है।

बुरहानपुर: बागी सुरेंद्र सिंह उर्फ शेरा मैदान में हैं। वे रवींद्र महाराज को चुनौती दे रहे हैं। शेरा के दो भाई शिवकुमार और महेंद्र सिंह सांसद रह चुके हैं, इसलिए महाजन के खिलाफ असंतोष है।

इंदौर-5 : सत्यनारायण पटेल के सामने पार्टी के मजबूत नेता छोटे यादव निर्दलीय उतरे हैं। वे पटेल को बाहरी कहकर विरोध कर रहे हैं।

भोपाल मध्य :
कांग्रेस से बागी रईस बबलू सपा से उतरे हैं। उनकी दावेदारी ने आरिफ मसूद का गणित बिगाड़ा है।

जावरा : जिला पंचायत उपाध्यक्ष रहे किसान नेता डीपी धाकड़ निर्दलीय उतरे हैं। पार्टी ने केके सिंह को टिकट दिया है। जो कि महेंद्र सिंह कालूखेड़ा के भाई हैं।

उज्जैन दक्षिण : प्रत्याशी राजेंद्र वशिष्ठ के सामने पार्टी के लिए जय सिंह दरबार निर्दलीय मैदान में हैं।

जावद : समंदर पटेल निर्दलीय हैं, वे कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमार अहीर को चुनौती दे रहे हैं। पटेल का नाम अंतिम समय में कटा, इसलिए वे विरोध में उतरे।

ग्वालियर ग्रामीण : साहिब सिंह गुर्जर जो जिला पंचायत के सदस्य हैं, गुर्जर बाहुल्य इस सीट से वे कांग्रेस से टिकट न मिलने के कारण बसपा से चुनाव लड़ रहे हैं।

चंदेरी : भाजपा से पूर्व विधायक रहे राजकुमार सिंह यादव के बसपा से चुनाव लड़ने के कारण कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों का चुनावी गणित बिगड़ गया है। कांग्रस के वर्तमान विधायक गोपाल सिंह चौहान को टिकट मिला है, जो पार्टी में अंतर्विरोध को झेल रहे हैं।

सेवढ़ा : कांग्रेस से बागी हुए दामोदर सिंह यादव केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाह के दल से चुनाव लड़ रहे हैं।

महाराजपुर : राजेश मेहतो कांग्रेस के पुराने नेता हैं। टिकट न मिलने से वे बसपा से चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस ने नए चेहरे नीरज दीक्षित को चुनौती दे रहे हैं।

राजनगर :
कांग्रेस के बागी नितिन चतुवेर्दी सपा से मैदान में हैं। यहां से उनके पिता कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पुत्र की फील्डिंग में लगे है। इस वजह से कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया है।

पथरिया :
युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष अनुरागवर्धन हजारी टिकट न मिलने से सपा से चुनाव लड़ रहे हैं। यहां से कांग्रेस गौरव परटले को टिकट दिया है। यहां से भाजपा से बागी हुए पूर्व मंत्री रामकृष्ण कुसमारिया मैदान में है।

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