Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

Interview : दिग्विजय की पत्नी अमृता ने हरिभूमि के साथ इंटरव्यू में खोले कई राज

कांग्रेस के कद्दावर नेता दिग्विजय सिंह की पत्नी और प्रख्यात पत्रकार अमृता सिंह ने राजनीति में आने की अटकलों को लेकर रविवार को हरिभूमि से स्पष्ट किया ​कि एक राजनेता की पत्नी होने के नाते वह धर्म और कर्तव्य का पालन करेंगी, लेकिन खुद राजनीति में नहीं आएंगी।

Interview : दिग्विजय की पत्नी अमृता ने हरिभूमि के साथ इंटरव्यू में खोले कई राज
X

राहुल शर्मा, भोपाल। कांग्रेस के कद्दावर नेता दिग्विजय सिंह की पत्नी और प्रख्यात पत्रकार अमृता सिंह ने राजनीति में आने की अटकलों को लेकर रविवार को हरिभूमि से स्पष्ट किया ​कि एक राजनेता की पत्नी होने के नाते वह धर्म और कर्तव्य का पालन करेंगी, लेकिन खुद राजनीति में नहीं आएंगी।

उन्होंने लोकसभा में महिलाओं की भागीदारी के प्रश्न पर कहा कि आधी आबादी को यदि वास्तपव में पार्टियों या सरकारों को अधिकार देना है तो एक पत्रकार होने के नाते मैं मानती हूं कि उनकी 50 फीसदी भागीदारी सुनिश्चित होना चाहिए। महिलाओं को भी इसक लिए आगे आना चाहिए।

आज किसी भी पार्टी में 12 से 15 प्रतिशत से ज्यादा चुनाव में भागीदारी नहीं दी जाती। कम से कम 50 नहीं तो इसे अब बढ़ाकर 33 फीसदी तक तो किया ही जाना चाहिए। आज महिलाएं जागरूक हैं तो फिर क्यों उन्हें 10 फीसदी के हाशिए पर धकेला जा रहा है जब महिलाओं की 50 फीसदी भागीदारी सुनिश्चित होगी तो देश की करीब आधी आबादी की क्या जरूरतें हैं, सरकार से क्या अपेक्षाएं हैं, इसे पूरा करने में काफी सहूलियत होगी। उनसे बातचीत।

सवाल : आपके राजनीति में आने के कयास लगाए जा रहे हैं?
जवाब : बिल्कुल गलत है। मेरा मानना है कि लोगों को भ्रामक जानकारी व सूचनाओं पर नहीं जाना चाहिए। वहीं, मैं यह भी कहना चाहूंगी कि किसी सूचना के मिलने पर सबसे पहले उस संबंधित व्यक्ति से जानकारी जरूर लेना चाहिए, ताकि सही जानकारी लोगों तक पहुंच सके, न कि भ्रामक जानकारी के पीछे चलना और उसे फॉलो करना चाहिए।

सवाल : महिला सुरक्षा को लेकर प्रदेश सरकार ने टोल फ्री नंबर 181 सेवा शुरू की, इस कदम को कितना कारगर मानती हैं?
जवाब : पिछली सरकार ने भी कई दावे किए, यह सरकार भी काम कर रही है। मैं समझती हूं कि जब तक महिलाओं के मन में डर रहेगा कि सड़क पर उसके साथ छेड़छाड़ या अन्य घटना हो सकती है, तब तक सभी प्रयास अधूरे ही माने जाएंगे। जब अभिभावक संतुष्ट हो जाएंगे कि उनकी बेटी घर सुरक्षित आ जाएगी, तब सही मायने में माना जाएगा​ कि महिला सुरक्षा को लेकर कदम उठाए गए हैं।
सवाल : कमलनाथ सरकार ने 52 दिन में 26 वादे पूरे दिए, इस पर आपकी क्या टिप्पणी है?
जवाब : यह तो अच्छा ही है कि सरकार ने अपने वादे पूरे किए हैं, जो वादे रह गए हैं, उन्हें और भी तत्परता से पूरा करने की जरूरत है। सबसे बडत्री समस्या रोजगार की है। युवाओं को पढ़ाई के बाद नौकरी नहीं मिल रही। मिल रही है तो वह योग्यता के अनुसार रोजगार मुहैया कराए।

सवाल : नर्मदा परिक्रमा के दौरान आपने नर्मदा को लेकर शोध की बात कही थी?
जवाब : बिल्कुल अभी उस पर काम भी चल रहा है। मेरी भी यह इच्छा है कि जल्द से जल्द उसे सभी के सामने लाया जाए। नर्मदा परिक्रमा के दौरान मुझे यह देखने को मिला कि जो हमने नर्मदा को लेकर पुस्तकों में पढ़ा, नर्मदा का वह चित्रण अब देखने को नहीं मिलता है। कई जगह पानी बहुत कम है। पौधरोपण की बात भी कही गई थी, लेकिन नर्मदा परिक्रमा के दौरान हमें वह कहीं नहीं दिखे।
सवाल : बतौर पत्रकार क्या कभी ऐसा लगा कि राजा साहब को किसी मुद्दे पर कुछ सलाह देनी चाहिए?
जवाब : यदि मैं कुछ सलाह दूंगी तो वह मीडिया को तो शेयर नहीं करूंगी। राजनीति में उनका अनुभव 40 वर्षों का है। ऐसे में मैं मानती हूं कि उन्हें अपना नजरिया होता है। बतौर पत्रकार मैं मानती हूं कि जो चीज सरकार या उससे जुड़े लोग नहीं देख पाते, हमें उन्हें दिखाना चाहिए।

अमृता ने फेसबुक पर लिखा..कौवा कान ले गया
अमृता सिंह ने राजनीति में आने की अफवाहीं को लेकर फेसबुक पर भी एक पोस्ट की। जिसमें लिखा कि बचपन में कहावत सुनते थे कौवा कान ले गया...सुनकर फलाने कौवे के पीछे दौड़ पड़े..अपने कान नहीं देखे। आजकल इस कहावत को चरितार्थ होते हुए देखती हूं। मीडिया कौवा बन गया है और समाज अपने कान देखने की बजाए कौवे के पीछे दौड़ रहा है। कभी कभी कौवा और समाज दोनों अफवाह के प्रश्न पीछे दौड़ लगा रहे हैं।
अजीब दौर है। इसे कहते हैं पोस्ट ट्रूथ इरा। मीडया कौवा बनकर मेरे चुनाव लड़ने की अफवाह फैलाने में लगी हेै और समाज मुझसे पूछने की बजाए मीडिया खबर के पीछे भाग रहा है। कान देने और कान रखने में फर्क होता है भाई? मगर हां.. मैं जल्द आ रही हूं। आपके बीच ही रहूंगी। प्रोपेगैंडा के लिए नहीं, पब्लिक की सच्ची सोच सामने लाने के लिए।
ये भी कहा
  • निर्णायक संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी भले ही 50 न हो लेकिन 33 फीसदी तो होनी ही चाहिए।
  • जब अभिभावक संतुष्ट हो जाएंगे कि की बेटी घर सुरक्षित जाएगी, यही महिला सुरक्षा की गारंटी मानी जाएगा।
  • सरकार को चाहिए कि वह युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार मुहैया कराए।

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story