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पिता की अंतिम इच्छा पूरी करने बेटियों ने मेडिकल कॉलेज को किया देहदान, रायपुर से लेकर आए छिंदवाड़ा

कहते हैं दान करना महादान होता है चाहे वह नेत्र दान, ब्लड दान हो या फिर मृत्यु के बाद देहदान। इससे बड़ा दान दुनिया में कोई दान नहीं होता है। छिंदवाड़ा में एक अनूठी पहल सामने आई है जहां फ्रेंड्स कॉलोनी में रहने वाले सेवानिवृत सत्यप्रकाश शुक्ला (75 वर्ष) के बेटियों ने उनकी मृत्यु के बाद देहदान करने का फैसला लिया है।

पिता की अंतिम इच्छा पूरी करने बेटियों ने मेडिकल कॉलेज को किया देहदान, रायपुर से लेकर आए छिंदवाड़ा

छिंदवाड़ा। कहते हैं दान करना महादान होता है चाहे वह नेत्र दान, ब्लड दान हो या फिर मृत्यु के बाद देहदान। इससे बड़ा दान दुनिया में कोई दान नहीं होता है। छिंदवाड़ा में एक अनूठी पहल सामने आई है जहां फ्रेंड्स कॉलोनी में रहने वाले सेवानिवृत सत्यप्रकाश शुक्ला (75 वर्ष) के बेटियों ने उनकी मृत्यु के बाद देहदान करने का फैसला लिया है।

सत्यप्रकाश शुक्ला का 11 अगस्त रविवार को देहांत हो गया था। उनके मरणोपरांत बेटियों ने फैसला लिया की सत्यप्रकाश शुक्ला का देहदान किया जाए। जिसके चलते आज मेडिकल कॉलेज छिंदवाड़ा में उनका देहदान की प्रक्रिया डॉक्टर की उपस्थिति में पूरी की गई।

बेटियों का कहना है देहदान करना स्व. शुक्ला जी का स्वयं का निर्णय था। उनका कहना था छिंदवाड़ा जिले को जो मेडिकल कॉलेज की सौगात मिली है उस पर पढ़ने वाले छात्रों के अध्ययन के लिए मेरा शरीर का देहदान करें। जिसके बाद परिवार की सहमति से सत्यप्रकाश शुक्ला का मृत देह मेडिकल कॉलेज को सौंपा गया है।

आज भी लोग एक ओर जहां रक्तदान और आंख दान करने में भी गुरेज़ करते हैं। वहीं अपने बुजूर्ग पिता की अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए बेटियों ने उनके देह को रायपुर से छिंदवाड़ा लाकर मेडिकल कॉलेज को दान दे दिया। छिंदवाड़ा की भूमि वैसे भी समाज को प्रेरणा देने में सदैव तत्पर रही है। सत्यप्रकाश शुक्ला की देह हमेशा समाज को नवचेतना अवश्य देगी।

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