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लोकसभा चुनाव 2019ः देश के सबसे चकाचक शहर इंदौर के मतदाता यातायात के लगातार बिगड़ते ढर्रे से परेशान

मध्य प्रदेश के इंदौर लोकसभा क्षेत्र में चुनावी घमासान के दिनों-दिन तेज होने के बीच प्रमुख सियासी दल राष्ट्रीय मुद्दों को तूल दे रहे हैं। लेकिन स्वच्छता सर्वेक्षण में लगातार तीसरे साल देश भर में अव्वल रहे इंदौर शहर में ऐसे मतदाताओं की बड़ी तादाद है जो स्थानीय यातायात व्यवस्था की बदहाली से खासे परेशान दिखाई देते हैं।

लोकसभा चुनाव 2019ः देश के सबसे चकाचक शहर इंदौर के मतदाता यातायात के लगातार बिगड़ते ढर्रे से परेशान
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मध्य प्रदेश के इंदौर लोकसभा क्षेत्र में चुनावी घमासान के दिनों-दिन तेज होने के बीच प्रमुख सियासी दल राष्ट्रीय मुद्दों को तूल दे रहे हैं। लेकिन स्वच्छता सर्वेक्षण में लगातार तीसरे साल देश भर में अव्वल रहे इंदौर शहर में ऐसे मतदाताओं की बड़ी तादाद है जो स्थानीय यातायात व्यवस्था की बदहाली से खासे परेशान दिखाई देते हैं।

विकास (18), इंदौर संसदीय क्षेत्र के उन 66,638 मतदाताओं में शामिल हैं जो अपने जीवनकाल में पहली बार चुनावों में मतदान करने जा रहे हैं। मोटरसाइकिल पर सवार इस कॉलेज विद्यार्थी से "पीटीआई-भाषा" ने बृहस्पतिवार को बात की, तब वह एमवाय चौराहे के ट्रैफिक सिग्नल पर बत्ती के लाल से हरे होने का बड़ी बेसब्री से इंतजार करते नजर आ रहे थे।

विकास ने कहा कि शहर में ट्रैफिक की हालत वाकई बेहद खराब है। मुख्य सड़कों पर ट्रैफिक जाम होने से हर रोज हजारों लोगों का कीमती वक्त बर्बाद होता है। मेरे जीवन का पहला वोट उसी उम्मीदवार को जायेगा जो शहर की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिये ठोस योजना पेश करेगा।

बहरहाल, शहर के बुद्धिजीवियों में शामिल संजय पटेल के मुताबिक, बदहाल यातायात व्यवस्था से मतदाताओं को मुक्ति दिलाने के प्रति उन्हें किसी भी सियासी दल या उसके प्रत्याशी में आवश्यक गंभीरता नजर नहीं आ रही है।

पटेल ने कहा कि इंदौर लोकसभा क्षेत्र में प्रमुख उम्मीदवार अभी तो ऐसे ही मुद्दों को उभारते दीख रहे हैं जिनसे उन्हें चुनावों में तात्कालिक फायदा मिल सके।

सामाजिक कार्यकर्ता किशोर कोडवानी कहते हैं कि गुजरे एक दशक में शहर की आबादी तेजी से बढ़ी है जिसके साथ सड़कों पर वाहनों की तादाद में भी जबर्दस्त इजाफा हुआ है। एमजी रोड, एबी रोड, सुभाष मार्ग और रिंग रोड सरीखे रास्तों पर यातायात का दबाव दिनों-दिन बढ़ रहा है।

कोडवानी ने सुझाया कि शहर की दिनों-दिन बिगड़ती यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिये सड़कों की इंजीनियरिंग में सुधार करना होगा। व्यस्त घंटों में सड़कों पर वाहनों की तादाद नियंत्रित करने के लिये स्कूल-कॉलेजों और दफ्तरों के खुलने व बंद होने के समय में बदलाव करना होगा।

इसके साथ ही, लोक परिवहन तंत्र का विकेंद्रीकरण भी करना होगा। इंदौर संसदीय क्षेत्र में करीब 23.5 लाख मतदाता हैं। क्षेत्र में 19 मई को लोकसभा चुनावों का मतदान होना है।

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