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झाबुआ उपचुनाव : मोदी बनाम कमलनाथ बनाने की तैयारी में भाजपा-कांग्रेस, कांग्रेस के समर्थन में आया आदिवासी संगठन जयस

प्रदेश के झाबुआ विधानसभा (Jhabua Assembly By-Election) क्षेत्र में आगामी 21 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव (By-Election) को लेकर प्रदेश के दोनों प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस (Congress) इसे मोदी बनाम कमलनाथ ( Modi V/S KamalNath) बनाने की तैयारी कर रहे हैं।

झाबुआ उपचुनाव : मोदी बनाम कमलनाथ बनाने की तैयारी में भाजपा-कांग्रेस, कांग्रेस के समर्थन में आया आदिवासी संगठन जयस
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भोपाल। प्रदेश के झाबुआ विधानसभा (Jhabua Assembly By-Election) क्षेत्र में आगामी 21 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव (By-Election) को लेकर प्रदेश के दोनों प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस (Congress) इसे मोदी बनाम कमलनाथ ( Modi V/S KamalNath) बनाने की तैयारी कर रहे हैं। इस उपचुनाव में भाजपा (BJP) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की उपलब्धियों के नाम पर वोट मांगेगी तो वहीं कांग्रेस (Congress) की तैयारी मुख्यमंत्री कमलनाथ (Chief MInister Kamal Nath) के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में किए गए विकास कार्य और खासकर आदिवासी समाज को आत्मनिर्भर बनाने को लेकर किए गए कार्यों को लेकर चुनाव मैदान में उतरेगी। इसको लेकर राज्य के दोनों प्रमुख दल अपने-अपने स्तर पर तैयारी में जुट गए हैं।

विधानसभा चुनाव 2018 में प्रदेश में भाजपा की हार और लोकसभा चुनाव के संग्राम में बुरी तरह मात खाने वाली कांग्रेस पार्टी के लिए झाबुआ उपचुनाव किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है। इसका असर आने वाले दिनों में झाबुआ विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिलेगा। चुनाव आयोग के उपचुनाव की तारीखों के एलान के बाद झाबुआ से लेकर भोपाल तक में सियासी पारा चढ़ना शुरू हो गया है।

इस बीच रविवार की सुबह कांग्रेस के लिए राहत भरी खबर आदिवासी संगठन जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) (Jai adivasi yuva shakti sangathan) की तरफ से आई है। कांग्रेस विधायक और जयस (Jayas) प्रमुख हीरालाल अलावा (Hiralal Alawa) ने साफ कर दिया है कि झाबुआ सीट पर जयस अपना प्रत्याशी नहीं उतारेगी। जयस ने कांग्रेस के खाते में एक सीट बढ़ाने के लिए सत्तारुढ़ पार्टी को समर्थन देने का एलान किया है। जयस के इस कदम के बाद अब इस आदिवासी बाहुल्य और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित विधानसभा सीट पर भाजपा औऱ कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला होना तय हो गया।

इस उपचुनाव में दोनों पार्टियों की साख दांव पर बहरहाल झाबुआ उपचुनाव को लेकर कांग्रेस और भाजपा भले ही अपने.अपने तरीके से दावे करती दिखाई दे रही होए लेकिन हकीकत यह है कि इस सीट पर जीत को लेकर दोनों ही पार्टियों की साख दांव पर है। कांग्रेस पार्टी जहां राज्य में अपने नौ महीने के कार्यकाल में लिए गए फैसलों को उपचुनाव में भुनाने का काम करेगी। वहीं भाजपा अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए पुराने और आजमाए हुए फॉमूर्ले पर चलकर पीएम नरेंद्र मोदी के नाम का सहारा लेकर चुनावी जंग जीतने की कोशिश करेगी। हालांकि जब तक भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों के नाम तय नहीं हो जातेए इस चुनाव के परिणाम के बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है।

जयस के समर्थन से मजबूत हुई कांग्रेस .

झाबुआ विधानसभा सीट के उपचुनाव में जयस की तरफ से समर्थन मिलने के बाद कांग्रेस को इस सीट पर जीत की उम्मीद दिखने लगी है। कांग्रेस विधायक और जयस प्रमुख हीरालाल अलावा ने कहा भी है कि वे कांग्रेस सरकार को स्थिर बनाने और एक सीट जोड़ने के लिए पार्टी प्रत्याशी को समर्थन देंगे। जयस प्रमुख ने कहा है कि सीएम कमलनाथ से मुलाकात के बाद उन्होंने यह फैसला लिया है। इधर, झाबुआ उपचुनाव को लेकर भाजपा ने भी अपने स्तर पर रणनीति बनाना शुरू कर दी है। झाबुआ सीट पर 2018 की जीत को दोहराने के लिए भाजपा, रतलाम, झाबुआ लोकसभा सीट के सांसद जीएस डामोर के कंधों पर ही जिम्मेदारी सौंपने वाली है। भाजपा के प्रत्याशी चयन में उनकी पसंद को भी पार्टी तरजीह देगी।

भाजपा भी जंग जीतने की तैयारी में .

प्रदेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा भी झाबुआ उपचुनाव की जंग जीतने की तैयारी में लग गई है। हालांकि भाजपा की तरफ से जहां एक तरफ सांसद जीएस डामोर की पसंद के प्रत्याशी को उतारने की चर्चा सुर्खियों में है। वहीं उपचुनाव की उम्मीदवारी की दावेदारी पूर्व विधायक शांतिलाल बिलवाल भी करते दिखाई दे रहे हैं। पार्टी को उम्मीद है कि इस उपचुनाव में वह निश्चित रूप से जीत हासिल करेगी। पार्टी ने कांग्रेस के प्लान पर जवाबी हमला बोलते हुए कहा है कि झाबुआ सीट पर भाजपा दोबारा जीत हासिल करेगी। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राकेश शर्मा ने कहा है कि आदिवासी कांग्रेस सरकार में ठगे गए हैं। इस बार भी वो कांग्रेस पर ऐतबार नहीं करेंगे।

जेवियर पर दोनों की नजर .

2018 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़कर 30 हजार से अधिक वोट जीतने वाले जेवियर मेढ़ा पर भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों की नजर है। दोनों ही पार्टी के मेढा को अपने पाले में करने की कोशिश कर रहे हैं।

प्रमुख दावेदार .

कांग्रेस . पूर्व केन्द्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया

भाजपा . शांतिलाल बिलवाल

निर्दलीय . जेवियर मेढ़ा

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