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मृत पिता को जीवित करने झाड़ फूंक, एडीजी बोले...उनमें तो 14 जनवरी को ही प्राण लौट आए थे

पढ़े लिखे तबके में कितने गहरे तक अंधविश्वास है। यह दहलादेने वाली घटना इसका उदाहरण है। भारतीय पुलिस सेवा में 1987 बैच के आईपीएस राजेंद्र कुमार मिश्रा पर आरोप है ​कि वे अपने पिता, जिन्हें चिकित्सकों ने एक महीने पहले मृत घोषित कर दिया था, उनका अपने सरकारी बंगले पर इलाज करा रहे हैं।

मृत पिता को जीवित करने झाड़ फूंक, एडीजी बोले...उनमें तो 14 जनवरी को ही प्राण लौट आए थे
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भोपाल। पढ़े लिखे तबके में कितने गहरे तक अंधविश्वास है। यह दहलादेने वाली घटना इसका उदाहरण है। भारतीय पुलिस सेवा में 1987 बैच के आईपीएस राजेंद्र कुमार मिश्रा पर आरोप है ​कि वे अपने पिता, जिन्हें चिकित्सकों ने एक महीने पहले मृत घोषित कर दिया था, उनका अपने सरकारी बंगले पर इलाज करा रहे हैं।
यानी, कथित तौर पर तंत्र-मंत्र करके उनको जीवित करने की कोशिश में लगे हैं। हालांकि, उन्होंने इस आरेप का खंडन करते हुए कहा कि वे पिता को अस्पताल से घर लेकर आए थे, लेकिन पिता के प्राण वापस आ गए थे। अब आयुर्वेद पद्धित से पिता का इलाज करा रहे हैं। बंगले में एडीजी के भाई भी हैं। इस खबर के बाहर आने से सारा पुलिस महकमा सन्न है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रवि सक्सेना का कहना है कि पुलिस को पिता की बॉडी रिकवर करके उनकी बाकायदा अंत्येष्टि करवानी चाहिए। सक्सेना ने कहा कि यह मामला बेहतद गंभीर है। इस मामले में डीजीपी वीके सिंह को संज्ञान में लेना चाहिए। उनहें कोई शक है तो मेडिकल पुष्टि करनके के ाबद उचित निर्णय लेना चाहिए।
मेडिको लीगल एक्सपर्ट बोेले..बदबू तो रोकी नहीं जा सकती
मेडिको लीगल के एक्सपर्ट डॉ. अशोक शर्मा ने बताया कि मृत्यु के दो दिन बाद ही शरीर डिकम्पोज्ड होने लगता है। दुर्गंध को रोका नहीं जा सकता, लेकिन अब बाजार में निजी मरचुरी उपलब्ध होने लगे हैं। हालांकि, मरचुरी में भी बैक्टीरिया फंक्शन करते हैं पूरी तरह से बदबू नहीं रोकी जा सकती। कई बार लोगों की तंत्र विद्या में आस्था होती है। उन्होंने शाजापुर में हुआ ऐसाही किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि परिवार मानने को तैयार नहीं था। इसलिए उनहोंनं चारबजे तक का मौका दिया लेकिन, वह ओझा कृत शरीर में जान नहीं ला सका।

कैसे सामने आया यह मामला?
मिश्रा के बंगले पर एसएएफ के दो जवान ड्यूटी पर लगाए गए थे यह जवान पिता की देख—रेख में लगे हुए थे, लेकिन वे बदबू के चलते संक्रमण का शिकार होकर बीमार हो गए। इसके बाद वे वापस बंगले नहीं पहुंचे। उन्हें जबरिया भेजने की कोशिश की गई तो यह मामला सामने आया। राज खुलने के बाद जवानों ने यह कहानी अपने दूसरी साथियों को बताई। फिर दूसरे कर्मचारीभी ड्यूटी में जाने से कतराने लगा। बात कर्मचारियों से होते हुए मीडिया के पास पहुंच गई।

एडीजी मिश्रा का दावा
हां, बंसल वालों ने डैथ सर्टिफिकेट जारी किया था। पर घर में पिता के प्राण वापस आ बए। अब पिता की हालत ​क्रिटिकल है। बंसल वालों ने अलग लाइन पर इलाज किया। ऐसी हालत में मैं उन्हें दिल्ली नहीं ले जा सकता हूं। आयुर्वेद से इलाज करवा रहा हूं। हालांकि, उन्होंने किसी को भी पिता को दिखाने से इंकार कर दिया। उनका कहना था ​कि ये व्यक्तिगत मामला है। मीडिया को इसमें दखल नहीं देना चाहिए।

शव​ वाहन को यह कहकर वापस​ किया कि पिता जीवित हो गए हैं
14 जनवरी को उनके पिता की मृत्यु की सूचना मुख्यालय के दूसरे अफसरों को भी लगी थी। जिसके बाद कुछ अफसर बंगले पर भी पहुंचे थे। भोपाल पुलिस लाइन से शव वाहन भी बंसल हॉस्पिटल पहुंचा, उस वाहन में एडीजी के पिता के शव को बंगले तक ले जाया गया। बंगले पहुंचने के बाद उनके घर की महिलाएं पिता से लिपटकर रोने लगीं, तभी उनके शरीर में प्राण में आ गए, ऐसा दावा किया जा रहा है। एडीजी ने शव वाहन को यह कहकर वापस भेज दिया कि​ पिता के प्राण वापस आ गए हैं।

यह उनके परिवार का मामला, हम क्यों दखल दें: एसपी
एसपी साउथ संपत उपाध्याय को जब एडीजी के घर पर पिता का शव होने की जानकारी दी गई। तो उन्होंने कहा हमारे पासऐसे कोई पुख्ता सबूत नीं है। हम किसी के घर में छानबीन नहीं कर सकते। स्वाभाविकि मौत है या नहीं, यह उनके परिवार का मामला है।
डॉ. मल्होत्रा का दावा.. 13 को बंसल में भर्ती किया, 14 को मौत
पुलिस मुख्यालय में चयन शाखा के एडीजी राजेंद्र कुमार मिश्रा मूलत: भूवनेश्वर के रहने वाले हैं। वे अपने आवास में पिता कालूमनि मिश्रा का इलाज करा रहे थे। तबीयत ज्यादा खराब होने पर वे उनको 13 जनवरी को बंसल लेकर पहुंचे थे। यहां डा. अश्विनी मल्होत्रा ने उनका इलाज किया था। उन्हें मल्टीपल डिसीज थी। अगले दिन यानी 14 जनवरी को पौने तीन बजे उनका निधन हो गया था। इस संबंध में डैथ सर्टिफिकेट भी जारी किया गया था। शव को बंगले में मरचुरी वाहन से पहुंचाया गया था। बंसल के मैनेजर लोकेश झा ने भी बताया कि हां, डैथ सर्टिफिकेट जारी किया गया था।

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