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Exclusive Interview: जब डॉ. हिमांशु द्विवेदी के इस सवाल पर फंस गए सीएम शिवराज सिंह

मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने हरिभूमि के चीफ एडिटर हिमांशु द्विवेदी के खास बातचीत की और चुनाव को लेकर कई बातें भी बताईं।

Exclusive Interview: जब डॉ. हिमांशु द्विवेदी के इस सवाल पर फंस गए सीएम शिवराज सिंह
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खजुराहो / उनकी सभाओं में उमड़ रही भीड़, उनका जोश अगर आकलन का पैमाना है, तो सीएम शिवराज सिंह को अपनी सरकार बरकरार रहने का पूरा अख्तियार है। जहां तमाम राजनैतिक विश्लेषक मौजूदा विधानसभा चुनाव को कांटे की टक्कर करार दे रहे हैं, वहीं नामांकन समाप्ति के बाद से तकरीबन सवा सौ जनसभाओं को संबोधित कर चुके शिवराज सिंह एक बार फिर बड़ी जीत के प्रति आश्वस्त हैं। जमीन से तकरीबन तीस हजार फीट की ऊंचाई पर हवा में उड़ते हुए उन्होंने हमारे तमाम सवालों के जवाब में यह एहसास मुकम्मल तरीके से कराया कि तेरह साल से मुख्यमंत्री बने रहने के बाद भी उन्होंने अपने पैर धरातल पर ही जमाए हुए हैं।
हरिभूमि से उन्होंने प्रदेश में चुनाव से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बात की। प्रस्तुत हैं बातचीत के खास-खास अंश। इस बार मुकाबला काफी कठिन माना जा रहा है। कितना सहमत हैं आप? 8 चुनाव है। हर पार्टी को लड़ने और दावा करने का अधिकार है लेकिन, आप जनता के बीच जाएंगे तो देखेंगे कि उसका मन एकदम स्पष्ट है। वह भाजपा सरकार के पिछले पंद्रह वर्षों के कामकाज से पूरी तरह संतुष्ट ही नहीं, उत्साहित है।
पिछली बार भी लोग कड़ा मुकाबला बता रहे थे, लेकिन जब नतीजा आया तो हमें दो तिहाई से ज्यादा सीटें मिलीं। इस बार भी ऐसा ही होगा। कांग्रेस पार्टी तो खासी उत्साहित दिख रही है। उसके नेता तो मानकर चल रहे हैं कि उनकी सरकार बनने जा रही है। कांग्रेस पार्टी की जनता के बीच विश्वसनीयता कम ही नहीं,खत्म ही हो चुकी है। क्या प्रदेश की जनता इनके शासनकाल के कुशासन को कभी भूल सकती है। इनके चौवन साल के राज में प्रदेश को भुखमरी, गरीबी,अशिक्षा, अंधेरा यही सब तो मिला था। फिर जनता इनको वोट क्यों देगी? हमने पिछले पंद्रह साल में जो काम करके दिखाया है, उसके प्रति जनता लगातार विश्वास व्यक्त करती रही है। इस बार भी वह भाजपा को ही मौका देगी। बड़ी मुश्किल से प्रदेश ठीक राह पर आया है, उसे जनता अब पटरी से उतरने नहीं देगी।
हरिभूमि : आप बार-बार अपने काम का हवाला दे रहे हैं। ऐसा खास क्या किया है आपकी सरकार ने?
शिवराज : (हंसते हुए) क्या नहीं किया है हमारी सरकार ने। जब पंद्रह बरस पहले हमने प्रदेश की कमान संभाली थी तो मध्यप्रदेश की पहचान बीमारू राज्य की थी। न बिजली थी, न सड़क थी। स्कूल-कॉलेज, अस्पतालों की हालत खस्ता थी। आज देखिए। कितना कुछ बदल गया है। जो भोपाल-इंदौर की दूरी पांच घंटे में तय नहीं हो पाती, आज दो-ढ़ाई घंटे में तय हो जाती है। पूरे प्रदेश में बेहतरीन सड़कें बना दी गईं। बिजली के मामले में हम पूरी तरह आत्मनिर्भर हो गए। कोई सोच भी नहीं सकता कि पैंसठ लाख से अधिक घंटों के छह हजार करोड़ के बिजली बिल कोई सरकार अदा कर सकती है। हमने कर दिखाया। नए मेडिकल कॉलेज, यूनिवर्सिटी,शिक्षकों की बड़े पैमाने पर भर्ती हमारी सरकार की उपलब्धि है। कोई क्षेत्र ऐसा नहीं है,जहां हमने काम नहीं किया हो।
हरिभूमि: प्रदेश में अधिकांश मतदाता खेती-किसानी से जुड़े हुए हैं। माना जा रहा है कि वह शिवराज के खिलाफ जा सकते हैं?
शिवराज : अपने बेटे के खिलाफ वह कैसे जा सकते हैं? अगर प्रदेश का किसान मेरे खिलाफ होता तो मैं मुख्यमंत्री रहता ही नहीं। किसान हमारी प्राथमिकता में हमेशा से रहे हैं। उनकी दशा सुधारने के लिए हम तमाम कदम लगातार उठाते रहे। चाहे वह समर्थन मूल्य पर उपज की खरीद हो, बीज-खाद का प्रबंधन हो,सिंचाई सुविधा का विस्तार हो, हर तरफ हमने ध्यान दिया। जब हम सत्ता में आए थे तो किसान को सोलह-अठारह प्रतिशत ब्याज पर ऋण मिलता था। आज हमने इसे शून्य पर ला दिया। यह कोई सामान्य बात है क्या? भावान्तर जैसी अनूठी योजना किसान के हित में हमने शुरू की?और यदि चौथी बार हम सरकार में आए तो जो किसान के लिए हम करेंगे, वह दुनिया में आज तक किसी ने नहीं किया।
हरिभूमि: ऐसा क्या योजना बना ली है आपने किसानों के लिए? जिसके उल्लेख मात्र से आपमें इतना जोश आ गया है?
शिवराज: देखिए। इस प्रदेश में तकरीबन सत्तर लाख किसान परिवार हैं। उनमें से तेरह लाख किसान गेंहू बेचने के लिए मंडी तक आता है। छह-सात लाख किसान धान और अन्य फसल बेचने के लिए मंडी तक आता है। पचास लाख किसान ऐसे हैं,जो इतनी उपज पैदा ही नहीं कर पाते कि अपना पेट भरने के बाद कुछ अनाज बेचने के लिए बच पाए। यह छोटे किसान हैं जिनके पास आधा एकड़, दो एकड़, चार एकड़ ही जमीन है। हम अब तक बोनस उन्ही किसानों को देते थे, जो मंडी में उपज बेचते थे। लेकिन, अब हमने फैसला किया है कि जो किसान खेती करेगा, उसके खाते में बोनस प्रति एकड़ उपज के आधार पर पहुंचाया जाएगा। यह सामाजिक दृष्टि से क्रांतिकारी फैसला है,जिसे हमने अपने संकल्प पत्र में शामिल किया है।
हरिभूमि: योजना तो बहुत अच्छी है। आपने और भी कई वादे किए हैं। जिसमें उत्कृष्ट विद्यार्थियों को स्कूटी देने का। नि:शुल्क शिक्षा देने का। संविदा कर्मचारियों को नियमित करने जैसी घोषणाएं भी शामिल हैं। इन सबके लिए पैसा कहां से लाएंगे? विपक्ष का कहना है कि प्रदेश के आर्थिक हालात खराब हैं।
शिवराज : पैसे की कोई कमी नहीं। मध्यप्रदेश के पुरुषार्थ को लोग जानते नहीं हैं। जो लोग आर्थिक हालत खराब होने की बात कह रहे हैं। वह बताएं कि पिछले 15 वर्षों में क्या एक दिन भी कर्मचारियों का वेतन लेट हुआ? पांचवा, छठवां और सातवां वेतनमान हमने ही दिया। इतनी सड़कें और समाज कल्याण की योजनाएं कभी रोकी गर्इं क्या? हमारी नीयत और नीति दोनों ठीक रही हैं, इसलिए पैसे की कमी कभी नहीं रही और आगे भी नहीं रहेगी।
हरिभूमि: आपके खिलाफ कांग्रेस पार्टी ने पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव को बुदनी से मैदान में उतारा है। कितनी बड़ी चुनौती मानते हैं आप उन्हें?
शिवराज: अरुण जी प्रदेश के वरिष्ठ और सम्मानित नेता हैं। वह खरगौन से मेरे गृह क्षेत्र में आए हैं, तो उनका स्वागत है। हमारी कोशिश रहेगी कि उन्हें कोई तकलीफ न हो।

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