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घर ले जाते मृत महिला जब अचानक करने लगी बातें, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप

मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में डॉक्टरों की लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। जहां एक प्रसूता को अस्तपाल प्रबंधन ने ब्रेन हमेरेज के बाद लगभग मृत घोषित कर दिया। परिजन जब महिला को घर ले जाने लगे तो वह अचानक बोल पड़ी।

घर ले जाते मृत महिला जब अचानक करने लगी बातें, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप
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मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में डॉक्टरों की लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। जहां एक प्रसूता को अस्तपाल प्रबंधन ने ब्रेन हमेरेज के बाद लगभग मृत घोषित कर दिया। परिजन जब महिला को घर ले जाने लगे तो वह अचानक बोल पड़ी। जिसके बाद परिजन प्रसूता को लेकर पुन: अस्पताल पहुंचे। इस मामले में जहां परिजन डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं वहीं पूरे मामले में अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि हमारी तरफ से महिला को मृत घोषित नहीं किया गया था। परिजन उसे जबर्दस्ती अपने साथ ले गए।

दरअसल पूरा मामला नेमावर रोड स्थित एक निजी अस्पताल का है जहां देवास के कन्नोद की रहने वाली 29 वर्षीय शानू खान को प्रसूति के लिए 8 अगस्त को परिजन लेकर पहुंचे थे। 9 अगस्त को शानू ने बेटे को जन्म दिया। 12 अगस्त को प्रसूता को डिस्चार्ज किया जा रहा था उस समय स्टाफ ने एक इंजेक्शन लगाया जिसका उसे रिएक्शन हो गया। इंजेक्शन लगाने के दस मिनट बाद ही शानू का हाथ सूज गया और नीला पड़ने लगा। डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने भर्ती कर लिया लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ।

हालत ठीक नहीं होता देखकर अस्पताल प्रबंधन ने शहर के एक बड़े अस्पताल में मरीज को शिफ्ट करवा दिया। यहां पांच दिन से शानू का इलाज चल रहा था। पहले उसे आईसीयू में रखा गया और फिर वेंटीलेटर पर भी रखा गया। इस दौरान मरीज से किसी परिजन को मिलने नहीं दिया गया। इसलिए उसकी स्थिति से वे अंजान रहे।

सोमवार रात महिला को वार्ड में शिफ्ट किया गया। उसने परिजन से बात की लेकिन मंगलवार दोपहर में उसकी हालत खराब हुई तो डॉक्टरों ने उसे दोबारा आईसीयू में शिफ्ट कर दिया। इस संबंध में परिजनों को कुछ नहीं बताया गया। महिला के भांजे जावेद शेख ने बताया कि हमें अस्पताल से फोन आया। उन्होंने बताया कि मरीज को ब्रेन हेमरेज हो गया है। अब बचने की कोई संभावना नहीं, उसकी लगभग मौत हो चुकी है। इसलिए अस्पताल में रखने का कोई मतलब नहीं है। उसे घर ले जाईए। हमसे कुछ कागज पर साइन करवाए।

शाम 4.30 बजे एम्बुलेंस से हम शानू को घर लाने लगे तभी रास्ते में उसने हाथ-पैर हिलाए। हमसे बात की। हमने तुरंत डॉक्टर को फोन लगाया तो वे बोेले कि वेंटीलेटर पर थीं, इसलिए दस मिनट उसका असर रहेगा, उसकी मौत हो गई है। लेकिन काफी देर तक शानू ने बात की। हम तुरंत वापस अस्पताल आए। अभी भी वह हमसे बात कर रही है।

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