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एम्स ओपीडी पर्ची बनाने में हेराफेरी , ज्यादा रकम लेने वाले तीन गिरफ्तार

एम्स में ओपीडी की पर्ची के नाम पर अधिक राशि वसूलने के मामले में पुलिस ने तीन नामजद आरोपियों पर प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है।

एम्स ओपीडी पर्ची बनाने में हेराफेरी , ज्यादा रकम लेने वाले तीन गिरफ्तार
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Forgery in AIIMS OPD slip, three arrested for taking high amount

भोपाल। एम्स में ओपीडी की पर्ची के नाम पर अधिक राशि वसूलने के मामले में पुलिस ने तीन नामजद आरोपियों पर प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है। पूछताछ में ही यह पता चल सकेगा कि आरोपी कितने समय से मरीजों की पर्ची बनाने में घालमेल कर रहे थे। बागसेवनिया पुलिस ने उक्त मामले में ओपीडी में मौजूद कंप्यूटरों को जब्त किया है। इसके अलावा पुलिस ने पुराना रिकॉर्ड भी एम्स से मांगा है। रिकॉर्ड आने के बाद ही पता चल सकेगा कि आरोपियों अब तक कितने मरीजों को चूना लगाते हुए कितनी राशि कमाई है। इसके अलावा एम्स में गठित जांच कमेटी भी मामले की जांच कर रही है। कमेटी जांच पूरी होते ही पुलिस को रिपोर्ट पेश करेगी।

थाना प्रभारी शैलेंद्र शर्मा ने बताया कि एम्स भोपाल की जांच कमेटी में डॉक्टर अरनीत अरोरा के नेतृत्व में डिप्टी डायरेक्टर श्रमदीप सिन्हा, एंव रजिस्टार बैनी अब्राहम, वरिष्ट प्रशासनिक अधिकारी विशाल कुमार गुप्ता की कमेटी गठित की गई थी। समिति ने एम्स की ओपीडी शाखा में मरीजों के पर्चे बनाते समय शुल्क के लेनदेन में हेराफेरी कर धोकाधड़ी करने वाले तीन कर्मचारियों का रिकॉर्ड खंगाला था। कमेटी की जांच में यह बात सामने आई कि जो पैसा भारत सरकार के स्वस्थ मंत्रालय के खाते में जमा होना था उससे अधिक की राशी मरीजों से वसूल कर ली गई है। उक्त मामले में कमेटी ने जांच रिपोर्ट बागसेवनिया पुलिस को सौंपी थी। पुलिस ने उक्त मामले में सुशील कुमार द्विवेदी, दिव्याशु गुप्ता और जितेन्द्र राठौर पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।

दस रुपए की कटती है पर्ची

गौरतलब है कि एम्स में इलाज के लिए दस रुपए की पर्ची कटती है। प्राथमिक जांच में यह पता चला था कि पर्ची में शुल्क ज्यादा लिया गया है। अभी तक की जांच में औबेदुल्लागंज से आए मरीजों से ओपीडी रजिस्ट्रेशन के नाम पर 10 रुपए की जगह ज्यादा रुपए लेने की पुष्टि हुुर्ह है। पुलिस की एक टीम उक्त मरीजों से पूछताछ कर गुरुवार रात लौटी थी। शुकवार देर रात पुलिस ने उक्त मामले में प्रकरण दर्ज किया है।

आउट सोर्स से भर्ती होकर बन गया था ओपीडी इंचार्ज

पुलिस ने डॉक्टर चौहान की शिकायत पर प्रकरण दर्ज किया है। पूरी ठगी का मास्टर माइंड जितेंद्र राठौर है। जितेंद्र छह साल पहले आउट सोर्स एजेंसी के माध्यम से भर्ती हुआ था। उसने ओपीडी काउंटर पर काम करते समय एम्स में मौजूद अन्य अधिकारियों से अच्छे संबंध बना लिए थे। अधिकारियों के सामने अच्छी छवि रखने वाले जितेंद्र राठौर को ओपीडी का इंचार्ज बना दिया गया था, जबकि सुशील कुमार द्विवेदी, दिव्याशु गुप्ता उसके अंडर में काम करते थे।

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