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बिना जांच के प्रमाण प्रत्रों के आधार पर जल्द नियुक्ति देना चाहती है सरकार! संघर्ष मोर्चा ने दी आंदोलन की चेतावनी

अतिथि विद्वानों द्वारा कांग्रेस के वचन पत्र में बिंदु क्रमांक 17.22 की गलत व्याख्या की जा रही है। पीएससी चयनित सहायक प्राध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. प्रकाश खातरकर ने कहा कि सैकड़ो अतिथि विद्वान जो एमए, एमकॉम, एमएससी और एमफिल है ऐसे सभी अतिथि विद्वानों की योग्यता सम्बंधित दस्तावेज की जांच की जाए.

बिना जांच के प्रमाण प्रत्रों के आधार पर जल्द नियुक्ति देना चाहती है सरकार! संघर्ष मोर्चा ने दी आंदोलन की चेतावनी
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Government wants to appoint guest faculties on the basis of fake documents!

भोपाल। अतिथि विद्वानों द्वारा कांग्रेस के वचन पत्र में बिंदु क्रमांक 17.22 की गलत व्याख्या की जा रही है। पीएससी चयनित सहायक प्राध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. प्रकाश खातरकर ने कहा कि सैकड़ो अतिथि विद्वान जो एमए, एमकॉम, एमएससी और एमफिल है ऐसे सभी अतिथि विद्वानों की योग्यता सम्बंधित दस्तावेज की जांच की जाए। क्योंकि इन अतिथि विद्वानों ने झूठा शपथ पत्र देकर कई सालो से अनैतिक लाभ लिया है। इनका संबंधित प्राचार्यो द्वारा कालेज स्तर पर दस्तावेजो का सत्यापन भी नहीं कराया गया। जिससे स्पष्ट होता है कि इनकी नियुक्ति में बड़ी सांठगांठ व धांधली की गई। जिनके पास यूजीसी की न्यूनतम निर्धारित योग्यता (पीएचडी,नेट,सेट) संबंधित दस्तावेज नहीं है उनको शीघ्र कालेज से निकालने कीअतिथि विद्वानों द्वारा कांग्रेस के वचन पत्र में बिंदु क्रमांक 17.22 की गलत व्याख्या की जा रही है। पीएससी चयनित सहायक प्राध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. प्रकाश खातरकर ने कहा कि सैकड़ो अतिथि विद्वान जो एमए, एमकॉम, एमएससी और एमफिल है ऐसे सभी अतिथि विद्वानों की योग्यता सम्बंधित दस्तावेज की जांच की जाए कार्रवाई करे और इनके द्वारा अभी तक लिये लिए गए आर्थिक लाभ की रिकवरी हो। अतिथि विद्वान व्यवस्था में पूर्व सरकार द्वारा भारी भाई भतीजावाद भी किया गया है हम शासन से इनकी उच्चस्तरीय जांच की मांग करते है, ताकि इन पदों उच्च शिक्षित योग्य बेरोजगारो को रोजगार मिल सके।

20 वर्षों से पढ़ा रहे एक ही विषय फिर भी चयन नहीं

वर्तमान में सरकारी कालेजो में अतिथि विद्वान व्यवस्था में रोस्टर का पालन नहीं किया गया है तथा कई अतिथि विद्वान यूजीसी की निर्धारित योग्यता नहीं रखते हैं इसलिए नियम विरुद्ध तरीके से नियमितीकरण की बात करना तार्किक नहीं है। पीएससी ने सभी के लिए परीक्षा का खुला अवसर दिया था लेकिन 20 वर्षों से एक ही विषय पढ़ा रहे है अतिथि विद्वानों का चयन नहीं होना इनके ज्ञान की पराकाष्ठा है। वर्ष 2017 में पीएससी के माध्यम से हुई सहायक प्राध्यापक परीक्षा में कई ऐसे अतिथि विद्वान भी हैं जो न्यूनतम उत्तीर्ण अंक नही ला सके है तथा सरकार ने इन्हें 20 अनुभव के अतिरिक्त अंक भी दिये है पर चयनित नहीं हो पाए।

मनगढ़ंत बेबुनियाद आरोप लगा रहे अतिथि विद्वान

संगठन ने मांग की है कि शासन को चाहिए कि पीएससी से चयनित अभ्यर्थियों जिनका सत्यापन कार्य पूर्ण हो चुका है, उन लगभग 2500 अभ्यर्थियों की पहले नियुक्ति प्रक्रिया प्रारम्भ करे। उसके बाद बची हुई सीटों पर यूजीसी के नियमानुसार केवल 20 प्रतिशत योग्य अतिथि विद्वान की रोस्टर के अनुसार भर्ती करें अथवा पीएससी से पुनः रिक्त पदों के लिए विज्ञापन जारी करे। खातरकर ने कहा कि अतिथि विद्वान पीएससी जैसी संवैधानिक संस्था, सरकार और उच्च शिक्षा विभाग पर मनगढ़ंत बेबुनियाद आरोप लगा रहे है। हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट ने लगाई गई 200 याचिकाओं का निराकरण कर दिया है।

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