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सिंहस्थ में करोड़ों का LED घोटाला, नगर निगम के डिप्टी कमिश्नर समेत पांच पर एफआईआर

राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण विंग यानी ईओडब्ल्यू ने उज्जैन सिंहस्थ महामेले में हुए घोटालों को लेकर आरोपियों के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की हैं। जिसमें एक मामला करोड़ों रुपए की एलईडी लाइट्स का है।

सिंहस्थ में करोड़ों का LED घोटाला, नगर निगम के डिप्टी कमिश्नर समेत पांच पर एफआईआर
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LED scam of crores in Simhastha, FIR on five including Deputy Commissioner of Municipal Corporation

भोपाल। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण विंग यानी ईओडब्ल्यू ने उज्जैन सिंहस्थ महामेले में हुए घोटालों को लेकर आरोपियों के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की हैं। जिसमें एक मामला करोड़ों रुपए की एलईडी लाइट्स का है। 24 करोड़ रुपए का एलईडी का ठेका नगर निगम ने एचपीएल कंपनी को दिया। इस मामले में गड़बड़ी पर उज्जैन नगर निगम के डिप्टी कमिश्नर समेत दो और कर्मचारियों व एचसीएल कंपनी के डायरेक्टर व मैनेजर पर अपराध दर्ज किया गया है। इसके अलावा शौचालय घोटाले में भी आरोपियों पर केस दर्ज किया गया है।

ईओडब्ल्यू द्वारा उज्जैन सिंहस्थ के बड़े घोटाले की जांच तेजी से की जा रही है। जिसमें कई करोड़ रुपए का घपला उजागर होने की संभावना है। अभी तक छह मुद्दों को जांच को विषय बनाया गया है। जिसमें दो मामलों में एलईडी का मामला बड़ा है। पता चला है कि उज्जैन सिंहस्थ में खरीदी गइंर् 2000 एलइडी लाइट्स, जिनकी कीमत करीब 3.6 करोड़ रुपए है, इनका कुछ पता नहीं है कि ये कहां गईं। इसमें नगर निगम उज्जैन समेत एचपीएल इलेक्ट्रिक एंड पॉवर सर्विसेज को प्रथम दृष्टि में आरोपी माना गया।

इन पर हुई एफआईआर :

इस केस की विवेचना कर रहे ईओडब्ल्यू के इंस्पेक्टर अनिल शुक्ला ने हरिभूमि को सोमवार की रात बताया कि 24 करोड़ रुपए का एलईडी का ठेका था। जिसमें एलईडी लगाकर उनका पांच साल तक मेंटीनेंस भी एचपीएल इलेक्ट्रिक एंड पॉवर सर्विसेज को करना था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। करोड़ों रुपए की एलईडी भी गायब हैं। इस मामले में एचपीएल कंपनी के डायरेक्टर ऋषि सेठ समेत मैनेजर मनोज जैन, नगर निगम के उपायुक्त आरपी श्रीवास्तव, रामबाबू शर्मा व सब इंजीनियर जितेंद्र श्रीवास्तव के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

दूसरा मामला शौचालयों का :

मेले में प्रत्येक पड़ाव स्तर पर 500 शौचालय वह दस चार्जिंग रूम में लाइटें लगी ही नहीं। वहां काली चूरी डाली ही नहीं गई, साथ ही नंबर नहीं डाले गए। साथ ही जितने कर्मचारियों को सफाई के लिए रखना था वह भी नहीं रखे गए। इसके लिए नगर निगम उज्जैन का सफाई विभाग जांच के दायरे में लेकर एफआईआर दर्ज की है।

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