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मध्य प्रदेशः सरकार ने 4 लाख 90 हजार कर्मचारियों को दिया चुनावी तोहफा

मप्र सरकार ने करीब 4.90 लाख कर्मचारियों को चुनावी साल का तोहफा दिया है। 2.37 लाख अध्यापक संवर्ग का संविलियन स्कूल शिक्षा विभाग में किया है

मध्य प्रदेशः सरकार ने 4 लाख 90 हजार कर्मचारियों को दिया चुनावी तोहफा
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मप्र सरकार ने करीब 4.90 लाख कर्मचारियों को चुनावी साल का तोहफा दिया है। 2.37 लाख अध्यापक संवर्ग का संविलियन स्कूल शिक्षा विभाग में किया है। उनका अलग कैडर व वेतनमान होगा।

1 जुलाई 2018 से 7 वें वेतनमान का लाभ मिलेगा। 1.84 लाख संविदा पदों को नियमित पदों पर परिवर्तित किया जाएगा। राज्य वेतन आयोग की शिफारिशों को लागू करने से 13 पदों पर पदस्थ 50 हजार कर्मचारियों को लाभ होगा। 20 हजार अतिथि विद्वानों को अब 30 हजार रुपए महीने मिलेगा।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक मंत्रालय में हुई। इसमें 1998 से ही लंबित अध्यापक संवर्ग के लिए बड़ा निर्णय लिया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री चौहान ने कहा है कि आज का दिन मप्र के लिए ऐतिहासिक है।

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कांग्रेस की सरकार ने अध्यापक कैडर को डाईंग घोषित कर दिया था। उसे कैबिनेट ने समाप्त कर दिया। उस समय शिक्षक की जगह गुरूजी और शिक्षाकर्मी बना दिए गए थे। इससे शिक्षा व्यवस्था चौपट हो गई थी।

किंतु सरकार ने पहले कर्मी कल्चर को समाप्त किया व उन्हें अध्यापक बनाया। अब कैबिनेट में यह फैसला लिया है कि अध्यापक संवर्ग का संविलियन शिक्षा विभाग में किया जाए। इसके बाद वे राज्य शासन के कर्मचारी हो गए हैं। इसके अलावा भी कई अन्य निर्णय लिए गए हैं।

2.37 अध्यापक बने राज्य शासन के कर्मचारी

कैबिनेट से निर्णय के बाद 2.37 लाख अध्यापकों को नया शिक्षक संवर्ग मिलेगा। इसमें 1.84 लाख नगरीय निकायों व पंचायतों के तथा 53 हजार 89 आदिवासी ब्लाकों में पदस्थ अध्यापक हैं।

सभी को एक कैडर में शामिल किया गया है। वे अब शासकीय कर्मचारी होंगे। उन्हें प्राथमिक शिक्षक, माध्यमिक शिक्षक तथा उच्च माध्यमिक शिक्षक के पद मिलेंगे। यह सेवा एक जुलाई 2018 से प्रभावशील होने के साथ ही 7 वें वतनमान का लाभ दिया जाएगा।

इन्हें शासकीय शिक्षकों के समान सुविधाएं जैसे नियमित वेतनमान, पेंशन, ग्रेच्युटी, बीमा, शासकीय आवास, आवास भत्ता, अनुकंपा नियुक्ति तबादले आदि की सुविधा दी जाएगी।

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1.84 लाख संविदा पदों को नियमित किया

मप्र में विभिन्न विभागों में पदस्थ 1.84 लाख संविदा कर्मचारियों को नियमित पदों पर बारी-बारी से परिवर्तित किया जाएगा।भर्ती करने वाले पदों में 3 वर्ष तक 20 प्रतिशत पद संविदा पर नियुक्त शासकीय सेवकों के लिए आरक्षित रहेंगे।

आरक्षण का लाभ प्राप्त करने के लिए वही संविदा सेवक पात्र होगें, जो सीधी भर्ती का रिक्त पद जिस श्रेणी का है उसी श्रेणी में आवेदक न्यूनतम 5 वर्ष तक संविदा पर नियुक्त रहा हो।

पांच वर्ष की यह अवधि रिक्त पद पर आवेदन करने की दिनांक को पूरी होनी चाहिए। वे विभाग बदलना चाहें तो वह भी होगा। यानी जलसंसाधन से वह पीडब्ल्यूडी में पदस्थापना ले सकता है।

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13 पदों के 50 हजार की वेतन विसंगति होगी दूर

राज्य वेतन आयोग की अनुशंसाओं को लागू किया है। इससे उप यंत्री, वाणिज्यिक कर अधिकारी, कराधान सहायक, सहायक उप निरीक्षक, राजस्व निरीक्षक, कंपाउंडर, उप जेलर, उप पंजीयक सहायक जिला अभियोजन अधिकारी जैसे पदों के वेतन विसंगति को दूर किया गया है।

यानी एक परीक्षा प्रणाली से जो नियुक्त होंगे, उनके वेतन में भी सामंजस्य होगा। यह 1 जनवरी 2016 से लागू होगा। वास्तविक लाभ 1 जुलाई 2018 से देय होगा।

अतिथि विद्वानों को अब 30 हजार मासिक

कैबिनेट ने अतिथि विद्वानों को अब 30 हजार रुपए मासिक देने को मंजूरी दी है। प्राध्यापक, ग्रंथपाल एवं क्रीड़ाअधिकारी के रिक्त पद पर निर्धारित योग्यता रखने वाले आवेदकों, अतिथि विद्वानों के लिए एक बार में आमंत्रण के शैक्षणिक सत्र के सभी 12 माहों या शेष बचे माहों की कालावधि के लिए प्रति दिवस 1500 रुपए व न्यूनतम 30 हजार रुपए का निश्चित मानदेय दिया जाएगा।

अतिथि विद्वानों को 6 दिन का आकस्मिक अवकाश और 90 दिनों के न्यूनतम मानदेय सहित प्रसूति अवकाश की पात्रता होगी। प्रदेश में उच्च शिक्षा विभाग के 469 कॉलेज संचालित हैं।

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