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'जन अभियान परिषद ' को समाप्त करने की तैयारी में कमलनाथ सरकार, बीजेपी ने कहा- कर्मचारियों की रोजी - रोटी छीन रही सरकार

शिवराज सरकार की कई योजनाओं और कार्यक्रमों को बंद करने के बाद अब कमलनाथ सरकार अब सरकारी एनजीओ की तरह काम कर रही संस्था जन अभियान परिषद को बंद करने जा रही है। सरकार ने इसे आरएसएस और भाजपा के लोगों को फायदा पहुंचाने वाला सरकारी मंच मानते हुए इसे समाप्त करने का निर्णय लिया है।

जन अभियान परिषद  को समाप्त करने की तैयारी में कमलनाथ सरकार
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Kamal Nath government may end Jan Abhiyan Parishad

भोपाल। शिवराज सरकार की कई योजनाओं और कार्यक्रमों को बंद करने के बाद अब कमलनाथ सरकार अब सरकारी एनजीओ की तरह काम कर रही संस्था जन अभियान परिषद को बंद करने जा रही है। सरकार ने इसे आरएसएस और भाजपा के लोगों को फायदा पहुंचाने वाला सरकारी मंच मानते हुए इसे समाप्त करने का निर्णय लिया है। बताया जा रहा है कि 25 सितंबर को परिषद के संचालक मंडल की प्रस्तावित बैठक में इसपर मुहर लगा जाएगी। बताया जा रहा है कि इस संस्थान में 600 से अधिक कर्माचारी काम करते हैं। जिनमें से 400 से अधिक स्थाई हैं। अगर संस्था को बंद किया जाता है तो उनकी जीविका पर भी सवाल उठेगा। अब सरकार के इस फैसले को लेकर सियासत भी तेज हो गई है।

बीजेपी ने सरकार के इस फैसले का विरोध किया है। पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा है कि सरकार कर्मचारियों की रोजी - रोटी छीन रही है। सरकार को सोते समय भी आरएसएस दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि सरकार को बहानेबाजी छोड़कर जनहित के कार्य करने चाहिए। पिछले सरकार में परिषद का संचालन करने वाले जिम्मेदारों को भी परिषद बंद किए जाने के फैसले से गुरेज है। उनका मानना है कि सरकार रोजगार के नए अवसर सृजन करने के बजाए रोजगार से लगे उन लोगों के पेट पर लात मार रही है जो सरकार की ओर से समाज सेवा का काम कर रहे हैं।

बता दें कि शासन तथा समुदायों के बीच सेतु की भूमिका निभाने के उद्देश्य से परिषद का गठन दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में 1997 में हुआ था, लेकिन इसे अमली जामा 2007 में शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में पहनाया गया और लाखों के बजट के साथ इसे कई काम दिए गए। शिवराज सिंह के आखिरी कार्यकाल में नर्मदा यात्रा और नर्मदा किनारे वृक्षरोपण जैसे कार्यक्रमों को लेकर संस्था बहुत चर्चा में आई। प्रदेश में नई सरकार आने के बाद से ही परिषद निशाने पर था।

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